कुमारस्वामी की माँग: KPSC की सभी परीक्षाएँ स्थगित करो, कांग्रेस सरकार को 'बदले की राजनीति' छोड़ने की नसीहत
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने 7 नवंबर 2026 को बेंगलुरु में कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) द्वारा आयोजित की जा रही सभी भर्ती परीक्षाओं को तत्काल स्थगित करने की माँग की। उन्होंने कहा कि आयोग में पूर्ण सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित होने के बाद ही परीक्षाएँ कराई जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने दीपावली के अवसर पर राज्य की कांग्रेस सरकार को 'नफरत, जाति और बदले की राजनीति' छोड़ने की नसीहत दी।
परीक्षा स्थगन की माँग और KPSC विवाद
जेडीएस के केंद्रीय कार्यालय जेपी भवन में मीडिया से बात करते हुए कुमारस्वामी ने विशेष रूप से 15 नवंबर 2026 को होने वाली 319 राजपत्रित परिवीक्षाधीन अधिकारियों (KAS) की भर्ती परीक्षा स्थगित करने की माँग रखी। उन्होंने कहा कि पिछले तीन से चार वर्षों में KPSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED), अपराध जांच विभाग (CID) और हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) की जाँच चल रही है।
उन्होंने दावा किया कि इन कथित अनियमितताओं से जुड़े वित्तीय लेनदेन भी सामने आए हैं। कुमारस्वामी ने यह भी बताया कि आयोग में सुधार के सुझाव देने के लिए पूर्व मंत्री आर.वी. देशपांडे की अध्यक्षता में गठित समिति ने अभी तक अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है। उन्होंने कहा, 'इन परिस्थितियों में मुझे भरोसा नहीं है कि आयोग पारदर्शी और ईमानदार तरीके से परीक्षाएं तथा भर्तियां करा सकता है। कई नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों ने भी इसी तरह की चिंताएं जताई हैं।'
गौरतलब है कि अभ्यर्थी फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन कर रहे हैं। कुमारस्वामी का तर्क है कि ऐसे माहौल में परीक्षा आयोजित करना ईमानदार और मेधावी उम्मीदवारों के साथ अन्याय होगा।
राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति पर सवाल
कुमारस्वामी ने कर्नाटक सरकार की वित्तीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार पर पूरे हो चुके कार्यों के लिए ठेकेदारों का ₹39,000 करोड़ बकाया है, जबकि कैबिनेट ने ₹26,000 करोड़ की नई सड़क विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा, 'पहले से पूरे हो चुके कार्यों का भुगतान किए बिना नई परियोजनाओं की घोषणा करना हास्यास्पद है।'
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने पैकेज आधारित ठेका प्रणाली शुरू की है, जिसके तहत स्थानीय ठेकेदारों को दरकिनार कर आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश की कंपनियों को काम दिए जा रहे हैं। उनके अनुसार, इससे कर्नाटक के ठेकेदारों के बैंक खाते एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) की श्रेणी में जा रहे हैं।
किसानों की समस्याएँ और बस किराया विवाद
कुमारस्वामी ने सूखे की स्थिति के बावजूद किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं होने पर राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि किसान फसल बीमा का प्रीमियम भरने के बाद भी बीमा कंपनियों द्वारा कथित तौर पर ठगे जा रहे हैं और राज्य सरकार फसल बीमा के लिए अपना निर्धारित अंशदान जारी करने में विफल रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बस किराया बढ़ोतरी को लेकर जनता में नाराजगी बढ़ने के बीच मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने अचानक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर किसानों को ₹2,500 मुआवजा देने की घोषणा की, ताकि बस किराया वृद्धि के मुद्दे से ध्यान भटकाया जा सके।
रामनगर की परियोजनाओं पर श्रेय-विवाद
कुमारस्वामी ने रामनगर में चिकित्सा संस्थानों और परियोजनाओं का श्रेय लेने के लिए कांग्रेस नेताओं पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब वह 2006 में कर्नाटक के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय को रामनगर स्थानांतरित करने का फैसला लिया था और उसके लिए धन भी आवंटित किया था। उन्होंने यह भी कहा कि कनकपुरा में मेडिकल कॉलेज की मंजूरी जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन सरकार के कार्यकाल में दी गई थी।
कुनिगल के 20 कांग्रेस नेता जेडीएस में शामिल
इस बीच, कुनिगल विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस के 20 से अधिक प्रमुख नेता कुमारस्वामी और पूर्व मंत्री डी. नागराजैया की मौजूदगी में जेडीएस में शामिल हो गए। इनमें पूर्व जिला पंचायत सदस्य केम्पेगौड़ा, शिवशंकर, नारायणप्पा, केम्पाहनुमैया, सुरेश, जेसीबी गिरीश, लक्ष्मण, रेणुकैया, नंजेगौड़ा, रामकृष्णप्पा, वसंतराजू, सुरेश, मनु, शिवकुमार, नागन्ना, गंगन्ना, रमेश और शिवन्ना शामिल हैं। इस अवसर पर कुनिगल के वरिष्ठ नेता रवि और जगदीश तथा ग्रेटर बेंगलुरु जेडीएस अध्यक्ष एच.एम. रमेश गौड़ा भी उपस्थित रहे।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक में 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक पुनर्गठन तेज होता दिख रहा है। KPSC सुधार की माँग और सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन के आरोप आने वाले महीनों में राज्य की राजनीति में केंद्रीय मुद्दे बन सकते हैं।