वाल्मीकि निगम घोटाला: मंत्री नागेंद्र बोले — 'दलित मंत्री बना तो मनुवादियों को तकलीफ'
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के आदिवासी कल्याण मंत्री बी. नागेंद्र ने 19 अगस्त 2026 को बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्ष पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेक्युलर) उन्हें इसलिए निशाना बना रहे हैं क्योंकि एक दलित और आदिवासी समुदाय का व्यक्ति दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल हुआ है। कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़े कथित घोटाले में उनके इस्तीफे की मांग को नागेंद्र ने जातिगत षड्यंत्र करार दिया।
मनुवाद का आरोप और विपक्ष पर पलटवार
नागेंद्र ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'क्यों? क्योंकि एक दलित फिर से मंत्री बन गया है। एक आदिवासी समुदाय का व्यक्ति फिर से मंत्री बन गया है। ये मनुवादी किसी तरह हमें मंत्रिमंडल से हटाने और पद से बाहर करने की साजिश कर रहे हैं।' उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य सरकार विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, तो विपक्ष चर्चा में हिस्सा लेने के बजाय केवल इस्तीफे की मांग पर क्यों अड़ा हुआ है।
नागेंद्र के अनुसार, BJP और JDS कर्नाटक विधानसभा की कार्यवाही जानबूझकर बाधित कर रहे हैं और वाल्मीकि निगम मामले तथा राज्य के अन्य मुद्दों पर सार्थक बहस से बच रहे हैं।
घोटाले में अपनी भूमिका पर नागेंद्र का पक्ष
नागेंद्र ने दावा किया कि कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से ₹187 करोड़ की राशि बिना बोर्ड की बैठक बुलाए और उनकी तथा निगम के अध्यक्ष की जानकारी के बिना स्थानांतरित की गई। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने आवश्यक वित्तीय स्वीकृति लिए बिना यह राशि भेजी और निगम के कामकाज में उनकी भूमिका सीमित थी।
उन्होंने बताया कि इस ₹187 करोड़ में से ₹100 करोड़ की राशि अनियमितता उजागर होते ही फ्रीज कर दी गई। शेष ₹87 करोड़ यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से हैदराबाद भेजे गए और बाद में लगभग 800 खातों में वितरित कर दिए गए। नागेंद्र के अनुसार, जाँचकर्ताओं ने इन लेन-देन का पता लगा लिया है और अब तक करीब ₹79 करोड़ बरामद किए जा चुके हैं, जबकि शेष राशि की बरामदगी की प्रक्रिया जारी है।
एसआईटी जाँच और ईडी कार्रवाई
नागेंद्र ने बताया कि निगम के लेखा अधीक्षक पी. चंद्रशेखर की मौत के बाद जाँच के आदेश दिए गए और 31 मई 2024 को विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया गया। गौरतलब है कि चंद्रशेखर ने एक नोट छोड़ा था, जिसमें निगम के धन के कथित अनधिकृत हस्तांतरण का विवरण था।
नागेंद्र ने यह भी बताया कि उन्होंने जाँच पर अपने पद के प्रभाव को रोकने के लिए स्वेच्छा से मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया था। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई में उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, किंतु उन्होंने अदालत का रुख कर राहत हासिल की। उन्होंने दावा किया कि जब FIR दर्ज की गई, तब कथित लेन-देन की एक भी राशि उनके या उनसे जुड़े किसी खाते में नहीं पहुँची थी।
घोटाले की पृष्ठभूमि
यह विवाद कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम लिमिटेड से कथित तौर पर ₹89 करोड़ से ₹94 करोड़ की अवैध निकासी से जुड़ा है। आरोप है कि यह राशि फर्जी खातों और शेल कंपनियों के जरिए आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सहित विभिन्न स्थानों पर डायवर्ट की गई। मई 2024 में लेखा अधीक्षक की आत्महत्या के बाद यह मामला सार्वजनिक हुआ था, जिसके बाद तत्कालीन आदिवासी कल्याण मंत्री के रूप में नागेंद्र ने इस्तीफा दिया था।
आगे क्या होगा
नागेंद्र ने स्पष्ट किया कि वे विधानसभा में विपक्ष के सवालों का सामना करने और तथ्यों को स्पष्ट करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा, 'मैं निर्दोष हूँ और मुझे इस बात का गहरा दुख है कि आप एक दलित को अपराधी के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं।' SIT जाँच और ED की कार्यवाही जारी है, और शेष राशि की बरामदगी पर सरकार की नज़र बनी हुई है।