भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन 2026: अंतरराष्ट्रीय मेहमानों ने 500 GW लक्ष्य और निवेश संभावनाओं की सराहना की
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के भारत मंडपम में 2 नवंबर 2026 (सोमवार) को आयोजित 'भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन' में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भारत की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता, विनिर्माण संभावनाओं और 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन लक्ष्य की दिशा में वैश्विक सहयोग पर अपने विचार साझा किए। यह सम्मेलन भारत की अक्षय ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
डच उद्यमी की अनोखी तकनीक और भारत में पायलट प्रोजेक्ट
डच उद्यमी पीटर हैक ने भारत की स्वच्छ ऊर्जा पहलों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी कंपनी एक ऐसी अभिनव तकनीक पर काम कर रही है जो न तो सौर ऊर्जा पर आधारित है और न ही पवन ऊर्जा पर। उनके अनुसार यह तकनीक मीठे और खारे पानी के बीच मौजूद ऊर्जा का दोहन करके चौबीसों घंटे निर्बाध बिजली उत्पादन में सक्षम है।
हैक ने बताया कि इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें महंगी बैटरियों की आवश्यकता काफी कम हो जाती है, जो नवीकरणीय ऊर्जा की भंडारण लागत को लेकर मौजूदा सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। उन्होंने भारत में इस तकनीक की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए एक बड़े पायलट प्रोजेक्ट की तैयारी की जानकारी दी।
हैक ने कहा, 'भारत में इस दिशा में वास्तविक प्रगति हो रही है और यही वजह है कि यह काम करने और निवेश करने के लिए एक बेहतरीन जगह है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि कई देशों में ऐसी पहलों पर चर्चा तो होती है लेकिन ज़मीनी क्रियान्वयन नहीं हो पाता — जबकि भारत में स्थिति इसके विपरीत है।
गुयाना के उच्चायुक्त का भरोसा: भारत बनेगा विश्व नेता
गुयाना गणराज्य के उच्चायुक्त धर्मकुमार सीराज ने भी नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत का विशाल आकार, बड़ी जनसंख्या और पिछले डेढ़ दशक में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में हुई तेज़ प्रगति यह सिद्ध करती है कि भारत वैश्विक स्तर पर इस क्षेत्र में नेतृत्व करने की क्षमता रखता है।
सीराज ने विशेष रूप से सरकार की मज़बूत राजनीतिक इच्छाशक्ति को भारत की सफलता का मूल कारण बताया। उन्होंने कहा, 'मुझे पूरा भरोसा है कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में विश्व नेता बनने के अपने लक्ष्य को जरूर हासिल करेगा।'
भारतीय उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
कोसोल एनर्जी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नितिन सांगले ने भारत की सौर ऊर्जा यात्रा का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शी नीतियों को दिया। उन्होंने कहा कि 'सोलर मिशन' से लेकर पीएम सूर्य घर कार्यक्रम और पीएम कुसुम योजना तक — यूटिलिटी-स्केल परियोजनाओं को जो प्रोत्साहन मिला, वह मोदी सरकार की नीतिगत दृष्टि का परिणाम है।
सांगले ने कहा कि आज भारत आत्मविश्वास के साथ सौर ऊर्जा में अपनी उपलब्धियों पर बात कर सकता है और यह गर्व का विषय है कि भारत वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा मानचित्र पर एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभरा है।
500 गीगावाट लक्ष्य और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाएँ
शिखर सम्मेलन में 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता के भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य पर केंद्रित चर्चाएँ हुईं। यह ऐसे समय में आई हैं जब भारत पहले से ही नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में दुनिया के शीर्ष देशों में गिना जाने लगा है और विदेशी निवेशकों की रुचि तेज़ी से बढ़ रही है।
गौरतलब है कि इस सम्मेलन में नीदरलैंड और गुयाना जैसे देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी यह दर्शाती है कि भारत की स्वच्छ ऊर्जा क्रांति अब केवल घरेलू नीति नहीं, बल्कि एक वैश्विक आकर्षण का केंद्र बन चुकी है। पीटर हैक ने उम्मीद जताई कि इससे भारत और नीदरलैंड के बीच स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में मज़बूत और लाभकारी सहयोग विकसित होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के शिखर सम्मेलन भारत को हरित ऊर्जा निवेश के वैश्विक गंतव्य के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाते हैं, और आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में द्विपक्षीय समझौतों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।