30 अगस्त 2026
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कर्नाटक मतदाता सूची विवाद: डीके शिवकुमार ने ECI से माँगा अधिक समय, 1.5 करोड़ नाम हटने का खतरा

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कर्नाटक मतदाता सूची विवाद: डीके शिवकुमार ने ECI से माँगा अधिक समय, 1.5 करोड़ नाम हटने का खतरा

सारांश

कर्नाटक में SIR प्रक्रिया के तहत 1.08 करोड़ मतदाता ASDDO श्रेणी में चिह्नित हैं और 1.5 करोड़ नाम हटने का खतरा मँडरा रहा है। CM शिवकुमार ने ECI को पत्र लिखकर समयसीमा बढ़ाने की माँग की — यह सवाल उठाते हुए कि क्या प्रशासनिक चूक लाखों वैध मतदाताओं का अधिकार छीन सकती है।

मुख्य बातें

शिवकुमार ने 25 अगस्त 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर SIR प्रक्रिया की समयसीमा बढ़ाने की माँग की।
कर्नाटक के कुल 5.54 करोड़ मतदाताओं में से 1.08 करोड़ ASDDO श्रेणी में; 1.5 करोड़ नाम हटने की आशंका।
बेंगलुरु में अकेले 46.88 लाख मतदाता ASDDO श्रेणी में चिह्नित।
करीब 43.8 लाख मतदाताओं को तार्किक विसंगतियों के कारण सत्यापन नोटिस भेजे जाने की संभावना।
शिवकुमार ने चार माँगें रखीं — समयसीमा विस्तार, ग्रामसभा/वार्ड बैठकें, 3-4 सप्ताह का अतिरिक्त समय और ASDDO-प्रभावित जिलों में अतिरिक्त अधिकारी।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर पत्र साझा कर बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने की आशंका जताई।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 25 अगस्त 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर राज्य में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची सत्यापन की समयसीमा बढ़ाने की माँग की है। उनकी चिंता का केंद्र यह है कि यदि दावे-आपत्तियों की अवधि नहीं बढ़ाई गई, तो कर्नाटक के करीब 1.5 करोड़ वैध मतदाताओं के नाम सूची से हट सकते हैं।

मुख्य घटनाक्रम

24 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद यह विवाद सामने आया। राज्य के कुल 5.54 करोड़ मतदाताओं में से करीब 1.08 करोड़ मतदाताओं को 'ASDDO' (अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट) श्रेणी में रखा गया है। इसके अतिरिक्त, लगभग 43.8 लाख मतदाताओं को तार्किक विसंगतियों अथवा वर्ष 2002 की मतदाता सूची से लिंक न होने के कारण सत्यापन नोटिस भेजे जाने की संभावना है।

राजधानी बेंगलुरु की स्थिति विशेष रूप से गंभीर है, जहाँ अकेले 46.88 लाख मतदाता ASDDO श्रेणी में चिह्नित किए गए हैं — यह किसी भी एकल शहर के लिए असाधारण रूप से बड़ी संख्या है।

शिवकुमार की चार प्रमुख माँगें

मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग के समक्ष चार ठोस माँगें रखी हैं। पहली, दावे एवं आपत्तियाँ दर्ज कराने की अवधि बढ़ाई जाए। दूसरी, शहरी क्षेत्रों में वार्ड समिति और ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामसभा बैठकें आयोजित की जाएँ। तीसरी, मतदाताओं को जवाब देने के लिए तीन से चार सप्ताह का पर्याप्त समय दिया जाए। चौथी, अधिक ASDDO मामलों वाले जिलों में अतिरिक्त अधिकारी तैनात किए जाएँ।

वास्तविक मतदाताओं पर असर की आशंका

शिवकुमार ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि 'अनुपस्थित' श्रेणी में दर्ज कई व्यक्ति वास्तव में पात्र मतदाता हो सकते हैं, जो नौकरी, स्वास्थ्य या अन्य अपरिहार्य कारणों से गणना प्रपत्र जमा नहीं कर पाए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जिन मतदाताओं ने निवास या मतदान केंद्र बदला है और बूथ स्तर अधिकारियों (BLO) की घर-घर सत्यापन प्रक्रिया में छूट गए हैं, उन्हें भी अनुचित रूप से सूची से बाहर किए जाने का खतरा है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'स्थान परिवर्तन किसी व्यक्ति को मताधिकार से वंचित करने का कारण नहीं बनना चाहिए।'

राजनीतिक प्रतिक्रिया

कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शिवकुमार का पत्र साझा करते हुए आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के ज़रिये बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल देश के कई राज्यों में मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं।

आगे की राह

मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार ग्रामसभा एवं वार्ड समिति बैठकों, जागरूकता अभियानों और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में चुनाव आयोग को पूरा सहयोग देने के लिए तैयार है। उन्होंने जोर देकर कहा, 'उद्देश्य ऐसी मतदाता सूची तैयार करना होना चाहिए जिस पर कर्नाटक के लोग भरोसा कर सकें — जिसमें हर पात्र नागरिक शामिल हो, अपात्र नाम हटाए जाएँ और किसी भी नागरिक को केवल समय, जानकारी या अवसर की कमी के कारण मतदान अधिकार से वंचित न होना पड़े।' चुनाव आयोग की ओर से इस पत्र पर अभी कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि केवल क्रियान्वयन में। बेंगलुरु जैसे प्रवासी-बहुल शहर में 46.88 लाख संदिग्ध मतदाता होना तय करता है कि यह मुद्दा प्रशासनिक दक्षता से कहीं बड़ा है — यह लोकतांत्रिक भागीदारी का सवाल है। असली परीक्षा यह है कि चुनाव आयोग समयसीमा विस्तार की माँग पर कितनी तेज़ी से और पारदर्शी तरीके से प्रतिक्रिया देता है, क्योंकि विलंब का अर्थ होगा लाखों वैध नागरिकों का मताधिकार खतरे में पड़ना।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में SIR प्रक्रिया क्या है और इसे लेकर विवाद क्यों है?
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण वह प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची को अद्यतन और सत्यापित करता है। विवाद इसलिए है क्योंकि कर्नाटक में 1.08 करोड़ मतदाताओं को ASDDO श्रेणी में रखा गया है, जिससे उनके नाम हटने का खतरा है।
ASDDO श्रेणी का मतलब क्या है और इससे कौन प्रभावित होगा?
ASDDO का अर्थ है — अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट मतदाता। इस श्रेणी में आने वाले मतदाताओं को सत्यापन नोटिस भेजा जाता है और समय पर जवाब न देने पर नाम हटाया जा सकता है। नौकरी, स्वास्थ्य या स्थान परिवर्तन के कारण जो वैध मतदाता BLO की जाँच में छूट गए, वे सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं।
डीके शिवकुमार ने चुनाव आयोग से क्या-क्या माँगें की हैं?
CM शिवकुमार ने चार माँगें रखी हैं — दावे-आपत्तियों की अवधि बढ़ाना, शहरी क्षेत्रों में वार्ड समिति और ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामसभा बैठकें आयोजित करना, मतदाताओं को 3-4 सप्ताह का अतिरिक्त समय देना और अधिक ASDDO मामलों वाले जिलों में अतिरिक्त अधिकारी तैनात करना।
बेंगलुरु में मतदाता सूची की स्थिति सबसे गंभीर क्यों है?
बेंगलुरु में अकेले 46.88 लाख मतदाता ASDDO श्रेणी में चिह्नित हैं, जो किसी भी एकल शहर के लिए असाधारण रूप से बड़ी संख्या है। बेंगलुरु का प्रवासी-बहुल स्वरूप — जहाँ लाखों लोग काम के लिए शहर आते-जाते हैं — इस समस्या को और जटिल बनाता है।
क्या चुनाव आयोग ने शिवकुमार के पत्र पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक चुनाव आयोग की ओर से इस पत्र पर कोई औपचारिक सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर यह पत्र साझा कर दबाव बनाने की कोशिश की है।
राष्ट्र प्रेस
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