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कर्नाटक: आर. अशोका का आरोप — 755 किसान परिवारों की 498 एकड़ जमीन छीन रही कांग्रेस सरकार

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कर्नाटक: आर. अशोका का आरोप — 755 किसान परिवारों की 498 एकड़ जमीन छीन रही कांग्रेस सरकार

सारांश

कर्नाटक में नेता विपक्ष आर. अशोका ने कांग्रेस सरकार पर दोहरा हमला बोला — 755 किसान परिवारों की 498 एकड़ उपजाऊ जमीन रियल एस्टेट के लिए छीनने और ₹39,437 करोड़ के संदिग्ध बेंगलुरु टेंडर का आरोप लगाया। राहुल गांधी से हस्तक्षेप की माँग।

मुख्य बातें

अशोका ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर 755 छोटे किसान परिवारों से 498 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि छीनने का आरोप लगाया।
अशोका ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर अपनी ही पार्टी की राज्य सरकार को जवाबदेह ठहराने की अपील की।
₹39,437 करोड़ के बेंगलुरु ठोस अपशिष्ट प्रबंधन टेंडर पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
राज्य के वित्त विभाग ने कथित तौर पर टेंडर की लागत, 30 वर्ष की रियायती अवधि और संभावित एकाधिकार को लेकर आपत्तियाँ दर्ज की हैं।
5% वार्षिक लागत वृद्धि जारी रही तो तीन दशकों में परियोजना का बोझ करदाताओं पर कई गुना बढ़ सकता है।

कर्नाटक विधानसभा में नेता विपक्ष और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता आर. अशोका ने 14 जून को राज्य की कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार 755 छोटे किसान परिवारों से 498 एकड़ से अधिक उपजाऊ कृषि भूमि छीनकर रियल एस्टेट परियोजनाओं को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने यह आरोप एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट साझा करते हुए लगाए और कांग्रेस नेता राहुल गांधी से अपनी ही पार्टी की राज्य सरकार को जवाबदेह ठहराने की अपील की।

किसानों की जमीन पर विवाद

अशोका ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार एक ओर 'ग्रीन ओवर ग्रीड' — यानी लालच पर हरियाली को प्राथमिकता — का नारा देती है, लेकिन दूसरी ओर कमज़ोर और छोटे किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहित कर रियल एस्टेट परियोजनाओं को बल दे रही है। उन्होंने कहा कि इस विरोधाभास को लेकर उन्होंने राहुल गांधी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की माँग की है। अशोका ने कहा कि कमज़ोर किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए तत्काल कार्रवाई आवश्यक है।

₹39,437 करोड़ के बेंगलुरु टेंडर पर सवाल

इसके अतिरिक्त, अशोका ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा समिति को संबोधित पत्र भी सार्वजनिक किया, जिसमें बेंगलुरु से जुड़े ₹39,437 करोड़ के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) टेंडर पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने समिति से अनुरोध किया कि वह जनहित को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करे।

अशोका ने दावा किया कि राज्य के वित्त विभाग ने भी इस परियोजना की लागत, वार्षिक लागत वृद्धि, 30 वर्ष की लंबी रियायती अवधि और संभावित एकाधिकार जैसी चिंताओं को लेकर आपत्तियाँ दर्ज की हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक टेंडर का मामला नहीं, बल्कि बेंगलुरु के भविष्य और लाखों नागरिकों के हितों से जुड़ा विषय है।

करदाताओं पर बढ़ते बोझ की चेतावनी

अशोका ने चेतावनी दी कि यदि परियोजना में प्रस्तावित 5 प्रतिशत वार्षिक लागत वृद्धि जारी रही, तो अगले तीन दशकों में परियोजना की कुल लागत कई गुना बढ़ सकती है — और यह बोझ अंततः करदाताओं पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु के नागरिक पहले से ही विभिन्न करों और शुल्कों का भार उठा रहे हैं, इसलिए सार्वजनिक धन से जुड़ा हर निर्णय पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ लिया जाना चाहिए।

समीक्षा समिति से निष्पक्षता की अपील

अशोका ने समिति के सदस्यों से किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव से मुक्त होकर काम करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि समिति की रिपोर्ट केवल एक सरकारी दस्तावेज़ नहीं होगी, बल्कि वह बेंगलुरु के दीर्घकालिक भविष्य को प्रभावित करने वाले निर्णयों की आधारशिला बन सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि समिति निष्पक्षता, ईमानदारी और साहस के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाएगी।

आगे क्या होगा

राहुल गांधी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने भी इन आरोपों पर अपना पक्ष सार्वजनिक नहीं किया है। यह मामला राज्य में किसान भूमि अधिग्रहण और बड़े नगरपालिका टेंडरों को लेकर जारी राजनीतिक तनाव को और गहरा कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि कर्नाटक सरकार ने इस भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता क्यों नहीं बरती। 'ग्रीन ओवर ग्रीड' जैसे नारों और कृषि भूमि के कथित रियल एस्टेट उपयोग के बीच का विरोधाभास सरकार के लिए असुविधाजनक सवाल खड़े करता है। ₹39,437 करोड़ का टेंडर और वित्त विभाग की कथित आपत्तियाँ — यदि सत्य हैं — तो यह मामला महज विपक्षी राजनीति से आगे जाता है और सार्वजनिक वित्त की जवाबदेही का मसला बन जाता है। राहुल गांधी की चुप्पी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी जितनी सरकार की प्रतिक्रिया।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आर. अशोका ने कर्नाटक सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
अशोका ने आरोप लगाया है कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार 755 छोटे किसान परिवारों से 498 एकड़ से अधिक उपजाऊ कृषि भूमि लेकर रियल एस्टेट परियोजनाओं को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने इसे 'ग्रीन ओवर ग्रीड' के नारे के साथ सरकार का विरोधाभासी रवैया बताया।
₹39,437 करोड़ का बेंगलुरु टेंडर विवाद क्या है?
यह बेंगलुरु के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) से जुड़ा टेंडर है, जिसकी अनुमानित लागत ₹39,437 करोड़ बताई जा रही है। अशोका ने दावा किया है कि राज्य के वित्त विभाग ने इसकी लागत, 30 वर्ष की रियायती अवधि और संभावित एकाधिकार को लेकर आपत्तियाँ दर्ज की हैं।
आर. अशोका ने राहुल गांधी को पत्र क्यों लिखा?
अशोका ने राहुल गांधी से अपनी ही पार्टी की कर्नाटक सरकार को जवाबदेह ठहराने और किसानों के हितों की रक्षा करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि कमज़ोर और छोटे किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए तत्काल हस्तक्षेप ज़रूरी है।
बेंगलुरु के करदाताओं पर इस टेंडर का क्या असर पड़ सकता है?
अशोका के अनुसार, यदि परियोजना में प्रस्तावित 5 प्रतिशत वार्षिक लागत वृद्धि जारी रही, तो अगले तीन दशकों में इसकी कुल लागत कई गुना बढ़ सकती है। यह अतिरिक्त बोझ अंततः बेंगलुरु के करदाताओं पर पड़ेगा, जो पहले से ही विभिन्न करों और शुल्कों का भार उठा रहे हैं।
कर्नाटक सरकार या राहुल गांधी ने इन आरोपों पर क्या कहा?
अभी तक कर्नाटक की कांग्रेस सरकार और राहुल गांधी की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मामला राज्य में किसान भूमि अधिग्रहण और बड़े नगरपालिका टेंडरों को लेकर राजनीतिक तनाव को और गहरा कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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