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बेंगलुरु ISWM निविदा में ₹36,500 करोड़ के घोटाले का आरोप, कर्नाटक भाजपा ने CBI जांच की मांग की

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बेंगलुरु ISWM निविदा में ₹36,500 करोड़ के घोटाले का आरोप, कर्नाटक भाजपा ने CBI जांच की मांग की

सारांश

बेंगलुरु के अपशिष्ट प्रबंधन ठेके में ₹36,500 करोड़ के घोटाले और ₹10,000 करोड़ की रिश्वत का आरोप लगाते हुए BJP ने राज्यपाल से CBI जांच और शिवकुमार सरकार को बर्खास्त करने की माँग की — यह कांग्रेस सरकार के खिलाफ पार्टी का पहला बड़ा भ्रष्टाचार का आरोप है।

मुख्य बातें

कर्नाटक विपक्ष के नेता आर.
अशोक ने बेंगलुरु ISWM परियोजना में कथित ₹36,500 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया।
BJP प्रतिनिधिमंडल ने 10 जून को राज्यपाल थावरचंद गहलोत को ज्ञापन देकर CBI जांच की माँग की।
आरोप है कि निविदा प्रक्रिया में कथित तौर पर ₹10,000 करोड़ की रिश्वत दी गई।
निविदा की अवधि 65 वर्ष रखी गई है, जिसे अशोक ने असामान्य और संदिग्ध बताया।
ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) में वर्तमान में कोई निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं है।
BJP ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की सरकार को बर्खास्त करने की माँग भी की।

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने बुधवार, 10 जून को बेंगलुरु के लिए प्रस्तावित इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (ISWM) परियोजना की निविदा प्रक्रिया में कथित ₹36,500 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग की। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात कर इस संबंध में ज्ञापन भी सौंपा।

क्या हैं आरोप

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अशोक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने ISWM परियोजना के तहत अपशिष्ट प्रबंधन के ठेके शक्तिशाली कंपनियों को सौंप दिए, जबकि इससे पहले यह काम स्थानीय ऑपरेटरों द्वारा किया जाता था। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया में कथित तौर पर ₹10,000 करोड़ की रिश्वत दी गई है।

अशोक ने 65 वर्ष की असामान्य रूप से लंबी निविदा अवधि पर भी सवाल उठाए और कहा कि कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में यह अपनी तरह का पहला बड़ा मामला है। उन्होंने इसे 'बेंगलुरु के करदाताओं को लूटने का कार्यक्रम' करार दिया।

ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी और निर्वाचित प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति

विपक्षी नेता ने यह भी रेखांकित किया कि वर्तमान में ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) में कोई निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं है। उनके अनुसार, इसी शासन-शून्यता का फायदा उठाकर कथित तौर पर यह निविदा अनियमितता अंजाम दी गई। आलोचकों का कहना है कि निर्वाचित निकाय की अनुपस्थिति में इस स्तर की परियोजना को मंजूरी देना प्रशासनिक पारदर्शिता के मानकों के विरुद्ध है।

राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि ये आरोप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के खिलाफ BJP द्वारा लगाया गया पहला बड़ा भ्रष्टाचार का आरोप माना जा रहा है। अशोक ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पूर्व बयानों का हवाला देते हुए राज्य सरकार पर बेंगलुरु निवासियों पर कचरा कर और विभिन्न उपकर लगाने का भी आरोप लगाया। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से कांग्रेस सरकार को बर्खास्त करने की माँग भी की।

सरकार की प्रतिक्रिया

अभी तक मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार या राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। रिपोर्टों के अनुसार, राज्यपाल कार्यालय ने ज्ञापन प्राप्त किया है और उस पर विचार किया जाएगा।

आगे क्या

BJP ने स्पष्ट किया है कि यदि CBI जांच की माँग नहीं मानी गई, तो वह इस मुद्दे को विधानसभा में और सड़क पर दोनों जगह उठाएगी। यह मामला कर्नाटक की राजनीति में आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, खासकर तब जब GBA में निर्वाचित प्रतिनिधित्व की बहाली का सवाल पहले से ही लंबित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

500 करोड़ और ₹10,000 करोड़ की रिश्वत जैसे आँकड़े चौंकाने वाले हैं, लेकिन ये अभी तक केवल विपक्षी दल के दावे हैं — न किसी जाँच एजेंसी के निष्कर्ष, न न्यायालय के आदेश। असली सवाल यह है कि 65 वर्ष की निविदा अवधि और GBA में निर्वाचित प्रतिनिधित्व की अनुपस्थिति जैसी प्रशासनिक खामियों की जाँच क्यों नहीं हुई। कर्नाटक में पहले भी ठेका-राजनीति के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन CBI तक बात शायद ही पहुँची हो — इस बार भी राज्यपाल का रुख निर्णायक होगा।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेंगलुरु ISWM परियोजना क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
ISWM यानी इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट परियोजना बेंगलुरु के कचरा प्रबंधन को केंद्रीकृत करने की योजना है। BJP का आरोप है कि इस परियोजना की निविदा प्रक्रिया में ₹36,500 करोड़ की अनियमितता हुई और स्थानीय ऑपरेटरों की जगह शक्तिशाली कंपनियों को ठेका दिया गया।
BJP ने CBI जांच की माँग क्यों की?
BJP के अनुसार, राज्य सरकार पर भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि आरोप सीधे सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार पर हैं। इसलिए विपक्ष ने स्वतंत्र और समयबद्ध जाँच के लिए केंद्रीय एजेंसी CBI को उचित माना और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा।
65 साल की निविदा अवधि पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं?
विपक्षी नेता आर. अशोक का कहना है कि कचरा प्रबंधन जैसी सेवा के लिए 65 वर्ष की अवधि असामान्य रूप से लंबी है और इसे सार्वजनिक हित के विरुद्ध बताया गया है। उनके अनुसार, इतनी लंबी अवधि का ठेका पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है।
ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी में निर्वाचित प्रतिनिधि क्यों नहीं हैं?
GBA में फिलहाल कोई निर्वाचित सदस्य नहीं है, जिससे नागरिक निकाय की निगरानी कमज़ोर पड़ी है। BJP का आरोप है कि इसी शासन-शून्यता का फायदा उठाकर कथित तौर पर यह निविदा अनियमितता की गई।
कांग्रेस सरकार ने इन आरोपों पर क्या कहा?
अभी तक मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार या राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। रिपोर्टों के अनुसार, राज्यपाल कार्यालय ने BJP का ज्ञापन प्राप्त कर लिया है।
राष्ट्र प्रेस
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