खंडवा-बुरहानपुर किसानों में भेदभाव नहीं: सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल का आरोपों पर पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने रविवार, 14 जून को खंडवा में भेदभाव के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि खंडवा और बुरहानपुर दोनों जिलों के किसान उनके लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि वह बिना किसी भेदभाव के क्षेत्र के हर नागरिक के हित में काम करते हैं और जो लोग किसानों को बाँटने की कोशिश कर रहे हैं, वे कभी किसान-हितैषी नहीं हो सकते।
आरोपों का संदर्भ और सांसद का जवाब
कुछ हलकों में यह आरोप लगाए जा रहे थे कि बुरहानपुर के किसानों को सरकारी लाभ मिल रहा है जबकि खंडवा के किसान उपेक्षित हैं। सांसद पाटिल ने इसे राजनीति से प्रेरित भ्रम बताया। उनके अनुसार, दोनों जिलों के किसान उनके लिए 'अन्नदाता' हैं और उनके बीच किसी भी तरह का भेद करना उचित नहीं है।
सोयाबीन नुकसान में ₹24 करोड़ मुआवजे का हवाला
सांसद ने पिछले सोयाबीन संकट का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने स्वयं, अपने विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर खेत-खेत जाकर नुकसान का जायजा लिया था। इसके बाद कलेक्टर और मुख्यमंत्री से आग्रह करके खंडवा जिले के किसानों को लगभग ₹24 करोड़ का मुआवजा दिलवाया गया था। यह तथ्य उन्होंने भेदभाव के आरोपों के खिलाफ प्रमुख प्रमाण के रूप में रखा।
मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री के समक्ष उठाए मुद्दे
पाटिल ने बताया कि उन्होंने सोयाबीन, मिर्च, प्याज और अरबी सहित विभिन्न फसलों से जुड़ी किसानों की समस्याओं को मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने रखा है। इसके अतिरिक्त उन्होंने लोकसभा में भी इन मुद्दों को उठाया है। केले की खेती करने वाले किसानों को हुए नुकसान पर भी आवाज उठाना उन्होंने अपनी जिम्मेदारी बताया।
सांसद का व्यापक दृष्टिकोण
पाटिल ने कहा कि वह केवल किसी एक वर्ग के नहीं, बल्कि क्षेत्र के सभी किसानों, मजदूरों और व्यापारियों की समस्याओं को उठाते हैं, क्योंकि जनता ने उन्हें इसी उद्देश्य के लिए चुना है। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों की आवाज उठाना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और सभी जनप्रतिनिधि एवं प्रशासन इसी दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं। आने वाले समय में किसानों की समस्याओं को और अधिक प्रभावी ढंग से उठाने का उन्होंने संकल्प दोहराया।