भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर मार्केट, 2025 में 50 गीगावाट नई क्षमता जोड़ी: विशेषज्ञ
सारांश
Key Takeaways
- भारत 2025 में 50 गीगावाट नई सोलर क्षमता जोड़कर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर मार्केट बना।
- ISA महानिदेशक आशीष खन्ना के अनुसार, पीएम-कुसुम दुनिया की सबसे बड़ी कृषि सोलराइजेशन योजना है।
- कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जेफरी सैक्स ने अदाणी ग्रीन एनर्जी की पहल को वैश्विक स्तर पर सकारात्मक बताया।
- यूरोपीय निवेश बैंक के माइकल स्टीडल ने कहा कि FTA के ज़रिए भारत-यूरोप व्यापार के नए अवसर खुलेंगे।
- TDK सेंसईआई के सीईओ संदीप पंड्या के अनुसार, भारत जल्द ही आर्थिक आकार में जापान को पीछे छोड़ सकता है।
नई दिल्ली में 29 अप्रैल 2026 को आयोजित 'रेजिलिएंट फ्यूचर्स समिट 2026' में वैश्विक और भारतीय विशेषज्ञों ने एकमत होकर कहा कि भारत 2025 में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर मार्केट बन गया है, जहाँ करीब 50 गीगावाट नई सौर क्षमता जोड़ी गई। यह समिट राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित हुई, जिसमें ग्रीन एनर्जी, आर्थिक विकास और तकनीकी नवाचार पर गहन चर्चा हुई।
भारत की सोलर क्रांति: मुख्य तथ्य
इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) के महानिदेशक आशीष खन्ना ने राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए बताया कि भारत की सोलर क्षेत्र में यह छलाँग ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि पीएम-कुसुम योजना दुनिया की सबसे बड़ी कृषि सोलराइजेशन योजना बन चुकी है, जबकि पीएम सूर्य घर योजना भी तेज़ी से आगे बढ़ रही है। खन्ना के अनुसार, भारत इन सफल अनुभवों को अफ्रीका समेत अन्य विकासशील देशों के साथ साझा करने की दिशा में सक्रिय है।
खन्ना ने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में 1,000 गीगावाट और 1 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य रखा था, जिसे दुनिया तेज़ी से हासिल करने की ओर अग्रसर है। उनके अनुसार, यह इस बात का प्रमाण है कि इंटरनेशनल सोलर एलायंस की स्थापना सही समय पर हुई थी।
वैश्विक विशेषज्ञों की राय
कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जेफरी सैक्स ने समिट में कहा कि अदाणी ग्रीन एनर्जी की पहल भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, यह संस्था भविष्य को ध्यान में रखते हुए बड़े पैमाने पर काम कर रही है, जो न केवल भारत बल्कि वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य के लिए भी सकारात्मक संकेत है।
यूरोपीय निवेश बैंक के दक्षिण एशिया प्रमुख माइकल स्टीडल ने राष्ट्र प्रेस को बताया कि भारत इस समय दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर है। स्टीडल ने कहा कि यूरोप भारत को एक मज़बूत रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है और आने वाले समय में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के ज़रिए दोनों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर खुलेंगे।
AI और डिजिटाइजेशन की भूमिका
TDK सेंसईआई के सीईओ संदीप पंड्या ने कहा कि यह समिट यह स्पष्ट करती है कि किस प्रकार AI, डेटा सेंटर और उत्पादकता ऊर्जा क्षेत्र एवं समाज को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में सरकार और कॉर्पोरेट सेक्टर मिलकर सस्टेनेबल एनर्जी पर ज़ोर दे रहे हैं, जिससे भविष्य की ऊर्जा ज़रूरतें पूरी की जा सकेंगी।
पंड्या ने यह भी कहा कि सोलर, विंड और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर तेज़ी से काम हो रहा है। सरकारी समर्थन, विशाल भूमि उपलब्धता और बढ़ती ऊर्जा माँग के चलते भारत इस क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल कर सकता है। उनके अनुसार, भारत जल्द ही जापान को भी आर्थिक आकार में पीछे छोड़ सकता है।
यूरोप-भारत साझेदारी की संभावनाएँ
स्टीडल ने रेखांकित किया कि यूरोप की तकनीकी और नवाचार क्षमता तथा भारत की मैन्युफैक्चरिंग ताकत मिलकर एक बड़ी और टिकाऊ साझेदारी की नींव बन सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ पुनर्गठित हो रही हैं और भारत एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में उभर रहा है।
आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, ऊर्जा क्षेत्र में AI और डिजिटाइजेशन का एकीकरण भारत की अगली बड़ी छलाँग साबित हो सकता है। गौरतलब है कि भारत पहले ही सौर ऊर्जा में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है और अब तकनीकी नवाचार के ज़रिए इस नेतृत्व को और सुदृढ़ करने की योजना है।