वाल्मीकि निगम घोटाला: BJP ने नागेंद्र का इस्तीफा माँगा, अशोक बोले — 'पहले भी दिलवाया, इस बार भी लेंगे'
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने बुधवार, 19 अगस्त को बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि BJP, कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़े कथित घोटाले में योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र का इस्तीफा लेकर रहेगी। अशोक ने कहा, "हमने पहले भी आंदोलन करके नागेंद्र का इस्तीफा दिलवाया था। इस बार भी उनका इस्तीफा लेकर रहेंगे।" यह बयान उस दिन आया जब BJP और जनता दल (सेक्युलर) ने विधानसभा की कार्यवाही बाधित कर नागेंद्र के इस्तीफे की माँग की।
घोटाले के आरोप: ₹187 करोड़ और 600 खाते
अशोक ने आरोप लगाया कि कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के ₹187 करोड़ कथित तौर पर डायवर्ट किए गए, जिनमें से ₹1.2 करोड़ सीधे नागेंद्र के खाते में जमा किए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नागेंद्र के रिश्तेदारों और करीबी सहयोगियों के खातों में भी रकम ट्रांसफर की गई।
BJP नेता के अनुसार, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट में इस कथित लेन-देन का विस्तृत ब्योरा दिया गया है और धनराशि करीब 600 खातों में बाँटी गई। अशोक ने सवाल किया कि मंत्री की जानकारी या सहमति के बिना सरकारी धन इतनी बड़ी संख्या में खातों में कैसे ट्रांसफर हो सकता था।
उन्होंने नागेंद्र के करीबी सहयोगी नेक्कुंटी नागराज का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि उनके खाते में भी रकम जमा की गई। अशोक के अनुसार, यह धनराशि आंध्र प्रदेश के एक सहकारी बैंक के जरिए भेजी गई और बाद में नागेंद्र के गृह जिले बल्लारी तक पहुँचाई गई। उन्होंने इसे 'पहले से सुनियोजित घोटाला' करार दिया।
CBI और ED की चार्जशीट, CID की क्लीन चिट पर विवाद
अशोक ने बताया कि इस मामले में CBI तीन चार्जशीट दाखिल कर चुकी है और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी चार्जशीट दाखिल की है। उन्होंने राज्य सीआईडी (CID) द्वारा नागेंद्र को कथित तौर पर दी गई क्लीन चिट को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि नागेंद्र को अदालत से — विशेष रूप से सांसदों और विधायकों के मामलों की विशेष अदालत से — क्लीन चिट लेकर आनी चाहिए।
अशोक ने पूर्व BJP मंत्री के.एस. ईश्वरप्पा का उदाहरण देते हुए कहा कि CID से क्लीन चिट मिलने के बावजूद उन्हें तुरंत मंत्रिमंडल में वापस नहीं लिया गया था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बिना जाँच के 9,000 पन्नों की चार्जशीट कैसे तैयार हो सकती है।
नागेंद्र की दलील और BJP का जवाब
मंत्री नागेंद्र ने विपक्ष पर उन्हें निशाना बनाने का आरोप लगाया और कहा कि 'मनुवादी' एक दलित एवं आदिवासी नेता को मंत्रिमंडल से हटाने की साजिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी सवाल किया कि जब सरकार सदन में चर्चा के लिए तैयार है, तो विपक्ष इस्तीफे की माँग पर क्यों अड़ा है।
अशोक ने इस दलील को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के पास अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के कई नेता हैं और यदि वह प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना चाहती है तो अन्य ST नेताओं को मंत्री बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा, "यहाँ दलित कार्ड नहीं खेलना चाहिए।"
CBI-ED की स्वायत्तता पर बहस
नागेंद्र ने CBI और ED को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था। इस पर अशोक ने पलटवार करते हुए कहा कि ये एजेंसियाँ दशकों से काम कर रही हैं और उन्होंने सवाल किया कि क्या पहले भी ये राजनीतिक थीं। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि जाँच राजनीतिक रूप से प्रेरित थी, तो केवल नागेंद्र को ही क्यों निशाना बनाया गया और अन्य मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
आगे क्या होगा
BJP ने स्पष्ट किया है कि नागेंद्र के इस्तीफे तक उसका आंदोलन जारी रहेगा। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक विधानसभा का सत्र चल रहा है और विपक्ष ने सदन की कार्यवाही बाधित करने की रणनीति अपनाई है। गौरतलब है कि यह मामला अनुसूचित जनजाति समुदाय के लिए निर्धारित सरकारी धन के कथित दुरुपयोग से जुड़ा होने के कारण राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है।