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कर्नाटक में 'खटाखट' गारंटी बनी 'कटौती गारंटी': भाजपा नेता आर. अशोक का कांग्रेस पर तीखा हमला

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कर्नाटक में 'खटाखट' गारंटी बनी 'कटौती गारंटी': भाजपा नेता आर. अशोक का कांग्रेस पर तीखा हमला

सारांश

राहुल गांधी का 'खटाखट' नारा कर्नाटक में राजनीतिक विवाद की जड़ बन गया है। भाजपा नेता आर. अशोक का आरोप है कि कांग्रेस सरकार वित्तीय दबाव में 4,600 समिति सदस्यों के ज़रिए गारंटी लाभार्थियों की सूची छोटी कर रही है — जो 'बिना शर्त गारंटी' के वादे से सीधा विरोधाभास है।

मुख्य बातें

अशोक ने 1 सितंबर को कर्नाटक कांग्रेस सरकार पर गारंटी लाभार्थियों की संख्या घटाने का आरोप लगाया।
अशोक के अनुसार, वार्ड और पंचायत स्तर पर 6-सदस्यीय समितियाँ गठित की गई हैं और लगभग 4,600 सदस्यों को मोबाइल ऐप के साथ घर-घर भेजा जा रहा है।
भाजपा ने इस री-वेरिफिकेशन अभियान को 'सरकारी उत्पीड़न' और कथित वित्तीय कुप्रबंधन को छिपाने की कोशिश बताया।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की 'बिना शर्त गारंटी' को अब 'एग्जिट क्लॉज़ वाली गारंटी' करार दिया गया।
शिवकुमार से सीधे गारंटी को 'धोखा' स्वीकार करने की माँग की गई; कांग्रेस की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।

कर्नाटक में विपक्ष के नेता और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने 1 सितंबर को कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए — कि वह अपनी गारंटी योजनाओं के लाभार्थियों की संख्या घटाने के लिए राज्यभर में बड़े पैमाने पर पुनः सत्यापन (री-वेरिफिकेशन) अभियान चला रही है। अशोक ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के चर्चित 'खटाखट' नारे को निशाना बनाते हुए कहा कि कर्नाटक में इसका 'असली अर्थ' अब सामने आ गया है।

'खटाखट' से 'कटौती' तक का सफर

अशोक ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, 'कर्नाटक के लोगों से कहा गया था कि खटाखट, खटाखट का मतलब है लोगों तक तेजी से गारंटी पहुँचना। तीन साल बाद, कांग्रेस कर्नाटक को सिखा रही है कि खटाखट का असली मतलब क्या है — लाभार्थियों की संख्या में कटौती करना।' गौरतलब है कि राहुल गांधी ने गारंटी योजनाओं की शुरुआत के समय इस शब्द का इस्तेमाल लाभार्थियों के खातों में त्वरित और निरंतर धनराशि हस्तांतरण के संदर्भ में किया था।

री-वेरिफिकेशन अभियान पर आरोप

अशोक ने आरोप लगाया कि राज्य के खजाने पर बढ़ते वित्तीय दबाव के चलते कांग्रेस सरकार ने वार्ड और पंचायत स्तर पर 6-सदस्यीय समितियाँ गठित की हैं। उनके अनुसार, लगभग 4,600 समिति सदस्यों को मोबाइल ऐप के साथ घर-घर भेजा जा रहा है, जहाँ वे लाभार्थियों से तस्वीरें, दस्तावेज़ और फोन नंबर एकत्र कर रहे हैं। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को 'सरकारी उत्पीड़न' की संज्ञा दी।

वादे और हकीकत का अंतर्विरोध

अशोक ने तीखे शब्दों में कहा, 'वादा — वोट पाने के लिए धड़ाधड़ कैश और फायदे बाँटना। हकीकत — राजनीतिक हथकंडों के लिए सरकारी खजाना धड़ाधड़ खाली करना। धोखा — लाभार्थियों के नाम धड़ाधड़ हटाने के लिए वार्ड और पंचायत स्तर पर 6-सदस्यीय कमेटियाँ तैनात करना।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस अभियान का असली मकसद सरकार के कथित वित्तीय कुप्रबंधन को छिपाना है।

गांधी परिवार पर निशाना

अशोक ने कहा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने जिन योजनाओं को 'बिना शर्त गारंटी' के रूप में प्रस्तुत किया था, वे अब 'एग्जिट क्लॉज़ वाली गारंटी' में तब्दील हो गई हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार से सीधे मुखातिब होते हुए कहा, 'री-वेरिफिकेशन वाले ऐप्स की आड़ लेना बंद कीजिए। मान लीजिए कि आपकी गारंटी कर्नाटक की जनता के साथ एक धोखा था।'

आगे क्या

कांग्रेस सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब कर्नाटक सरकार पर राजकोषीय घाटे और कल्याणकारी योजनाओं के वित्तपोषण को लेकर पहले से सवाल उठाए जा रहे हैं। भाजपा के इस हमले से राज्य में राजनीतिक तापमान और बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके नीचे एक वास्तविक राजकोषीय प्रश्न दबा है — क्या कर्नाटक की गारंटी योजनाएँ दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ थीं? लाभार्थी सत्यापन अपने आप में एक वैध प्रशासनिक प्रक्रिया है, लेकिन जब यह चुनावी वादों के तुरंत बाद और वित्तीय तनाव के बीच होती है, तो इसकी मंशा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि कांग्रेस ने अभी तक री-वेरिफिकेशन के मानदंड सार्वजनिक नहीं किए — जब तक पारदर्शिता नहीं आती, भाजपा का आख्यान राजनीतिक शून्य को भरता रहेगा।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में 'खटाखट' गारंटी विवाद क्या है?
भाजपा नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया है कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार अपनी गारंटी योजनाओं के लाभार्थियों की संख्या घटाने के लिए बड़े पैमाने पर री-वेरिफिकेशन अभियान चला रही है। राहुल गांधी का 'खटाखट' नारा — जिसका अर्थ था लाभार्थियों तक त्वरित लाभ पहुँचाना — अब भाजपा के अनुसार 'कटौती' का पर्याय बन गया है।
री-वेरिफिकेशन अभियान में क्या हो रहा है?
अशोक के अनुसार, वार्ड और पंचायत स्तर पर 6-सदस्यीय समितियाँ बनाई गई हैं और लगभग 4,600 सदस्यों को मोबाइल ऐप के साथ घर-घर भेजा जा रहा है। ये सदस्य लाभार्थियों से तस्वीरें, दस्तावेज़ और फोन नंबर एकत्र कर रहे हैं।
भाजपा ने इस अभियान को 'सरकारी उत्पीड़न' क्यों कहा?
भाजपा का आरोप है कि यह अभियान कल्याणकारी लाभार्थियों को परेशान करने और सरकार के कथित वित्तीय कुप्रबंधन को छिपाने के लिए चलाया जा रहा है। अशोक का कहना है कि राज्य खजाने पर वित्तीय दबाव के कारण लाभार्थियों की सूची छोटी की जा रही है।
मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार और कांग्रेस ने क्या कहा?
1 सितंबर तक कांग्रेस सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भाजपा ने शिवकुमार से सीधे माँग की है कि वे गारंटी योजनाओं को 'धोखा' स्वीकार करें।
इस विवाद का कर्नाटक की राजनीति पर क्या असर होगा?
यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब कर्नाटक सरकार पर राजकोषीय घाटे और गारंटी योजनाओं के वित्तपोषण को लेकर पहले से दबाव है। भाजपा इसे कांग्रेस के चुनावी वादों और शासन के बीच की खाई के रूप में पेश कर राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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