सीएम डीके शिवकुमार का सूखा प्रबंधन पर कड़ा रुख: अधिकारियों को चेतावनी, 82% जिलों में बारिश की कमी
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 19 जुलाई 2026 को बेंगलुरु स्थित विधान सौधा में सूखा-प्रभावित जिलों के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि किसानों की परेशानी के लिए किसी भी अधिकारी की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राज्य के 82 प्रतिशत जिलों में वर्षा की भारी कमी और बुआई मात्र 32 प्रतिशत तक सीमित रहने के बीच यह बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने डिप्टी कमिश्नरों (डीसी) के साथ हुई इस बैठक में सूखे से उत्पन्न संकट के चार प्रमुख मोर्चों को प्राथमिकता सूची में रखा — पीने का पानी, पशुओं के लिए चारा, फसल नुकसान का बीमा और बोरवेल खुदाई। उन्होंने कहा, 'पीने का पानी, जानवरों के लिए चारा, फसल के नुकसान का बीमा और ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्या कम करने के लिए बोरवेल खोदना हमारी मुख्य प्राथमिकताएँ हैं।'
शिवकुमार ने यह भी बताया कि राज्य के जलाशयों में जलस्तर 'डेड स्टोरेज' यानी न्यूनतम स्तर तक पहुँच गया है, जिससे पेयजल आपूर्ति सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है।
अधिकारियों को कड़े निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे केवल कागजी आँकड़े प्रस्तुत करने की बजाय जमीनी हकीकत की पुष्टि करके ही डेटा दें। उन्होंने कहा, 'सभी डेटा और आँकड़ों की जमीनी हकीकत से जाँच की जाएगी। इसलिए बिना पुष्टि किए सिर्फ आँकड़े न दें।' साथ ही उन्होंने बोरवेल की डुप्लीकेट बिलिंग और पहले से खोदे गए बोरवेल के लिए नए बिल बनाने जैसे भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।
शिवकुमार ने अधिकारियों को खेतों में जाकर स्वयं स्थिति का मुआयना करने का आदेश भी दिया, ताकि सूखे की वास्तविक गंभीरता का आकलन हो सके।
कर्नाटक में सूखे की स्थिति
मुख्यमंत्री के अनुसार कर्नाटक में इस मौसम में वर्षा की भारी कमी दर्ज की गई है। केवल पाँच-छह जिलों को छोड़कर शेष लगभग 82 प्रतिशत जिले सामान्य से कम बारिश की मार झेल रहे हैं। इसका सीधा असर कृषि पर पड़ा है — राज्य में बुआई का काम अब तक केवल 32 प्रतिशत ही पूरा हो सका है, जो किसानों की आजीविका के लिए गंभीर संकट का संकेत है।
विभागीय समन्वय पर जोर
मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग, ऊर्जा विभाग, कृषि एवं ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग (आरडीपीआर) और जल संसाधन विभाग को निर्देश दिया कि सूखे से उत्पन्न समस्याओं के समाधान के लिए ये सभी विभाग समन्वित रूप से काम करें। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आने वाले दिनों में केंद्र सरकार की समितियाँ निरीक्षण के लिए प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगी, इसलिए अधिकारियों को तथ्यों और आँकड़ों के साथ पूरी तरह तैयार रहना होगा।
बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी
इस उच्चस्तरीय बैठक में उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर, मंत्री के.जे. जॉर्ज, रामलिंगा रेड्डी, ईश्वर खंड्रे और यतींद्र सिद्धारमैया के अलावा मुख्य सचिव डॉ. शालिनी रजनीश, मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार एल.के. अतीक, अतिरिक्त मुख्य सचिव तुषार गिरिनाथ और गौरव गुप्ता सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। राज्य सरकार का यह कदम संकेत देता है कि सूखे की स्थिति और केंद्रीय समितियों के आगामी दौरे को देखते हुए प्रशासनिक तैयारी को युद्धस्तर पर मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।