कर्नाटक BJP ने CM शिवकुमार को दी चुनौती: टेंडर पैनल रिपोर्ट करें सार्वजनिक, ₹36,500 करोड़ घोटाले का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने गुरुवार, 11 जून को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को सीधी चुनौती दी — बेंगलुरु के प्रस्तावित इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट की टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जाँच के लिए गठित हाई-लेवल कमेटी की रिपोर्ट तत्काल सार्वजनिक करें। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस प्रोजेक्ट में ₹36,500 करोड़ के घोटाले और ₹10,000 करोड़ की रिश्वत का आरोप लगाया है, जिसे कांग्रेस सरकार ने सिरे से खारिज किया है।
मुख्य घटनाक्रम
बुधवार को अशोक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया था कि कांग्रेस सरकार ने वेस्ट मैनेजमेंट के टेंडर बड़ी कंपनियों को दे दिए, जबकि पहले यह काम स्थानीय स्तर पर अलग-अलग ऑपरेटरों के जरिए होता था। उन्होंने दावा किया, 'यह ₹36,500 करोड़ के प्रोजेक्ट से जुड़ा बड़ा घोटाला है और इसमें ₹10,000 करोड़ की रिश्वत ली गई है।'
इसके बाद अशोक के नेतृत्व में BJP प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात की और CBI जाँच की माँग करते हुए ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कांग्रेस सरकार को बर्खास्त करने की भी माँग की।
शिवकुमार का पलटवार और अशोक का जवाब
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने बुधवार को अशोक पर 'कचरा माफिया के एजेंट' के तौर पर काम करने और 'जलन से प्रेरित राजनीति' करने का आरोप लगाया था। गुरुवार को अशोक ने पलटवार करते हुए कहा कि वह 'जनता के एजेंट' हैं, न कि 'माफिया के हितों की रक्षा करने वाले कमीशन एजेंट।'
अशोक ने कहा कि विपक्ष के नेता के रूप में कर्नाटक की 7.5 करोड़ जनता और बेंगलुरु के 1.5 करोड़ निवासियों की ओर से सरकार के कामों पर सवाल उठाना उनका संवैधानिक कर्तव्य है।
पारदर्शिता पर सीधा सवाल
अशोक ने कहा कि सरकार ने टेंडर अनियमितताओं की जाँच के लिए हाई-लेवल कमेटी बनाई थी और रिपोर्ट सौंपने के लिए एक हफ्ते की समय-सीमा तय की थी। उन्होंने शिवकुमार को ललकारा: 'अगर पारदर्शिता का जरा भी अंश बचा है तो रिपोर्ट बिना किसी देरी के सार्वजनिक की जानी चाहिए। राज्य की जनता को तथ्य देखने दें और खुद फैसला करने दें।'
BJP नेता ने आरोप लगाया कि यह कमेटी टेंडर नियमों के उल्लंघन को छिपाने के मकसद से बनाई गई थी और माँग की कि जाँच के नतीजे पूरी तरह सार्वजनिक किए जाएँ।
कांग्रेस में आंतरिक असंतोष का दावा
अशोक ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस के भीतर ही असंतोष उभर रहा है — विधायक सार्वजनिक रूप से शिकायतें जाहिर कर रहे हैं और पार्टी हाईकमान के सामने चिंताएँ रखने के लिए अक्सर नई दिल्ली जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिवकुमार सरकार परेशान है क्योंकि विपक्ष ने उसे कोई 'हनीमून पीरियड' नहीं दिया।
शिवकुमार की पारदर्शिता संबंधी बातों को अशोक ने 'सदी का सबसे बड़ा मजाक' करार दिया और कहा कि कर्नाटक की जनता मुख्यमंत्री के राजनीतिक इतिहास और प्रशासनिक रिकॉर्ड से भली-भाँति परिचित है।
आगे क्या होगा
यह विवाद कांग्रेस सरकार के खिलाफ BJP का पहला बड़ा भ्रष्टाचार-केंद्रित आक्रमण माना जा रहा है। हाई-लेवल कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक होती है या नहीं — यह आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति की दिशा तय करेगा। CBI जाँच की माँग और राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन के बाद यह मामला केंद्र-राज्य संबंधों को भी प्रभावित कर सकता है।