30 सितंबर 2026
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कर्नाटक ठेकेदार संघ का अल्टीमेटम: ₹38,000 करोड़ बकाया न मिला तो नवंबर में कमीशन दस्तावेज़ होंगे सार्वजनिक

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कर्नाटक ठेकेदार संघ का अल्टीमेटम: ₹38,000 करोड़ बकाया न मिला तो नवंबर में कमीशन दस्तावेज़ होंगे सार्वजनिक

सारांश

कर्नाटक के 1.5 लाख ठेकेदार आर्थिक संकट में हैं और संघ ने नवंबर तक ₹38,000 करोड़ न मिलने पर कथित कमीशन के दस्तावेज़ सार्वजनिक करने की चेतावनी दी है — यह विवाद कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं और ठेकेदारों के फंड के बीच टकराव को उजागर करता है।

मुख्य बातें

कर्नाटक राज्य ठेकेदार संघ ने 30 सितंबर को आठ सरकारी विभागों पर ₹38,000 करोड़ बकाया होने का आरोप लगाया।
संघ ने नवंबर 2026 तक भुगतान न होने पर कथित कमीशन से जुड़े दस्तावेज़ सार्वजनिक करने की चेतावनी दी।
मंजूनाथ ने आरोप लगाया कि ठेकेदारों के फंड का उपयोग कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं में किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कथित तौर पर 30 जून तक बकाया चुकाने का वादा किया था, जो पूरा नहीं हुआ।
भुगतान में देरी से पिछले 4-5 वर्षों में लगभग 1.5 लाख ठेकेदार आर्थिक संकट में हैं।
संघ ने वन विभाग के 13बी और 13सी प्रावधानों के तहत टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता का भी आरोप लगाया।

कर्नाटक राज्य ठेकेदार संघ ने 30 सितंबर को बेंगलुरु में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि राज्य के आठ सरकारी विभागों में ठेकेदारों का लगभग ₹38,000 करोड़ का भुगतान बकाया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि नवंबर 2026 तक यह राशि जारी नहीं की गई, तो कथित कमीशन भुगतान से जुड़े दस्तावेज़ सार्वजनिक कर दिए जाएँगे। संघ ने यह भी आरोप लगाया है कि ठेकेदारों के फंड का उपयोग कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं के वित्तपोषण में किया जा रहा है।

मुख्य आरोप और संघ का पक्ष

संघ के अध्यक्ष आर. मंजूनाथ ने आरोप लगाया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार में ठेकेदारों से माँगे जाने वाले कमीशन में पिछली सरकार की तुलना में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि जिन ठेकेदारों ने कथित तौर पर कमीशन चुकाया, उनके बिलों के भुगतान को प्राथमिकता दी जा रही थी, जबकि बाकी ठेकेदारों के बिल लंबित पड़े हैं।

मंजूनाथ ने दावा किया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पहले ठेकेदारों को आश्वासन दिया था कि सभी बकाया बिलों का भुगतान 30 जून तक कर दिया जाएगा, लेकिन सरकार अपना वादा पूरा करने में नाकाम रही। उन्होंने यह भी कहा कि पीडब्ल्यूडी मंत्री सतीश जारकीहोली ने भी कांग्रेस के सत्ता में आने से पहले आंदोलन के दौरान ठेकेदारों से मुलाकात कर सभी बकाया चुकाने का भरोसा दिलाया था।

गारंटी योजनाओं पर विवाद

संघ का कहना है कि ठेकेदारों के बकाया भुगतान के लिए आवंटित फंड को राज्य सरकार की गारंटी योजनाओं पर खर्च किया जा रहा है। मंजूनाथ ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'गारंटी योजनाओं से हमारा कोई लेना-देना नहीं है। सरकार को दूसरे स्रोतों से फंड का इंतजाम करना चाहिए और हमारा पैसा जारी करना चाहिए।' यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार पर पहले से ही वित्तीय दबाव की खबरें सामने आती रही हैं।

वन विभाग और टेंडर प्रक्रिया पर आरोप

मंजूनाथ ने कर्नाटक वन विभाग में 13बी और 13सी प्रावधानों के तहत काम सौंपने की प्रक्रिया में अनियमितता का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि सैकड़ों करोड़ रुपए के काम सीधे अधिकारियों को सौंपे गए और संघ के पास इससे जुड़े पिछले चार वर्षों के दस्तावेज़ मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने हाल ही में इस प्रथा को रोक दिया है।

गौरतलब है कि पिछली भाजपा सरकार के दौरान भी संघ के पूर्व अध्यक्ष केम्पाना के नेतृत्व में 40 प्रतिशत कमीशन के आरोपों को लेकर आंदोलन हुआ था। मंजूनाथ ने कहा कि कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

ठेकेदारों पर आर्थिक असर

संघ के अनुसार, भुगतान में देरी के कारण पिछले चार से पाँच वर्षों से लगभग 1.5 लाख ठेकेदार गंभीर आर्थिक संकट में हैं। मंजूनाथ ने कहा कि स्थानीय ठेकेदारों की कमज़ोर वित्तीय स्थिति के कारण दूसरे राज्यों के संपन्न ठेकेदार टेंडर प्रक्रिया में बाजी मार सकते हैं, जिससे स्थानीय उद्यमियों को नुकसान होगा।

मंजूनाथ ने यह भी स्वीकार किया कि पीडब्ल्यूडी मंत्री सतीश जारकीहोली और मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा संघ की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं और पीडब्ल्यूडी की ओर से कुछ राहत मिल रही है।

आगे की रणनीति

संघ ने जिला स्तर पर अपना आंदोलन तेज़ करने की घोषणा की है। मंजूनाथ ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री शिवकुमार बैठक नहीं बुलाते, तो ठेकेदार डिप्टी कमिश्नर के कार्यालयों तक पदयात्रा करेंगे और ज्ञापन सौंपेंगे। नवंबर की समयसीमा नज़दीक आने के साथ, यह विवाद कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक और वित्तीय चुनौती बनता जा रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक ठेकेदार संघ का ₹38,000 करोड़ बकाया विवाद क्या है?
कर्नाटक राज्य ठेकेदार संघ ने आरोप लगाया है कि राज्य के आठ सरकारी विभागों में ठेकेदारों का लगभग ₹38,000 करोड़ का भुगतान लंबित है। संघ का कहना है कि इस फंड का उपयोग कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं के लिए किया जा रहा है, जिससे लगभग 1.5 लाख ठेकेदार आर्थिक संकट में हैं।
ठेकेदार संघ ने नवंबर की समयसीमा क्यों तय की है?
संघ अध्यक्ष आर. मंजूनाथ के अनुसार, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पहले 30 जून तक बकाया चुकाने का वादा किया था, जो पूरा नहीं हुआ। इसलिए संघ ने नवंबर 2026 तक का नया अल्टीमेटम दिया है और चेतावनी दी है कि समयसीमा न मानने पर कथित कमीशन भुगतान से जुड़े दस्तावेज़ सार्वजनिक किए जाएँगे।
कर्नाटक ठेकेदार संघ ने कमीशन को लेकर क्या आरोप लगाए हैं?
संघ ने कथित तौर पर आरोप लगाया है कि वर्तमान कांग्रेस सरकार में ठेकेदारों से माँगे जाने वाले कमीशन में पिछली सरकार की तुलना में बढ़ोतरी हुई है और जिन ठेकेदारों ने कमीशन दिया, उनके बिलों को प्राथमिकता दी जा रही है। संघ का दावा है कि उसके पास इससे जुड़े दस्तावेज़ मौजूद हैं।
वन विभाग के 13बी और 13सी प्रावधानों पर क्या विवाद है?
संघ ने आरोप लगाया है कि कर्नाटक वन विभाग में 13बी और 13सी प्रावधानों के तहत टेंडर निकालने के बजाय सीधे अधिकारियों को सैकड़ों करोड़ रुपए के काम सौंपे गए। संघ के पास कथित तौर पर पिछले चार वर्षों के दस्तावेज़ हैं। वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने हाल ही में इस प्रथा को रोक दिया है।
ठेकेदारों के आंदोलन का अगला कदम क्या होगा?
संघ ने जिला स्तर पर आंदोलन तेज़ करने की घोषणा की है। यदि मुख्यमंत्री शिवकुमार बैठक नहीं बुलाते, तो ठेकेदार डिप्टी कमिश्नर कार्यालयों तक पदयात्रा करेंगे और ज्ञापन सौंपेंगे। नवंबर तक भुगतान न होने पर कथित कमीशन दस्तावेज़ सार्वजनिक करने की भी चेतावनी दी गई है।
राष्ट्र प्रेस
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