25 अगस्त 2026
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बीआईएस प्रमाणन में ढील देगा भारत: पीयूष गोयल का टोक्यो में ऐलान, सेमीकंडक्टर-एआई निवेश को मिलेगी रफ्तार

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बीआईएस प्रमाणन में ढील देगा भारत: पीयूष गोयल का टोक्यो में ऐलान, सेमीकंडक्टर-एआई निवेश को मिलेगी रफ्तार

सारांश

टोक्यो में जापानी कंपनियों के साथ गोलमेज बैठक में पीयूष गोयल ने बड़ा संकेत दिया — बीआईएस प्रमाणन की जटिलताएँ सेमीकंडक्टर और एआई निवेश की राह में बाधा नहीं बनेंगी। उत्पाद, परियोजना और कंपनी स्तर पर छूट के विकल्प तैयार हो रहे हैं, जो भारत की चिप-निर्माण महत्वाकांक्षा को नई रफ्तार दे सकते हैं।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने 25 अगस्त 2026 को टोक्यो में सेमीकंडक्टर-एआई गोलमेज बैठक में बीआईएस प्रमाणन नियमों में ढील देने का ऐलान किया।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और बीआईएस को नया नियामकीय ढाँचा तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रस्तावित छूट विशेष क्षेत्र, उत्पाद, परियोजना या कंपनी के आधार पर दी जा सकती है।
भारत में निवेश की इच्छुक जापानी कंपनियों को केंद्र व राज्य सरकारों का पूर्ण सहयोग देने का भरोसा दिलाया गया।
सरकार ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र को राष्ट्रीय प्राथमिकता घोषित किया है और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के विस्तार के लिए कई नीतिगत सुधार जारी हैं।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने टोक्यो में आयोजित एक उच्चस्तरीय गोलमेज बैठक में मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि भारत सरकार भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) प्रमाणन नियमों को सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और अन्य उच्च-प्रौद्योगिकी कंपनियों के लिए सरल बनाने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है। इस कदम का उद्देश्य भारत में विनिर्माण इकाइयाँ स्थापित करने की इच्छुक वैश्विक कंपनियों की नियामकीय बाधाओं को दूर करना और देश को एक प्रमुख वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

गोलमेज बैठक में उठी बीआईएस की चिंताएँ

टोक्यो में सेमीकंडक्टर और एआई विषयक इस गोलमेज बैठक में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने बीआईएस प्रमाणन प्रक्रिया को लेकर विशेष रूप से अपनी चिंताएँ रखीं। उनका कहना था कि उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण के लिए आवश्यक विशेष मशीनों, उपकरणों और घटकों को भारत लाने के दौरान प्रमाणन से जुड़ी जटिलताएँ परियोजनाओं की गति को प्रभावित करती हैं। गोयल ने इन चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई का आश्वासन दिया।

नए ढाँचे की रूपरेखा

गोयल ने बताया कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और बीआईएस को एक नया नियामकीय ढाँचा तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत विभिन्न स्तरों पर छूट देने के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है — जिसमें विशेष क्षेत्रों, विशिष्ट कंपनियों, किसी खास उत्पाद या परियोजना के आधार पर छूट शामिल हो सकती है। उन्होंने कहा, "भारत लौटने के बाद हम इस ढाँचे पर काम करेंगे और सामूहिक छूट, उत्पाद-आधारित छूट, परियोजना-आधारित छूट या कंपनी स्तर पर छूट जैसे विकल्पों के ज़रिए समाधान तलाशेंगे।"

भारत-जापान रणनीतिक सहयोग

मंत्री ने भारत और जापान के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध नई प्रौद्योगिकियों, उन्नत विनिर्माण और आपूर्ति शृंखला विकास जैसे क्षेत्रों में व्यापक अवसर प्रदान करते हैं। भारत में निवेश की संभावनाएँ तलाश रही जापानी कंपनियों को केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से पूरा सहयोग देने का भरोसा दिलाया गया। गोयल ने यह भी कहा कि सरकार निवेशकों को उपयुक्त स्थानीय साझेदारों की पहचान करने में भी सहायता करेगी।

व्यापक सेमीकंडक्टर रणनीति का हिस्सा

यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब भारत एक मज़बूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने और वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों को आकर्षित करने पर विशेष ध्यान दे रहा है। सरकार ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में शामिल किया है और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण तथा चिप निर्माण क्षमता के विस्तार के लिए कई नीतिगत कदम उठाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि बीआईएस प्रमाणन में सुधार की यह पहल उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत भारत वैश्विक आपूर्ति शृंखला में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहता है। आने वाले महीनों में नए ढाँचे की विस्तृत रूपरेखा सामने आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'ढाँचा तैयार करने के निर्देश' और वास्तविक नीतिगत बदलाव के बीच की दूरी भारत में अक्सर लंबी साबित होती है। असली सवाल यह है कि छूट की प्रक्रिया पारदर्शी होगी या विवेकाधीन — क्योंकि 'कंपनी-स्तरीय छूट' जैसे विकल्प मनमानेपन का द्वार खोल सकते हैं। वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला में भारत की हिस्सेदारी अभी नगण्य है, और प्रतिस्पर्धी देश — विशेषकर वियतनाम और मलेशिया — पहले से ही सुव्यवस्थित नियामकीय माहौल के साथ निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं। जब तक सुधारों की समयसीमा और जवाबदेही तय नहीं होती, यह घोषणा महज़ एक और नीतिगत इरादे के रूप में दर्ज होने का जोखिम उठाती है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीआईएस प्रमाणन नियमों में ढील का क्या मतलब है?
भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) प्रमाणन में ढील का अर्थ है कि सेमीकंडक्टर, एआई और अन्य उच्च-प्रौद्योगिकी कंपनियों को अपनी विशेष मशीनें, उपकरण और घटक भारत लाने के लिए जटिल प्रमाणन प्रक्रियाओं से गुज़रना कम होगा। इससे विनिर्माण इकाइयों की स्थापना में होने वाली अनावश्यक देरी कम होगी।
पीयूष गोयल ने यह घोषणा कहाँ और क्यों की?
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने 25 अगस्त 2026 को टोक्यो में आयोजित सेमीकंडक्टर और एआई विषयक एक गोलमेज बैठक में यह घोषणा की। इसका उद्देश्य जापानी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना और भारत-जापान तकनीकी सहयोग को मज़बूत करना था।
किन कंपनियों को इस छूट का फायदा मिलेगा?
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सेमीकंडक्टर, एआई और अन्य उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में भारत में विनिर्माण इकाइयाँ स्थापित करने की इच्छुक कंपनियों को लाभ मिलने की संभावना है। छूट विशेष क्षेत्रों, उत्पादों, परियोजनाओं या कंपनी स्तर पर दी जा सकती है।
नया बीआईएस ढाँचा कब तक लागू होगा?
अभी तक कोई निश्चित समयसीमा घोषित नहीं की गई है। मंत्री गोयल ने कहा कि भारत लौटने के बाद मंत्रालय और बीआईएस मिलकर इस ढाँचे पर काम करेंगे। नए नियामकीय ढाँचे की विस्तृत रूपरेखा आने वाले महीनों में सामने आने की उम्मीद है।
भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति में यह कदम कितना अहम है?
यह कदम भारत की व्यापक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकास रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत सरकार वैश्विक चिप निर्माताओं को आकर्षित करना चाहती है। बीआईएस प्रमाणन की जटिलताएँ लंबे समय से निवेशकों की प्रमुख शिकायत रही हैं, और इनमें सुधार से भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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