चंद्रबाबू नायडू का बड़ा प्रस्ताव: अमरावती-बेंगलुरु-चेन्नई बुलेट ट्रेन कॉरिडोर, दक्षिणी राज्यों को जोड़ने की पहल
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 20 अगस्त 2026 को महाबलीपुरम में आयोजित दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में अमरावती, बेंगलुरु और चेन्नई को जोड़ने वाले एक बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में नायडू ने दक्षिणी राज्यों के समग्र विकास के लिए कई महत्वाकांक्षी प्रस्ताव पेश किए।
बुलेट ट्रेन और परिवहन नेटवर्क का प्रस्ताव
मुख्यमंत्री नायडू ने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु को जोड़ने वाले एक साझा परिवहन नेटवर्क की माँग रखी। उन्होंने सुझाव दिया कि इस बुलेट ट्रेन मार्ग को कुप्पम — जो उनका स्वयं का विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र है — से होकर गुजारा जाए। इसके साथ ही उन्होंने दक्षिणी राज्यों में एक साझा लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और ड्राई पोर्ट स्थापित करने का भी आह्वान किया। दक्षिणी बिजली ग्रिड को राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ने की माँग भी उन्होंने इस मंच से उठाई।
नदी-जोड़ परियोजनाएँ और जल प्रबंधन
नायडू ने गोदावरी-कावेरी नदी-जोड़ परियोजना के माध्यम से 500 टीएमसी से अधिक पानी के डायवर्जन का प्रस्ताव रखा। उनके अनुसार यह परियोजना तमिलनाडु की जल समस्याओं का स्थायी समाधान प्रदान कर सकती है। उन्होंने आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु से नदी जल संबंधी मुद्दों पर समन्वित प्रयास करने का आह्वान किया और गंगा-कावेरी नदी जोड़ के लिए एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय योजना का समर्थन करते हुए नदी-जोड़ परियोजनाओं के लिए समयबद्ध डीपीआर और अनुमोदन की माँग की।
शिक्षा, आपदा प्रबंधन और पर्यटन के प्रस्ताव
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नायडू ने दक्षिणी राज्यों के विश्वविद्यालयों और कौशल विकास संस्थानों का एक संयुक्त संघ बनाने का प्रस्ताव रखा। आपदाओं के दौरान अंतर-राज्यीय सहयोग के लिए एक पारस्परिक सहायता बल स्थापित करने का सुझाव भी उन्होंने दिया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने तिरुपति को काशी, अयोध्या और चार धाम से जोड़ने वाले एक साझा आध्यात्मिक पर्यटन सर्किट का आह्वान किया।
आंध्र प्रदेश के लंबित मुद्दे और केंद्र से अपील
नायडू ने केंद्र सरकार से संयुक्त आंध्र प्रदेश के विभाजन से उत्पन्न मुद्दों के समाधान में तेजी लाने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के तहत अनुसूची-9 और 10 के संस्थान 12 वर्ष बाद भी अनसुलझे हैं। संसाधन घाटे और धारा 56 से संबंधित मुद्दों के समाधान की भी उन्होंने अपील की। उन्होंने दुर्गराज पटनम बंदरगाह और रिफाइनरी प्रस्तावों के लिए अनुमोदन प्रक्रिया में तेजी और विशाखापत्तनम व विजयवाड़ा मेट्रो रेल परियोजनाओं तथा कडप्पा दक्षिण पश्चिम रेलवे लिंक के लिए केंद्र की मंजूरी माँगी।
दक्षिणी अर्थव्यवस्था की संभावनाएँ और आगे की राह
नायडू ने रेखांकित किया कि दक्षिणी राज्य भारत की जीडीपी में लगभग 31 प्रतिशत का योगदान देते हैं और उनके अनुमान के अनुसार 2047 तक दक्षिणी अर्थव्यवस्था 10 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच सकती है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में दक्षिणी राज्यों को एक प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में उभरना चाहिए। गौरतलब है कि इस बैठक में तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री तथा तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भी उपस्थित थे। केंद्र-राज्य विश्वास और पारस्परिक सहयोग को मुद्दों के समाधान के लिए अनिवार्य बताते हुए नायडू ने कहा कि पोलावरम, दक्षिण तटीय रेलवे जोन और अमरावती परियोजनाएँ केंद्र के सहयोग से आकार ले रही हैं।