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पुणे में आदिवासी छात्रों का 13 दिन से अनशन जारी, राहुल गांधी ने CM फडणवीस को लिखा पत्र

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पुणे में आदिवासी छात्रों का 13 दिन से अनशन जारी, राहुल गांधी ने CM फडणवीस को लिखा पत्र

सारांश

पुणे में 13 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे आदिवासी छात्रों की पीड़ा अब राष्ट्रीय राजनीति तक पहुँच गई है। राहुल गांधी ने CM फडणवीस को पत्र लिखकर 10 दिन का अल्टीमेटम दिया है — और खुद प्रदर्शन में शामिल होने की चेतावनी दी है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र के पुणे में आदिवासी छात्र 13 दिनों से हॉस्टल सुविधा और छात्र कल्याण की मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर हैं।
आंदोलनकारी छात्रा सुचित्रा के अनुसार, प्रशासन 50 फीसदी मांगों पर सहमत है और बाकी पर टालमटोल कर रहा है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने CM देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर 10 दिनों में समाधान की माँग की, अन्यथा खुद प्रदर्शन में शामिल होने की चेतावनी दी।
छात्रों की माँग है कि छात्रावास सोलापुर बॉर्डर से हटाकर शहर के केंद्र में स्थानांतरित किया जाए, जिससे 4 घंटे की यात्रा समाप्त हो।
आदिवासी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित 12,500 रिक्त पदों पर सर्वोच्च न्यायालय के 2017 के आदेश के क्रियान्वयन की भी माँग है।

महाराष्ट्र के पुणे में आदिवासी समुदाय के छात्र 25 अगस्त 2026 तक 13 दिनों से लगातार भूख हड़ताल पर डटे हैं। उनकी प्रमुख मांगें हॉस्टल सुविधाओं में सुधार और आदिवासी छात्र कल्याण से जुड़ी हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस आंदोलन का समर्थन करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर 10 दिनों के भीतर छात्रों की मांगें पूरी करने की अपील की है।

छात्रों की मुख्य मांगें

आंदोलनकारी छात्रा सुचित्रा ने बताया कि वर्तमान में उनका छात्रावास सोलापुर बॉर्डर पर स्थित है, जहाँ से कॉलेज पहुँचने में दो घंटे का समय लगता है और आने-जाने में कुल चार घंटे नष्ट होते हैं। उन्होंने कहा, 'हमारी मांग है कि अगर हॉस्टल सेंटर में होता तो न तो लड़कियों को और न ही लड़कों को परेशानी होती।' सुचित्रा ने यह भी बताया कि लैब में काम के बाद रात आठ बजे हॉस्टल लौटना पड़ता है, जिससे पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित होती है।

दूसरे आंदोलनकारी सूरज ने बताया कि 5 अगस्त को सरकारी संकल्प आने के बाद से अनशन जारी है। उनकी एक प्रमुख माँग यह भी है कि आदिवासी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित लगभग 12,500 रिक्त पदों पर सर्वोच्च न्यायालय के 2017 के आदेश को लागू किया जाए, जिसमें वास्तविक आदिवासियों को अवसर देने और फर्जी दावेदारों को हटाने का निर्देश था।

प्रशासन की प्रतिक्रिया पर छात्रों का आरोप

सुचित्रा के अनुसार, प्रशासन उनकी मांगों पर 50 फीसदी सहमति जता रहा है और शेष पर टालमटोल कर रहा है। उन्होंने कहा, 'हमें ठोस जवाब चाहिए कि हमारी मांगें पूरी करेंगे या नहीं। अगर हमें लिखित में बयान मिल जाता, तो हम आंदोलन रोक देते।' छात्रों का आरोप है कि प्रशासन उन्हें बिना किसी ठोस आश्वासन के आंदोलन वापस लेने के लिए कह रहा है, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया है।

राहुल गांधी का हस्तक्षेप

सुचित्रा ने बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से राहुल गांधी से मुलाकात की और आंदोलन की जानकारी दी। बैठक के दो दिन बाद राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र भेजा। गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए माँग की कि 10 दिनों के भीतर छात्रों की मांगें पूरी की जाएँ, अन्यथा वे स्वयं वहाँ आकर प्रदर्शन में शामिल होंगे।

आगे क्या होगा

छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिलता, वे अपना अनशन जारी रखेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में आदिवासी अधिकारों और शैक्षणिक सुविधाओं को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी हुई है। राहुल गांधी की चेतावनी के बाद अब सरकार पर दबाव है कि वह जल्द ठोस कदम उठाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो यह सवाल उठाता है कि क्या न्यायिक निर्देश भी नौकरशाही की जड़ता को नहीं तोड़ पाते। राहुल गांधी का हस्तक्षेप राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या यह दबाव ठोस नीतिगत बदलाव लाता है या महज एक और प्रेस विज्ञप्ति बनकर रह जाता है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुणे में आदिवासी छात्र भूख हड़ताल पर क्यों हैं?
पुणे में आदिवासी छात्र हॉस्टल सुविधाओं में सुधार और आदिवासी छात्र कल्याण से जुड़ी मांगों को लेकर 13 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। उनकी प्रमुख माँग है कि छात्रावास को सोलापुर बॉर्डर से शहर के केंद्र में स्थानांतरित किया जाए ताकि प्रतिदिन 4 घंटे की यात्रा समाप्त हो।
राहुल गांधी ने CM फडणवीस को पत्र में क्या कहा?
राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर 10 दिनों के भीतर छात्रों की मांगें पूरी करने की माँग की। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी पोस्ट कर चेतावनी दी कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो वे स्वयं वहाँ आकर प्रदर्शन में बैठेंगे।
आदिवासी छात्रों की 12,500 रिक्त पदों की माँग क्या है?
आंदोलनकारी सूरज के अनुसार, आदिवासी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित लगभग 12,500 पद अभी तक रिक्त हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने 2017 में आदेश दिया था कि वास्तविक आदिवासियों को ये अवसर दिए जाएँ और फर्जी दावेदारों को हटाया जाए, लेकिन छात्रों का कहना है कि यह आदेश आज तक लागू नहीं हुआ।
महाराष्ट्र प्रशासन ने छात्रों की मांगों पर क्या रुख अपनाया है?
छात्रों के अनुसार, प्रशासन उनकी 50 फीसदी मांगों पर सहमत है और बाकी पर टालमटोल कर रहा है। प्रशासन ने छात्रों से आंदोलन वापस लेने पर मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन छात्रों ने बिना लिखित आश्वासन के आंदोलन समाप्त करने से इनकार कर दिया है।
क्या आंदोलन आगे भी जारी रहेगा?
छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक लिखित में ठोस आश्वासन नहीं मिलता, भूख हड़ताल जारी रहेगी। राहुल गांधी के 10 दिन के अल्टीमेटम के बाद अब सरकार पर दबाव है कि वह जल्द कोई ठोस कदम उठाए।
राष्ट्र प्रेस
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