क्या चंद्रबाबू नायडू ने तेलुगु राज्यों के बीच जल विवादों को आपसी सहमति से सुलझाने का आह्वान किया?

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क्या चंद्रबाबू नायडू ने तेलुगु राज्यों के बीच जल विवादों को आपसी सहमति से सुलझाने का आह्वान किया?

सारांश

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने तेलुगु राज्यों के बीच जल विवादों को आपसी सहमति से सुलझाने की अपील की। उन्होंने जल साझा करने और सहयोग पर जोर दिया, जिससे दोनों राज्यों की एकता को बढ़ावा मिले।

Key Takeaways

  • जल विवाद का आपसी सहमति से समाधान जरूरी है।
  • तेलुगु राज्यों की एकता और सहयोग की आवश्यकता है।
  • पोलावरम परियोजना पर विवाद जारी है।
  • जल का बंटवारा कृष्णा और गोदावरी नदियों के बीच हो रहा है।
  • एनटीआर की योजनाओं ने सिंचाई व्यवस्था को मजबूत किया है।

अमरावती, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सोमवार को दोनों तेलुगु राज्यों आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच नदी जल बंटवारे से संबंधित मुद्दों को आपसी सहमति से सुलझाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जल साझा करने सहित सभी लंबित मुद्दों के समाधान के लिए दोनों राज्यों के बीच सहयोग की आवश्यकता है।

गुंटूर में आयोजित तीसरे विश्व तेलुगु सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में शीर्ष स्थान पाने के लिए दोनों तेलुगु राज्यों की एकता अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य जल विवादों का स्थायी समाधान करना है और वे चाहते हैं कि सभी तेलुगु लोग एकजुट रहें।

मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी कृष्णा और गोदावरी नदियों के जल बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच चल रहे विवाद के संदर्भ में आई है। तेलंगाना सरकार ने आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित पोलावरम–नल्लमाला सागर लिंक परियोजना को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। तेलंगाना, पोलावरम परियोजना के विस्तार और गोदावरी का पानी कृष्णा बेसिन में मोड़ने की योजना का विरोध कर रहा है।

चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि जब तेलंगाना ने गोदावरी के प्रचुर जल का उपयोग कर कलेश्वरम परियोजना का निर्माण किया, तब आंध्र प्रदेश ने कोई आपत्ति नहीं जताई। उन्होंने दोहराया कि आंध्र प्रदेश की सभी नदियों को आपस में जोड़ा जाना चाहिए और कृष्णा–गोदावरी नदी जोड़ परियोजना को लागू किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हर साल गोदावरी नदी का लगभग 3,000 टीएमसी पानी समुद्र में व्यर्थ चला जाता है। वहीं, पिछले वर्ष कृष्णा और गोदावरी नदियों से करीब 6,282 टीएमसी पानी समुद्र में बह गया।

इस अवसर पर गोवा के राज्यपाल पी. अशोक गजपति राजू के साथ मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री एन. टी. रामाराव (एनटीआर) की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने विश्व तेलुगु सम्मेलन की स्मृति में डाक विभाग द्वारा जारी विशेष कवर का भी अनावरण किया।

अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने तेलुगुओं की एकता पर जोर देते हुए कहा, “भले ही हम दो राज्य हों, लेकिन तेलुगु हमारी मातृभाषा है। सभी तेलुगु लोग एकजुट रहेंगे तभी हम शिखर पर पहुंचेंगे।”

नायडू ने कहा कि एनटीआर ने अविभाजित आंध्र प्रदेश में कई परियोजनाएं शुरू कर सिंचाई व्यवस्था की नींव रखी। उन्होंने नागार्जुन सागर जल के उपयोग के लिए एसएलबीसी और एसआरबीसी नहरों का निर्माण किया। बाद में मुख्यमंत्री के रूप में मैंने कलवकुर्थी लिफ्ट और नेत्तेम्पाडु जैसी परियोजनाएं पूरी कीं। कृष्णा डेल्टा के आधुनिकीकरण से पानी की बचत हुई और तेलंगाना को 20 टीएमसी पानी आवंटित किया गया। साथ ही भीमा लिफ्ट सिंचाई परियोजना पूरी की गई। गोदावरी नदी पर अली सागर और देवदुला लिफ्ट सिंचाई परियोजनाएं भी शुरू की गईं।

Point of View

यह स्पष्ट है कि जल विवाद केवल एक स्थानीय समस्या नहीं हैं, बल्कि यह राजनीतिक और सामाजिक एकता की आवश्यकता को भी दर्शाते हैं। दोनों राज्यों को सहयोग के साथ आगे बढ़ना होगा।
NationPress
07/01/2026

Frequently Asked Questions

चंद्रबाबू नायडू ने किस सम्मेलन में जल विवादों पर चर्चा की?
चंद्रबाबू नायडू ने गुंटूर में आयोजित तीसरे विश्व तेलुगु सम्मेलन में जल विवादों पर चर्चा की।
तेलंगाना सरकार ने किस परियोजना को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया?
तेलंगाना सरकार ने पोलावरम–नल्लमाला सागर लिंक परियोजना को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
चंद्रबाबू नायडू का जल विवादों के बारे में क्या कहना है?
उनका कहना है कि जल विवादों का स्थायी समाधान करना और तेलुगु लोगों की एकता आवश्यक है।
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