कर्नाटक: आर. अशोका का आरोप — 755 किसान परिवारों की 498 एकड़ जमीन छीन रही कांग्रेस सरकार
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा में नेता विपक्ष और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता आर. अशोका ने 14 जून को राज्य की कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार 755 छोटे किसान परिवारों से 498 एकड़ से अधिक उपजाऊ कृषि भूमि छीनकर रियल एस्टेट परियोजनाओं को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने यह आरोप एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट साझा करते हुए लगाए और कांग्रेस नेता राहुल गांधी से अपनी ही पार्टी की राज्य सरकार को जवाबदेह ठहराने की अपील की।
किसानों की जमीन पर विवाद
अशोका ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार एक ओर 'ग्रीन ओवर ग्रीड' — यानी लालच पर हरियाली को प्राथमिकता — का नारा देती है, लेकिन दूसरी ओर कमज़ोर और छोटे किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहित कर रियल एस्टेट परियोजनाओं को बल दे रही है। उन्होंने कहा कि इस विरोधाभास को लेकर उन्होंने राहुल गांधी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की माँग की है। अशोका ने कहा कि कमज़ोर किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए तत्काल कार्रवाई आवश्यक है।
₹39,437 करोड़ के बेंगलुरु टेंडर पर सवाल
इसके अतिरिक्त, अशोका ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा समिति को संबोधित पत्र भी सार्वजनिक किया, जिसमें बेंगलुरु से जुड़े ₹39,437 करोड़ के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) टेंडर पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने समिति से अनुरोध किया कि वह जनहित को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
अशोका ने दावा किया कि राज्य के वित्त विभाग ने भी इस परियोजना की लागत, वार्षिक लागत वृद्धि, 30 वर्ष की लंबी रियायती अवधि और संभावित एकाधिकार जैसी चिंताओं को लेकर आपत्तियाँ दर्ज की हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक टेंडर का मामला नहीं, बल्कि बेंगलुरु के भविष्य और लाखों नागरिकों के हितों से जुड़ा विषय है।
करदाताओं पर बढ़ते बोझ की चेतावनी
अशोका ने चेतावनी दी कि यदि परियोजना में प्रस्तावित 5 प्रतिशत वार्षिक लागत वृद्धि जारी रही, तो अगले तीन दशकों में परियोजना की कुल लागत कई गुना बढ़ सकती है — और यह बोझ अंततः करदाताओं पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु के नागरिक पहले से ही विभिन्न करों और शुल्कों का भार उठा रहे हैं, इसलिए सार्वजनिक धन से जुड़ा हर निर्णय पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ लिया जाना चाहिए।
समीक्षा समिति से निष्पक्षता की अपील
अशोका ने समिति के सदस्यों से किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव से मुक्त होकर काम करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि समिति की रिपोर्ट केवल एक सरकारी दस्तावेज़ नहीं होगी, बल्कि वह बेंगलुरु के दीर्घकालिक भविष्य को प्रभावित करने वाले निर्णयों की आधारशिला बन सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि समिति निष्पक्षता, ईमानदारी और साहस के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाएगी।
आगे क्या होगा
राहुल गांधी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने भी इन आरोपों पर अपना पक्ष सार्वजनिक नहीं किया है। यह मामला राज्य में किसान भूमि अधिग्रहण और बड़े नगरपालिका टेंडरों को लेकर जारी राजनीतिक तनाव को और गहरा कर सकता है।