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कर्नाटक में ₹38,000 करोड़ के बकाये पर ठेकेदारों का CM शिवकुमार को ज्ञापन, 1.5 लाख परिवार प्रभावित

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कर्नाटक में ₹38,000 करोड़ के बकाये पर ठेकेदारों का CM शिवकुमार को ज्ञापन, 1.5 लाख परिवार प्रभावित

सारांश

कर्नाटक में ₹38,000 करोड़ का भुगतान संकट — 2021-22 से लंबित बकाये ने 1.5 लाख ठेकेदारों को कर्ज़ के दलदल में धकेल दिया है। ठेकेदार संघ ने CM शिवकुमार को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी है कि बिना बजटीय प्रावधान के नए टेंडर और पुराने बिलों की अनदेखी विकास कार्यों को पटरी से उतार रही है।

मुख्य बातें

कर्नाटक राज्य ठेकेदार संघ ने 2 नवंबर 2026 को CM डी.के.
शिवकुमार को ज्ञापन सौंपा।
सरकारी विभागों में ₹38,000 करोड़ का बकाया वर्ष 2021-22 से लंबित है।
करीब 1.5 लाख ठेकेदार और उनके परिवार आर्थिक संकट में बताए जा रहे हैं।
संघ ने बिना बजटीय प्रावधान के नए टेंडर जारी करने पर रोक और पात्रता अवधि 10 वर्ष करने की माँग उठाई।
कर्नाटक वन विभाग पर धारा 13(बी) के तहत प्रक्रिया-उल्लंघन कर कार्य आवंटन के कथित आरोप।
जल जीवन मिशन और ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण के भुगतान में देरी पर भी चिंता जताई गई।

कर्नाटक राज्य ठेकेदार संघ ने 2 नवंबर 2026 को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को ज्ञापन सौंपकर राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में वर्ष 2021-22 से लंबित ₹38,000 करोड़ के बकाये भुगतान को तत्काल जारी करने की माँग की है। संघ का कहना है कि इस देरी के कारण करीब 1.5 लाख ठेकेदार और उनके परिवार गंभीर आर्थिक संकट में हैं।

मुख्य माँगें और शिकायतें

ज्ञापन में संघ ने याद दिलाया कि सरकार की ओर से पहले यह आश्वासन दिया गया था कि सभी लंबित देनदारियों का भुगतान दो महीने के भीतर कर दिया जाएगा, लेकिन कथित तौर पर इस दिशा में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। संघ ने माँग की है कि बिना बजटीय प्रावधान के नए कार्यों के लिए निविदाएँ (टेंडर) जारी करने पर रोक लगाई जाए और नए विकास कार्य शुरू करने से पहले पुराने बिलों का निपटान अनिवार्य किया जाए।

इसके अलावा संघ ने पैकेज टेंडर प्रणाली को समाप्त करने, टेंडर प्रक्रिया में जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप पर रोक लगाने और कार्य-अनुभव एवं टर्नओवर पात्रता अवधि को बढ़ाकर 10 वर्ष करने की माँग भी उठाई है।

वित्तीय और तकनीकी मुद्दे

ज्ञापन में वर्ष 2017-18 और 2018-19 के लिए 8 प्रतिशत वैट-जीएसटी अंतर राशि जारी करने की माँग की गई है। साथ ही भुगतान के लिए अनिवार्य किए गए कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट मॉड्यूल की शर्त वापस लेने की अपील भी की गई है, जिसे ठेकेदार अव्यावहारिक बताते हैं।

संघ ने जल जीवन मिशन की परियोजनाओं के भुगतान में देरी, कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के लिए आवंटित धनराशि के वितरण में रुकावट और ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण द्वारा रोके गए भुगतानों पर भी गंभीर चिंता जताई है।

वन विभाग पर आरोप

ठेकेदार संघ ने कर्नाटक वन विभाग की निविदा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया है। संघ का दावा है कि हजारों करोड़ रुपये के कार्य निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किए बिना धारा 13(बी) के तहत आवंटित किए गए हैं। यह आरोप गंभीर हैं और इनकी स्वतंत्र जाँच की माँग भी उठ रही है।

आम जनता और विकास कार्यों पर असर

गौरतलब है कि ठेकेदारों के भुगतान में अनिश्चितता सीधे तौर पर सड़क, पानी और अन्य बुनियादी ढाँचे के विकास कार्यों को प्रभावित करती है। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक सरकार अपनी गारंटी योजनाओं के खर्च के चलते पहले से ही राजकोषीय दबाव में बताई जा रही है। आलोचकों का कहना है कि बजटीय प्रावधान के बिना कार्य आवंटन की प्रवृत्ति इस संकट की जड़ है।

क्या होगा आगे

ठेकेदार संघ ने मुख्यमंत्री से संबंधित मंत्रियों, विभागीय सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों की एक बैठक बुलाकर सभी लंबित मुद्दों का शीघ्र समाधान करने का आग्रह किया है। यदि सरकार की ओर से जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो संघ बड़े आंदोलन का संकेत दे रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ का यह बकाया केवल एक संगठन की माँग नहीं, बल्कि कर्नाटक के राजकोषीय प्रबंधन पर एक बड़ा सवाल है। सरकार की गारंटी योजनाओं पर भारी खर्च और बुनियादी ढाँचे के भुगतान में देरी का यह टकराव बताता है कि कल्याणकारी राजनीति और विकास व्यय के बीच संतुलन बिगड़ रहा है। बिना बजटीय प्रावधान के टेंडर जारी करने की प्रवृत्ति — जिसे संघ ने खुद रेखांकित किया है — असल में भविष्य की देनदारियाँ छुपाने का तरीका बन जाती है। यदि वन विभाग के आरोप भी सही साबित हुए, तो यह सिर्फ वित्तीय नहीं बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता का संकट है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में ठेकेदारों का ₹38,000 करोड़ का बकाया क्या है?
यह राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में वर्ष 2021-22 से लंबित भुगतान की कुल राशि है, जो अब तक जारी नहीं की गई है। कर्नाटक राज्य ठेकेदार संघ के अनुसार इससे करीब 1.5 लाख ठेकेदार और उनके परिवार प्रभावित हैं।
ठेकेदार संघ ने CM शिवकुमार से क्या माँगें रखी हैं?
संघ ने ₹38,000 करोड़ के बकाये का तत्काल भुगतान, बिना बजटीय प्रावधान के नए टेंडर पर रोक, पैकेज टेंडर प्रणाली समाप्त करने और पात्रता अवधि 10 वर्ष करने की माँग उठाई है। साथ ही 2017-18 और 2018-19 की 8% वैट-जीएसटी अंतर राशि जारी करने की भी अपील की गई है।
इस बकाये से कौन-कौन सी परियोजनाएँ प्रभावित हैं?
जल जीवन मिशन की परियोजनाएँ, कल्याण कर्नाटक क्षेत्र की धनराशि और ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण के कार्य विशेष रूप से प्रभावित बताए गए हैं। इन सभी मामलों में भुगतान रुका हुआ है और इनके लिए मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप की माँग की गई है।
कर्नाटक वन विभाग पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
ठेकेदार संघ ने आरोप लगाया है कि कर्नाटक वन विभाग ने कथित तौर पर हजारों करोड़ रुपये के कार्य निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किए बिना धारा 13(बी) के तहत आवंटित किए हैं। ये आरोप अभी तक सरकार की ओर से न तो स्वीकार किए गए हैं और न ही खंडन किया गया है।
अब आगे क्या हो सकता है?
ठेकेदार संघ ने मुख्यमंत्री से संबंधित मंत्रियों, सचिवों और अधिकारियों की बैठक बुलाकर शीघ्र समाधान का आग्रह किया है। यदि सरकार की ओर से जल्द ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो संघ बड़े आंदोलन की ओर बढ़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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