पुणे रेलवे स्टेशन लूट: 150 सीसीटीवी कैमरों की मदद से तीन आरोपी गिरफ्तार, नकदी-मोबाइल बरामद
सारांश
मुख्य बातें
पुणे रेलवे स्टेशन पर एक सीनियर बुकिंग क्लर्क के साथ हुई सशस्त्र लूट के मामले में बंडगार्डन पुलिस ने 150 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज का विश्लेषण कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने लूटी गई नकदी और दोनों मोबाइल फोन भी बरामद कर लिए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, यह घटना 18 अगस्त की रात करीब 1 बजे हुई, जब क्लर्क रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी पर था। दो अज्ञात व्यक्तियों ने कथित तौर पर उस पर चाकू से हमला किया और जान से मारने की धमकी देकर नकदी, दो मोबाइल फोन और सोने की चेन छीन ली। इसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।
घटना की सूचना मिलते ही बंडगार्डन पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर संतोष पंधारे ने संदिग्धों की तलाश के लिए दो विशेष टीमें गठित कीं।
सीसीटीवी फुटेज से मिला सुराग
जाँच दल ने पुणे रेलवे स्टेशन से लेकर डोंबिवली ईस्ट रेलवे स्टेशन तक के मार्ग पर लगे करीब 150 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की बारीकी से जाँच की। इस फुटेज से संदिग्धों की स्पष्ट तस्वीरें मिलीं और लूट के बाद उनकी गतिविधियों का पूरा ब्यौरा सामने आया।
जाँच में पता चला कि आरोपी डोंबिवली ईस्ट के मानपाडा पुलिस स्टेशन क्षेत्र में पहुँच गए थे। पुलिसकर्मी प्रकाश अहवाड और सारस साल्वी से प्राप्त सूचना के आधार पर संदिग्धों का ठिकाना भोपर गाँव, कमानी इलाके में चिह्नित किया गया।
छापेमारी और गिरफ्तारी
बंडगार्डन पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की इंटेलिजेंस ब्रांच की संयुक्त टीम ने 21 अगस्त की सुबह करीब 4 बजे छापा मारकर दो मुख्य संदिग्धों को दबोचा। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जितेंद्र मोतीराम राठौड़ (24 वर्ष) और ईश्वर गोरख चव्हाण (23 वर्ष) के रूप में हुई। दोनों मूल रूप से क्रमशः जलगाँव और छत्रपति संभाजीनगर जिलों के निवासी हैं और डोंबिवली ईस्ट में रह रहे थे।
पूछताछ के दौरान दोनों ने कथित तौर पर लूट में अपनी भूमिका स्वीकार कर ली। इसके बाद जाँच में सामने आया कि उनके रिश्तेदार अजय मदन चव्हाण (35 वर्ष) ने भी अपराध में सहयोग किया था, जिन्हें बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।
बरामदगी और आगे की जाँच
पुलिस ने बताया कि आरोपियों से लूटी गई नकदी और दोनों मोबाइल फोन बरामद कर लिए गए हैं। हालाँकि, सोने की चेन की बरामदगी को लेकर अभी पुष्टि नहीं हुई है। मामले में आगे की जाँच जारी है और पुलिस अन्य संभावित संलिप्तता की भी पड़ताल कर रही है।
यह मामला इस बात का उदाहरण है कि किस तरह व्यापक सीसीटीवी नेटवर्क और अंतर-जिला पुलिस समन्वय से जटिल अपराधों को सुलझाया जा सकता है।