25 अगस्त 2026
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आदिवासी छात्रों पर रोहित पवार के दावे झूठे: शिवसेना के अरुण सावंत का पलटवार, महायुति ने ₹5,270 करोड़ का बजट गिनाया

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आदिवासी छात्रों पर रोहित पवार के दावे झूठे: शिवसेना के अरुण सावंत का पलटवार, महायुति ने ₹5,270 करोड़ का बजट गिनाया

सारांश

पुणे में आदिवासी छात्रों की भूख हड़ताल ने महाराष्ट्र की राजनीति को गर्मा दिया। राहुल गांधी के पत्र और रोहित पवार के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद शिवसेना के अरुण सावंत ने पलटवार करते हुए ₹5,270 करोड़ के बजट का हवाला दिया। छात्रा सुचित्रा का कहना है — लिखित आश्वासन मिले बिना आंदोलन नहीं रुकेगा।

मुख्य बातें

शिवसेना नेता अरुण सावंत ने रोहित पवार के दावों को 'पूरी तरह झूठा' बताया।
महायुति सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में आदिवासी कल्याण के लिए ₹5,270 करोड़ का बजट आवंटित किया है।
राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर 10 दिनों में माँगें पूरी करने की चेतावनी दी।
आंदोलनकारी छात्रा सुचित्रा ने कहा — प्रशासन 50% माँगें मान रहा है, लेकिन लिखित आश्वासन के बिना आंदोलन जारी रहेगा।
सावंत ने नासिक कुंभ मेला बजट और स्कूल बजट को अलग-अलग बताया; मराठी माध्यम स्कूलों के बंद होने की समस्या स्वीकार की।

पुणे में आदिवासी छात्रों की भूख हड़ताल को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में नई तल्खी आ गई है। शिवसेना नेता अरुण सावंत ने 25 अगस्त 2026 को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें उन्होंने कहा था कि महाराष्ट्र सरकार आदिवासी छात्रों की अनदेखी कर रही है। सावंत ने कहा कि महायुति सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में आदिवासी कल्याण के लिए ₹5,270 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया है।

विवाद की जड़: रोहित पवार का सोशल मीडिया पोस्ट

मामला तब गरमाया जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर पुणे में भूख हड़ताल पर बैठे आदिवासी छात्रों की माँगें 10 दिनों के भीतर पूरी करने की माँग की। रोहित पवार ने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी का आभार जताते हुए लिखा कि महाराष्ट्र सरकार आदिवासी छात्रों पर ध्यान नहीं दे रही और कैबिनेट बैठकों में भी यह मुद्दा नहीं उठाया गया।

सावंत का पलटवार: बजट के आँकड़े पेश किए

सावंत ने इन दावों को 'पूरी तरह झूठा' बताते हुए कहा, 'यह राशि सिर्फ आदिवासी बच्चों, उनके स्कूलों, उनकी सुविधाओं, रोज़गार और पानी की व्यवस्था के लिए खर्च की गई है। फिर भी अगर रोहित पवार को यह मालूम नहीं है, तो बहुत दुख की बात है।' उन्होंने राहुल गांधी की भूमिका को लेकर संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष के रूप में सवाल उठाना उनका अधिकार है, लेकिन महायुति सरकार आदिवासी भाई-बहनों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए निरंतर काम कर रही है।

मराठी स्कूल और कुंभ मेला बजट पर भी बोले सावंत

सावंत ने नासिक में कुंभ मेले के बजट और स्कूलों के बजट को लेकर चल रही बहस पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'कुंभ मेले के लिए जो बजट दिया गया है, वह खास तौर पर उसी के लिए है — उसका स्कूलों के बजट से कोई संबंध नहीं है।' उन्होंने स्वीकार किया कि महाराष्ट्र में कई मराठी माध्यम स्कूल बंद हो गए हैं या बंद होने की कगार पर हैं, लेकिन साथ ही दावा किया कि राज्य सरकार उन्हें चालू रखने की भरपूर कोशिश कर रही है।

आंदोलनकारी छात्रों की माँग: लिखित आश्वासन चाहिए

पुणे में भूख हड़ताल पर बैठी आंदोलनकारी छात्रा सुचित्रा ने बताया कि प्रशासन उनकी आधी माँगें मान रहा है और आधी से इनकार कर रहा है। उन्होंने कहा, 'हमें ठोस जवाब चाहिए — लिखित में। वो कह रहे हैं कि आंदोलन रोको, मुख्यमंत्री से मुलाकात कराएंगे। लेकिन बिना समाधान के आंदोलन रोकना गलत है। हम पीछे नहीं हटेंगे।' सुचित्रा ने राहुल गांधी का आभार जताते हुए कहा कि उनका पत्र और सोशल मीडिया पोस्ट इस आंदोलन के लिए एक सकारात्मक कदम है।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में आदिवासी कल्याण नीतियों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तनाव बढ़ रहा है। गौरतलब है कि राहुल गांधी ने 10 दिनों की समयसीमा देते हुए कहा है कि यदि माँगें पूरी नहीं हुईं तो वे स्वयं प्रदर्शन में शामिल होंगे। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री फडणवीस इस दबाव में कोई ठोस कदम उठाते हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

270 करोड़ का आँकड़ा बजट आवंटन है — खर्च का सत्यापन नहीं। बजट प्रावधान और ज़मीनी नतीजे दो अलग बातें हैं, और पुणे की भूख हड़ताल यही सवाल उठाती है। रोहित पवार पर 'झूठ' का आरोप लगाना राजनीतिक है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि वह ₹5,270 करोड़ आदिवासी बच्चों की शिक्षा और सुविधाओं में कहाँ दिखता है। राहुल गांधी की 10-दिन की समयसीमा दबाव की राजनीति है, लेकिन सुचित्रा जैसी छात्राओं की माँग — लिखित आश्वासन — बेहद बुनियादी और जायज़ है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुणे में आदिवासी छात्रों की भूख हड़ताल किस बात को लेकर है?
पुणे में आदिवासी छात्र अपनी विभिन्न शैक्षणिक और सुविधा-संबंधी माँगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। छात्रों का कहना है कि प्रशासन उनकी आधी माँगें मान रहा है और लिखित आश्वासन देने से इनकार कर रहा है।
अरुण सावंत ने रोहित पवार के किन दावों को झूठा बताया?
रोहित पवार ने सोशल मीडिया पर कहा था कि महाराष्ट्र सरकार आदिवासी छात्रों की अनदेखी कर रही है और कैबिनेट में भी यह मुद्दा नहीं उठाया गया। शिवसेना नेता अरुण सावंत ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि महायुति सरकार ने 2025-26 में आदिवासी कल्याण के लिए ₹5,270 करोड़ का बजट दिया है।
राहुल गांधी ने इस मामले में क्या किया?
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर 10 दिनों के भीतर आदिवासी छात्रों की माँगें पूरी करने की माँग की। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके यह भी कहा कि यदि माँगें नहीं मानी गईं तो वे खुद आंदोलन में शामिल होंगे।
आंदोलनकारी छात्रों की मुख्य माँग क्या है?
छात्रों की माँग है कि प्रशासन उनकी सभी माँगें लिखित रूप में स्वीकार करे। छात्रा सुचित्रा के अनुसार, बिना लिखित आश्वासन के आंदोलन वापस लेना संभव नहीं है।
महायुति सरकार ने आदिवासी कल्याण के लिए कितना बजट रखा है?
महायुति सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में आदिवासी बच्चों की शिक्षा, स्कूल, रोज़गार और पानी की व्यवस्था सहित अन्य सुविधाओं के लिए ₹5,270 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया है। यह आँकड़ा शिवसेना नेता अरुण सावंत ने अपने बयान में पेश किया।
राष्ट्र प्रेस
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