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अमरावती हादसे के बाद महाराष्ट्र में सभी अस्पतालों का अनिवार्य अग्नि सुरक्षा ऑडिट, स्वास्थ्य मंत्री का सख्त आदेश

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अमरावती हादसे के बाद महाराष्ट्र में सभी अस्पतालों का अनिवार्य अग्नि सुरक्षा ऑडिट, स्वास्थ्य मंत्री का सख्त आदेश

सारांश

अमरावती अस्पताल में धुएँ से तीन नवजात शिशुओं की मौत के बाद महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश अबितकर ने राज्य के हर सरकारी, निजी और चैरिटेबल अस्पताल में तत्काल अग्नि, बिजली और संरचना सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य किया है — लापरवाही पर गैर-इरादतन हत्या तक के आरोप की चेतावनी।

मुख्य बातें

अमरावती के अस्पताल में धुएँ से दम घुटने के कारण 3 नवजात शिशुओं की मौत; 36 बच्चों को बाहर निकाला गया, 6 को निजी अस्पताल रेफर किया गया।
स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश अबितकर ने 25 अगस्त 2026 को राज्य के सभी सरकारी, निजी और चैरिटेबल अस्पतालों में तत्काल सुरक्षा ऑडिट के आदेश दिए।
आईसीयू , एनआईसीयू , नर्सरी और ऑपरेशन थिएटर की सघन जाँच होगी; हर 6 महीने में अनिवार्य भौतिक निरीक्षण।
प्रत्येक अस्पताल को नोडल अधिकारी नियुक्त करना होगा और नियमित अनुपालन रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जाँच के आदेश दिए; मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने दोषियों पर गैर-इरादतन हत्या के आरोप की चेतावनी दी।

महाराष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री प्रकाश अबितकर ने मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को राज्य के सभी सरकारी, निजी और चैरिटेबल अस्पतालों को तत्काल आग, बिजली, संरचना और उपकरण सुरक्षा ऑडिट कराने के आदेश दिए। यह निर्देश अमरावती के एक अस्पताल में हुई उस दर्दनाक घटना के बाद जारी किया गया है, जिसमें अत्यधिक धुएँ के कारण दम घुटने से तीन नवजात शिशुओं की मौत हो गई थी और 36 बच्चों को बाहर निकालना पड़ा था।

मुख्य घटनाक्रम

अमरावती के अस्पताल में हुई इस त्रासदी के बाद राज्य सरकार हरकत में आई। बचाव दल ने 36 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला, जिनमें से 6 बच्चों को गंभीर हालत में निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस घटना ने राज्यभर के अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा की खामियों को उजागर कर दिया।

मंत्री अबितकर ने स्पष्ट किया कि मरीजों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और अग्नि सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

ऑडिट में क्या जाँचा जाएगा

स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया गया है कि आईसीयू, एनआईसीयू, नर्सरी और ऑपरेशन थिएटर जैसी अधिक जोखिम वाली इकाइयों की सघन समीक्षा की जाए। निरीक्षण में निम्नलिखित बिंदुओं की जाँच होगी:

बिजली की वायरिंग और लोड प्रबंधन, मेडिकल गैस पाइपलाइन प्रणाली, आपातकालीन निकास मार्ग, अग्निशमन उपकरणों की तत्परता और कर्मचारियों का प्रशिक्षण। किसी भी कमी को तत्काल दूर किया जाना अनिवार्य होगा।

जवाबदेही तय, नोडल अधिकारी नियुक्त होंगे

अस्पताल प्रमुखों, क्षेत्रीय उप-निदेशकों, सिविल सर्जनों, जिला स्वास्थ्य अधिकारियों, नगर निगम स्वास्थ्य अधिकारियों और मेडिकल सुपरिटेंडेंट को उनके-उनके क्षेत्रों में अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सीधे जिम्मेदार बनाया गया है।

प्रत्येक संस्थान को बिजली सुरक्षा, निकास योजनाओं और मॉक ड्रिल की निगरानी के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करना होगा। हर अस्पताल की इमारत और ब्लॉक की हर छह महीने में अनिवार्य भौतिक जाँच होगी।

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अमरावती हादसे की जाँच के आदेश दिए हैं। राजस्व मंत्री एवं अमरावती के प्रभारी मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने चेतावनी दी है कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें गैर-इरादतन हत्या के आरोप भी शामिल हो सकते हैं।

मंत्री अबितकर ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ऑडिट में देरी या कमियों को न सुधारने के कारण कोई अप्रिय घटना होती है, तो संस्थान प्रमुख सीधे जिम्मेदार माने जाएंगे।

आगे क्या होगा

सभी अस्पतालों को अग्नि एवं जीवन सुरक्षा से जुड़े राष्ट्रीय दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करना होगा और राज्य सरकार को नियमित प्रगति रिपोर्ट सौंपनी होगी। यह कदम ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में अस्पताल अग्नि सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। महाराष्ट्र का यह निर्देश राज्यभर की स्वास्थ्य सेवाओं में सुरक्षा मानकों को पुनः स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और हर बार ऑडिट के आदेश आते हैं, फिर धीरे-धीरे फाइलों में दब जाते हैं। महाराष्ट्र का यह निर्देश तब तक प्रभावशाली नहीं होगा जब तक नोडल अधिकारी की जवाबदेही को वास्तविक दंडात्मक परिणामों से नहीं जोड़ा जाता। गैर-इरादतन हत्या की चेतावनी कड़ी है, लेकिन असली परीक्षण यह है कि क्या अनुपालन रिपोर्टें केवल कागजी खानापूर्ति बनेंगी या वास्तविक निरीक्षण। निजी अस्पतालों पर नियामकीय पकड़ कमजोर रही है — इस बार उन्हें भी समान जवाबदेही के दायरे में लाना इस आदेश की सबसे अहम परीक्षा है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में अस्पताल अग्नि सुरक्षा ऑडिट का आदेश क्यों दिया गया?
अमरावती के एक अस्पताल में अत्यधिक धुएँ के कारण दम घुटने से तीन नवजात शिशुओं की मौत हो गई, जिसके बाद स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश अबितकर ने 25 अगस्त 2026 को यह आदेश जारी किया। इस घटना ने राज्यभर के अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा की गंभीर खामियों को उजागर किया।
ऑडिट में किन बातों की जाँच होगी?
निरीक्षण में बिजली की वायरिंग और लोड प्रबंधन, मेडिकल गैस पाइपलाइन, आपातकालीन निकास मार्ग, अग्निशमन उपकरणों की तत्परता और कर्मचारियों के प्रशिक्षण की जाँच होगी। आईसीयू, एनआईसीयू, नर्सरी और ऑपरेशन थिएटर जैसी उच्च-जोखिम इकाइयों की विशेष सघन समीक्षा होगी।
अस्पतालों को ऑडिट कितनी बार करानी होगी?
प्रत्येक अस्पताल इमारत और ब्लॉक की हर छह महीने में अनिवार्य भौतिक अग्नि सुरक्षा जाँच होगी। इसके अलावा प्रत्येक संस्थान को एक नोडल अधिकारी नियुक्त करना होगा जो नियमित रूप से सरकार को अनुपालन रिपोर्ट सौंपेगा।
अमरावती हादसे में क्या हुआ था?
अमरावती के एक अस्पताल में भारी धुएँ के कारण दम घुटने से तीन नवजात शिशुओं की मौत हो गई। बचाव दल ने 36 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला, जिनमें से छह को आवश्यक उपचार के लिए निजी अस्पताल में भेजा गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घटना की जाँच के आदेश दिए हैं।
लापरवाही पर क्या कार्रवाई होगी?
स्वास्थ्य मंत्री अबितकर ने स्पष्ट किया है कि ऑडिट में देरी या कमियाँ न सुधारने के कारण कोई दुर्घटना होने पर संस्थान प्रमुख सीधे जिम्मेदार होंगे। प्रभारी मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने चेतावनी दी है कि दोषियों पर गैर-इरादतन हत्या के आरोप सहित सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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