भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट: दिल्ली में 2.2 लाख घरों को मुफ्त सोलर पैनल, UP सोलर रूफटॉप में अव्वल
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 2 नवंबर 2026 को आयोजित भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो में देशभर के वरिष्ठ नेताओं और 30 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने सौर ऊर्जा के विस्तार, नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश और ग्रीन एनर्जी की नीतिगत रूपरेखा पर गहन विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री से लेकर राज्यों के नेताओं तक ने एक सुर में नवीकरणीय ऊर्जा को देश की भावी जरूरत बताया।
मुख्य घटनाक्रम
समिट में केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी, दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद, अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल दिनेश शर्मा और उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री एके शर्मा ने भाग लिया। मंत्री प्रह्लाद जोशी के अनुसार, आयोजन में 4 से अधिक मुख्यमंत्री, 2 उपमुख्यमंत्री और विभिन्न राज्यों के 15-16 से अधिक मंत्री उपस्थित रहे। इसके अलावा राज्यों के सचिव, प्रधान सचिव और नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के अधिकारियों ने भी भागीदारी निभाई।
जोशी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा और इससे देश-विदेश के निवेशकों में इस क्षेत्र के प्रति उत्साह बढ़ा है। तीन आयोजनों को एकत्रित कर यह वृहद् समिट संपन्न की गई।
दिल्ली की सौर नीति और ऊर्जा माँग
दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने बताया कि इस वर्ष राजधानी में बिजली की माँग 9,000 मेगावाट तक पहुँचने की संभावना है, जो 2034-35 तक 11,500 मेगावाट तक बढ़ सकती है। इस बढ़ती माँग को देखते हुए सरकार की नई सोलर नीति के तहत लगभग 2 लाख 20 हजार घरों को मुफ्त सोलर पैनल देने की योजना है।
सूद ने एग्रोवोल्ट की अवधारणा का भी उल्लेख किया, जिसके तहत खेती की जमीन पर सोलर पैनल स्थापित किए जाएँगे और उन्हीं पैनलों के नीचे खेती भी जारी रखी जा सकेगी। यह दोहरे उपयोग का मॉडल भूमि संसाधन के अधिकतम उपयोग की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश की ग्रीन एनर्जी में बढ़त
यूपी सरकार के मंत्री एके शर्मा ने दावा किया कि भारत वैश्विक स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा में तीसरे स्थान पर पहुँच चुका है और देश का कुल नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन 100 गीगावाट से अधिक हो गया है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सोलर रूफटॉप कार्यक्रम में पूरे देश में पहले स्थान पर है, और बायोगैस के क्षेत्र में भी राज्य शीर्ष पर होने का दावा किया।
निवेश परिदृश्य
निवेश के आँकड़ों पर मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि समिट के दो दिन अभी शेष हैं, इसलिए कुल निवेश का आकलन जारी है और अभी कोई निश्चित संख्या बताना संभव नहीं। हालाँकि उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में ₹6 लाख करोड़ से अधिक का निवेश आ चुका है और आगे भी सरकार आशावान है।
अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल दिनेश शर्मा ने समिट को वैकल्पिक ऊर्जा क्षेत्र में एक सार्थक प्रयास बताते हुए कहा कि यह आयोजन ऊर्जा और सोलर सिस्टम के विस्तार पर वैश्विक औद्योगिक समूहों और विशेषज्ञों को एकत्र करने का अच्छा मंच बना है।
आगे की राह
समिट का आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब भारत 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। गौरतलब है कि राज्यों की बढ़ती भागीदारी और वैश्विक निवेशकों की रुचि से इस क्षेत्र में गति तेज होने की उम्मीद है। अगले दो दिनों में और भी नीतिगत चर्चाएँ और घोषणाएँ होने की संभावना है।