10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

चंद्रबाबू नायडू का गोदावरी-कावेरी नदी जोड़ो आह्वान, केंद्र से राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की माँग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
चंद्रबाबू नायडू का गोदावरी-कावेरी नदी जोड़ो आह्वान, केंद्र से राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की माँग

सारांश

तुंगभद्रा बांध के 33 नए गेटों के उद्घाटन के मंच से आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने गोदावरी-कावेरी नदी जोड़ो परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना बनाने की माँग उठाई — तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों की दुर्लभ एकजुटता के बीच।

मुख्य बातें

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने गोदावरी और कावेरी नदियों को जोड़ने को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की माँग की।
यह बयान कर्नाटक के होस्पेटे स्थित तुंगभद्रा बांध पर 33 नए क्रेस्ट गेटों के उद्घाटन के बाद आया।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के.
शिवकुमार और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
2024 में बांध का 19वाँ गेट बह जाने के बाद आंध्र प्रदेश और कर्नाटक ने मिलकर सभी गेट बदले।
अल नीनो के कारण तुंगभद्रा और अलमट्टी जलाशयों में जल प्रवाह प्रभावित होने की चिंता जताई गई।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 26 जून 2025 को गोदावरी और कावेरी नदियों को आपस में जोड़ने का स्पष्ट आह्वान किया और केंद्र सरकार से इसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देने की माँग की। उनके अनुसार इस महत्वाकांक्षी परियोजना से कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना — चारों दक्षिणी राज्यों को सीधा लाभ मिलेगा।

किस मंच से आया यह बयान

मुख्यमंत्री नायडू कर्नाटक के होस्पेटे स्थित तुंगभद्रा बांध पर 33 नए क्रेस्ट गेटों के उद्घाटन के बाद आयोजित जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इस ऐतिहासिक अवसर पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी भी मंच पर उपस्थित थे। तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की यह संयुक्त उपस्थिति केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की पहल पर संभव हुई।

नदी जोड़ो परियोजना की दलील

नायडू ने तर्क दिया कि जिस तरह केन-बेतवा परियोजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की नदियाँ पहले ही आपस में जोड़ी जा चुकी हैं, उसी मॉडल पर दक्षिण भारत में गोदावरी और कावेरी को जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि गंगा और कावेरी को जोड़ दिया जाए तो भारत अजेय बन जाएगा। यह बयान 'एक राष्ट्र, एक ग्रिड' जैसी केंद्रीय पहलों के संदर्भ में दिया गया, जिनकी उन्होंने सराहना की।

तुंगभद्रा बांध का जीर्णोद्धार

नायडू ने बताया कि 2024 में तुंगभद्रा बांध का 19वाँ गेट बह जाने के बाद एक स्टॉप-लॉग गेट लगाया गया था। अब आंध्र प्रदेश और कर्नाटक सरकारों ने मिलकर सभी 33 क्रेस्ट गेट सफलतापूर्वक बदल दिए हैं। यह बांध तीन राज्यों के किसानों को सिंचाई जल और स्थानीय आबादी को पेयजल उपलब्ध कराता है, इसलिए इसका जीर्णोद्धार क्षेत्रीय कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अल नीनो का संकट और जल प्रवाह की चिंता

मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि अल नीनो की मौसमी घटना के कारण तुंगभद्रा और अलमट्टी जलाशयों में ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से पानी का प्रवाह अपेक्षित स्तर पर नहीं हो रहा है। यह स्थिति दक्षिणी राज्यों में जल संकट की आशंका को और गहरा करती है, जो नदी जोड़ो परियोजना की माँग को और अधिक प्रासंगिक बनाती है।

बैठक का ऐतिहासिक महत्व

नायडू ने इस तीन-राज्यीय बैठक को दक्षिणी राज्यों के इतिहास में दर्ज होने वाली घटना बताया। उन्होंने कहा कि सी.आर. पाटिल के नेतृत्व में तीनों मुख्यमंत्रियों ने किसानों के हितों पर एकजुट होकर चर्चा की — यह अंतर-राज्यीय सहयोग का एक सकारात्मक संकेत है। गौरतलब है कि दक्षिण भारत में जल विवाद ऐतिहासिक रूप से कटु रहे हैं, इसलिए इस तरह का सहयोग असाधारण माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अंतर-राज्यीय जल विवादों की जटिलता के कारण कभी ज़मीन पर नहीं उतरी। तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एक मंच पर उपस्थिति प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है, परंतु असली परीक्षा यह है कि क्या यह सहमति कानूनी और तकनीकी बाधाओं को पार कर सकती है। कावेरी जल विवाद अभी भी सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में है, और अल नीनो के दौर में जब जलाशय पहले से कम हैं, तब नदी जोड़ो की बात करना राजनीतिक इच्छाशक्ति तो दर्शाती है — पर व्यावहारिक रोडमैप की ज़रूरत अभी बाकी है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंद्रबाबू नायडू ने गोदावरी-कावेरी नदी जोड़ो परियोजना की माँग कहाँ और क्यों की?
नायडू ने यह माँग कर्नाटक के होस्पेटे स्थित तुंगभद्रा बांध पर 33 नए क्रेस्ट गेटों के उद्घाटन के बाद आयोजित जनसभा में की। उनका कहना था कि इस परियोजना से कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना — चारों राज्यों को जल सुरक्षा मिलेगी।
तुंगभद्रा बांध के 33 नए गेट क्यों लगाए गए?
2024 में तुंगभद्रा बांध का 19वाँ गेट बह जाने के बाद आंध्र प्रदेश और कर्नाटक सरकारों ने मिलकर सभी 33 क्रेस्ट गेट बदलने का निर्णय लिया। यह बांध तीन राज्यों के किसानों को सिंचाई जल और स्थानीय आबादी को पेयजल उपलब्ध कराता है।
गोदावरी-कावेरी जोड़ो परियोजना से कौन-से राज्यों को फायदा होगा?
नायडू के अनुसार इस परियोजना से कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने केन-बेतवा परियोजना का उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तर भारत में नदी जोड़ो का मॉडल सफल रहा है।
इस बैठक में कौन-कौन से नेता शामिल थे?
इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी एक साथ उपस्थित थे। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एक मंच पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अल नीनो का तुंगभद्रा बांध पर क्या असर पड़ रहा है?
नायडू ने बताया कि अल नीनो की घटना के कारण तुंगभद्रा और अलमट्टी जलाशयों में ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से पानी का प्रवाह अपेक्षित स्तर पर नहीं हो रहा है। इससे दक्षिणी राज्यों में जल संकट की आशंका बढ़ रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 10 घंटे पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले