क्या मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने गोदावरी पुष्करलू की तैयारियों की समीक्षा की?
सारांश
Key Takeaways
- गोदावरी पुष्करलू का आयोजन 12 दिन तक चलेगा।
- कुल 373 घाटों का विकास किया जाएगा।
- 10 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है।
- पोलावरम परियोजना का काम पूरा किया जाएगा।
- जल को पवित्र मानने की परंपरा का महत्व।
अमरावती, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने शुक्रवार को अगले वर्ष आयोजित होने वाले गोदावरी पुष्करलू की तैयारियों की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने सचिवालय में एक उच्च स्तरीय बैठक में 26 जून, 2027 से 7 जुलाई, 2027 तक चलने वाले 12 दिवसीय इस आयोजन की तैयारियों पर चर्चा की।
पोलावरम, एलुरु, पूर्वी गोदावरी, पश्चिमी गोदावरी, अंबेडकर कोनासीमा और काकीनाडा सहित छह जिलों में पुष्करलू के आयोजन की व्यवस्था की जा रही है।
समीक्षा बैठक से पहले मुख्यमंत्री ने पुरोहितों से आशीर्वाद प्राप्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके कार्यकाल में तीसरी बार गोदावरी पुष्करलू का आयोजन करना उनके लिए एक सौभाग्य है।
सरकार ने मौजूदा 234 घाटों के अतिरिक्त 139 नए घाटों के निर्माण की योजना बनाई है। नदी तट के विभिन्न क्षेत्रों में कुल 373 घाटों के विकास की योजना तैयार की गई है, जिनकी कुल लंबाई 9,918 मीटर है।
अनुमान है कि पुष्करलू के दौरान गोदावरी नदी में स्नान करने के लिए भारत और विदेश से लगभग 10 करोड़ श्रद्धालु राज्य में आएंगे।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि गोदावरी पुष्करलू से पहले पोलावरम परियोजना का काम पूरा कर लिया जाए।
समीक्षा बैठक में मंत्री अनम रामनारायण रेड्डी, अनीता नारायण, निम्मला रामनायडू, वासमसेट्टी सुभाष, कंदुला दुर्गेश, बीसी जनार्दन रेड्डी, मुख्य सचिव विजयानंद और डीजीपी हरीश कुमार गुप्ता उपस्थित थे।
गठबंधन सरकार ने पहले कहा था कि उसका उद्देश्य महाकुंभ मेले की तर्ज पर गोदावरी पुष्करलू का आयोजन करना है और विभागों के बीच सुव्यवस्थित योजना और समन्वय का आह्वान किया था।
जल संसाधन मंत्री रामनायडू ने कहा कि जल को पवित्र मानने की सांस्कृतिक प्रथा हमारी परंपराओं में गहराई से निहित है। उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्रों में वर्णित है कि पुष्करलू के दौरान ऐसी पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत शुभ होता है।
ऐसा माना जाता है कि 12 दिनों तक चलने वाले पुष्करलू में भाग लेने से 12 वर्षों में 12 नदियों में स्नान करने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।
मंत्री ने बताया कि भारतीय संस्कृति में गंगा का अपार पौराणिक महत्व है और गोदावरी को इसके पूजनीय स्थान के कारण दक्षिणी गंगा के रूप में जाना जाता है।