25 अगस्त 2026
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कर्नाटक विधानसभा मॉनसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, ₹184 करोड़ आदिवासी घोटाले पर भाजपा का रात भर विरोध

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कर्नाटक विधानसभा मॉनसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, ₹184 करोड़ आदिवासी घोटाले पर भाजपा का रात भर विरोध

सारांश

कर्नाटक विधानसभा का मॉनसून सत्र तय समय से तीन दिन पहले स्थगित — और भाजपा रात भर विरोध पर अड़ी है। ₹184 करोड़ के आदिवासी कल्याण घोटाले में मंत्री नागेंद्र की कथित भूमिका पर विपक्ष ने राज्यपाल तक पहुँचने की तैयारी कर ली है।

मुख्य बातें

पाटिल ने 24 अगस्त 2026 को कर्नाटक विधानसभा का मॉनसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया — निर्धारित तिथि 27 अगस्त से तीन दिन पहले।
भाजपा ने योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी.
नागेंद्र के इस्तीफे की माँग को लेकर रात भर विरोध प्रदर्शन की घोषणा की।
विपक्ष का आरोप है कि दलित एवं आदिवासी समुदायों के लिए आवंटित ₹184 करोड़ का आदिवासी कल्याण निगम में गबन हुआ।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई.
विजयेंद्र और विपक्ष के नेता आर.
अशोक ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से हस्तक्षेप की माँग की।
भाजपा का कहना है कि पिछले 25-30 वर्षों में पहली बार कर्नाटक में विपक्ष के दबाव में सत्र इतनी जल्दी खत्म किया गया।

कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर जी.एस. पाटिल ने 24 अगस्त 2026 को मॉनसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। यह कदम उस समय उठाया गया जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आदिवासी कल्याण निगम घोटाले में कथित तौर पर संलिप्त योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की माँग को लेकर रात भर विरोध प्रदर्शन जारी रखने की घोषणा की। सत्र 13 अगस्त को शुरू हुआ था और इसे 27 अगस्त तक चलना था।

मुख्य घटनाक्रम

भाजपा सत्र की शुरुआत से ही मंत्री नागेंद्र के इस्तीफे की माँग करते हुए कार्यवाही में बाधा डालती रही। विपक्ष का आरोप है कि आदिवासी एवं दलित समुदायों के लिए आवंटित ₹184 करोड़ का गबन किया गया है। सत्र के अंतिम दिन से तीन दिन पहले ही स्पीकर द्वारा कार्यवाही स्थगित किए जाने को भाजपा ने सरकार की 'भगोड़ी रणनीति' करार दिया।

भाजपा की प्रतिक्रिया

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने कहा, 'हमें समझ आ गया है कि हमें न्याय नहीं मिल सकता। हम जनता के पास जाएँगे। हम इस मामले में राज्यपाल से दखल की माँग करते हैं और उनसे आग्रह करते हैं कि वे एक भ्रष्ट मंत्री को बचाने के लिए कांग्रेस सरकार को फटकार लगाएँ।' विजयेंद्र ने यह भी आरोप लगाया कि नागेंद्र को इसलिए बचाया जा रहा है क्योंकि उनके हटने से व्यापक भ्रष्टाचार उजागर हो सकता है।

विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा, 'कर्नाटक के इतिहास में पिछले 25-30 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है कि विपक्ष के डर से कांग्रेस सरकार ने सत्र खत्म कर दिया।' अशोक ने स्पीकर पाटिल की भी आलोचना करते हुए कहा कि एक वरिष्ठ राजनेता होने के बावजूद वे सदन को ठीक से नहीं चला सके।

घोटाले का संदर्भ

यह विवाद आदिवासी कल्याण निगम में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर है, जिसमें भाजपा का आरोप है कि दलित एवं आदिवासी परिवारों के लिए निर्धारित ₹184 करोड़ का गबन हुआ। आर. अशोक ने कहा, 'दलितों के लूटे गए ₹184 करोड़ दलित परिवारों तक पहुँचने चाहिए। इसमें कोई राजनीति नहीं है।' गौरतलब है कि मंत्री नागेंद्र स्वयं दलित समुदाय से हैं, जिसे लेकर राजनीतिक पेचीदगी और गहरी हो गई है।

आगे क्या होगा

भाजपा ने घोषणा की है कि वह राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मिलकर हस्तक्षेप की माँग करेगी और इस मुद्दे को जन-आंदोलन का रूप देगी। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पहले से ही कई मोर्चों पर दबाव में है। आलोचकों का कहना है कि सत्र का समय से पहले स्थगन विधायी जवाबदेही के लिहाज़ से चिंताजनक मिसाल है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक विधानसभा का मॉनसून सत्र क्यों स्थगित किया गया?
स्पीकर जी.एस. पाटिल ने 24 अगस्त 2026 को मॉनसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया, जबकि यह 27 अगस्त तक चलना था। भाजपा आदिवासी कल्याण निगम घोटाले में मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की माँग को लेकर लगातार कार्यवाही बाधित कर रही थी।
आदिवासी कल्याण निगम घोटाला क्या है?
भाजपा का आरोप है कि आदिवासी कल्याण निगम में दलित एवं आदिवासी समुदायों के लिए आवंटित ₹184 करोड़ का गबन किया गया है, जिसमें योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र की कथित तौर पर भूमिका है। सरकार ने अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
भाजपा आगे क्या कदम उठाएगी?
भाजपा ने रात भर विरोध प्रदर्शन जारी रखने और राज्यपाल थावरचंद गहलोत से हस्तक्षेप की माँग करने की घोषणा की है। पार्टी इस मुद्दे को जन-आंदोलन का रूप देने की भी तैयारी में है।
मंत्री बी. नागेंद्र कौन हैं और उन पर क्या आरोप हैं?
बी. नागेंद्र कर्नाटक सरकार में योजना एवं सांख्यिकी मंत्री हैं और दलित समुदाय से आते हैं। भाजपा का आरोप है कि उन्होंने आदिवासी एवं दलित समुदायों के लिए निर्धारित ₹184 करोड़ के गबन में कथित तौर पर भूमिका निभाई है, जिसे वे नकारते रहे हैं।
क्या कर्नाटक में पहले भी इस तरह सत्र जल्दी खत्म हुआ है?
विपक्ष के नेता आर. अशोक के अनुसार, पिछले 25-30 वर्षों में यह पहली बार हुआ है जब कर्नाटक में विपक्ष के दबाव के कारण सत्र तय समय से पहले समाप्त किया गया। यह दावा भाजपा की ओर से किया गया है और सरकार ने इसे अस्वीकार किया है।
राष्ट्र प्रेस
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