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नदी जोड़ो परियोजनाओं में तेजी लाएं, जल संकट का एकमात्र समाधान: नैनार नागेंद्रन

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नदी जोड़ो परियोजनाओं में तेजी लाएं, जल संकट का एकमात्र समाधान: नैनार नागेंद्रन

सारांश

तमिलनाडु BJP अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने नदी जोड़ो परियोजनाओं को राष्ट्रीय प्राथमिकता घोषित करने की माँग की है। केन-बेतवा परियोजना को सहयोग का मॉडल बताते हुए उन्होंने कहा कि वाजपेयी युग की यह परिकल्पना अब देश की जल सुरक्षा के लिए अनिवार्य हो चुकी है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु BJP अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने 30 मई 2026 को नदी जोड़ो परियोजनाओं में तत्काल तेजी लाने की माँग की।
केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को राज्यों के बीच जल सहयोग का प्रमुख उदाहरण बताया — मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश के सूखा-प्रभावित बेतवा बेसिन तक जल पहुँचाने की योजना।
राष्ट्रीय नदी जोड़ो योजना की परिकल्पना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में हुई थी; इसमें महानदी, कृष्णा, कावेरी, गंगा और ब्रह्मपुत्र बेसिन शामिल हैं।
गुजरात में नर्मदा जल वितरण नेटवर्क के विस्तार को बड़े पैमाने की जल प्रबंधन योजनाओं की सफलता के प्रमाण के रूप में उद्धृत किया।
तमिलनाडु की अन्य राज्यों की नदियों पर निर्भरता को देखते हुए नागेंद्रन ने अंतर-राज्यीय जल-साझेदारी अवसंरचना में निवेश को अनिवार्य बताया।

तमिलनाडु भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने 30 मई 2026 को जारी एक बयान में देशभर में नदी जोड़ो (रिवर लिंकिंग) परियोजनाओं को तत्काल और तेज़ गति से लागू करने की माँग की। उनका कहना है कि बढ़ते जल संकट से निपटने और राज्यों के बीच जल संसाधनों का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करने के लिए यह कदम अब अनिवार्य हो चुका है।

केन-बेतवा परियोजना: सहयोग का मॉडल

नागेंद्रन ने केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना का विशेष उल्लेख करते हुए इसे राज्यों के बीच अंतर-राज्यीय जल सहयोग का एक ठोस उदाहरण बताया। यह परियोजना मध्य प्रदेश की केन नदी के अधिशेष जल को उत्तर प्रदेश के सूखा-प्रभावित बेतवा बेसिन तक पहुँचाने के उद्देश्य से तैयार की गई है। उनके अनुसार, इस तरह की परियोजनाएँ यह सिद्ध करती हैं कि राज्य मिलकर जल असंतुलन की समस्या का समाधान कर सकते हैं।

वाजपेयी की परिकल्पना से मोदी की वकालत तक

नागेंद्रन ने याद दिलाया कि राष्ट्रीय स्तर पर नदी जोड़ो योजना की मूल परिकल्पना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान की गई थी। इस महत्वाकांक्षी योजना में महानदी, कृष्णा, पेन्नार, कावेरी, वैगई और तामिराबरानी जैसी प्रमुख नदियों को जोड़ने के साथ-साथ गंगा और ब्रह्मपुत्र बेसिनों को भी एकीकृत करने का प्रस्ताव था।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार जल संसाधनों के संतुलित उपयोग की वकालत करते रहे हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए मोदी के कार्यकाल में नर्मदा नदी के जल वितरण नेटवर्क के विस्तार ने दिखाया कि बड़े पैमाने की जल प्रबंधन योजनाएँ सूखा-प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति बदल सकती हैं।

देरी के कारण और अनुकूल माहौल

नागेंद्रन ने स्वीकार किया कि कानूनी और प्रशासनिक अड़चनों के चलते इन परियोजनाओं में वर्षों तक विलंब हुआ। हालाँकि, उनका कहना है कि लंबी न्यायिक प्रक्रियाओं और नीतिगत विमर्श के बाद अब इन्हें आगे बढ़ाने का अनुकूल माहौल बन चुका है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग के लिए जल उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में कई ठोस कदम उठाए हैं।

तमिलनाडु की जल निर्भरता और दीर्घकालिक सुरक्षा

तमिलनाडु की जल चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाते हुए नागेंद्रन ने कहा कि राज्य काफी हद तक उन नदियों पर निर्भर है जिनका उद्गम अन्य राज्यों में है। ऐसे में दीर्घकालिक जल सुरक्षा के लिए जल-साझेदारी अवसंरचना में निवेश और अंतर-राज्यीय सहयोग दोनों ज़रूरी हैं। उन्होंने सभी राज्यों से आग्रह किया कि वे व्यापक राष्ट्रीय हित में ऐसी परियोजनाओं का समर्थन करें।

नागेंद्रन का आह्वान

नागेंद्रन ने अपने बयान में कहा, 'नदी जोड़ो परियोजनाओं को राष्ट्रीय प्राथमिकता के तौर पर देखा जाना चाहिए। ये बार-बार पड़ने वाले सूखे से निपटने, कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कुंजी हैं।' यह बयान ऐसे समय आया है जब देश के कई हिस्सों में गर्मियों के दौरान जल संकट की स्थिति गहराती जा रही है और जलाशयों का स्तर चिंताजनक रूप से नीचे दर्ज किया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह परियोजना भी पर्यावरणीय मंजूरियों और विस्थापन संबंधी विवादों से जूझती रही है — जिसका बयान में कोई उल्लेख नहीं है। असली सवाल यह है कि तमिलनाडु जैसे राज्य, जो पहले से ही अंतर-राज्यीय जल विवादों में उलझे हैं, राष्ट्रीय ग्रिड में अपने जल अधिकारों की गारंटी कैसे सुनिश्चित करेंगे। बिना पारदर्शी जल-अधिकार ढाँचे के, नदी जोड़ो परियोजनाएँ नए विवादों की ज़मीन भी तैयार कर सकती हैं।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नदी जोड़ो परियोजना क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
नदी जोड़ो परियोजना एक राष्ट्रीय जल प्रबंधन योजना है जिसमें जल-अधिशेष नदियों को जल-अभाव वाले क्षेत्रों से जोड़ा जाता है। इसका उद्देश्य देशभर में जल का संतुलित वितरण सुनिश्चित करना, सूखे से निपटना और कृषि व पेयजल सुरक्षा को मजबूत करना है।
केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना क्या है?
केन-बेतवा परियोजना मध्य प्रदेश की केन नदी के अधिशेष जल को उत्तर प्रदेश के सूखा-प्रभावित बेतवा बेसिन तक पहुँचाने की योजना है। इसे राज्यों के बीच अंतर-राज्यीय जल सहयोग का प्रमुख उदाहरण माना जाता है।
नैनार नागेंद्रन ने यह माँग क्यों उठाई?
तमिलनाडु BJP अध्यक्ष नागेंद्रन ने 30 मई 2026 को जारी बयान में कहा कि देश में बढ़ता जल संकट और तमिलनाडु की अन्य राज्यों की नदियों पर निर्भरता दीर्घकालिक जल सुरक्षा के लिए नदी जोड़ो परियोजनाओं को अनिवार्य बनाती है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय प्राथमिकता घोषित करने की माँग की।
नदी जोड़ो योजना में किन नदियों को जोड़ने का प्रस्ताव है?
मूल योजना में महानदी, कृष्णा, पेन्नार, कावेरी, वैगई, तामिराबरानी के साथ-साथ गंगा और ब्रह्मपुत्र बेसिनों को जोड़ने का प्रस्ताव था। यह परिकल्पना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान सामने आई थी।
इन परियोजनाओं में अब तक देरी क्यों हुई?
नागेंद्रन के अनुसार, कानूनी और प्रशासनिक बाधाओं के चलते इन परियोजनाओं में लंबे समय तक विलंब हुआ। हालाँकि, उनका कहना है कि वर्षों की न्यायिक प्रक्रिया और नीतिगत विमर्श के बाद अब इन्हें आगे बढ़ाने का अनुकूल माहौल बन चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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