अमरावती NICU आग: 3 नवजातों की मौत पर विपक्ष का हमला, सुप्रिया सुले बोलीं- 'व्यवस्था की लापरवाही का नमूना'
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के अमरावती जिला महिला अस्पताल के NICU (नवजात गहन चिकित्सा इकाई) विभाग में 24 अगस्त को वेंटिलेटर में विस्फोट के कारण भीषण आग लगने से तीन नवजात शिशुओं की मौत हो गई, जबकि कई अन्य की हालत गंभीर बताई जा रही है। इस दर्दनाक हादसे के बाद विपक्षी दलों ने महाराष्ट्र सरकार पर तीखे हमले बोले हैं और इसे महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की गहरी लापरवाही का प्रतीक बताया है।
सुप्रिया सुले का आरोप: 'यह केवल हादसा नहीं'
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने लिखा, 'अमरावती जिला महिला अस्पताल में NICU विभाग में वेंटिलेटर में विस्फोट के कारण लगी आग में 3 नवजात शिशुओं की मौत हो गई, जबकि कुछ अन्य गंभीर हैं। यह बेहद हृदयविदारक घटना है।'
उन्होंने आगे कहा, 'माता-पिता अपने बच्चे का बेसब्री से इंतजार करते हैं, लेकिन उसी बच्चे को इस तरह खोना पड़े तो उन पर क्या बीत रही होगी, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्था में लापरवाही का नमूना है।' सुले ने मामले की गहन जाँच, दोषियों पर कठोर कार्रवाई और महाराष्ट्र के समस्त सरकारी व निजी अस्पतालों का फायर ऑडिट तथा चिकित्सा उपकरणों का सेफ्टी ऑडिट कराने की माँग की।
रोहित पवार का बड़ा आरोप: '44,000 बच्चों की मौत पर भी नहीं जागी सरकार'
राकांपा (एसपी) विधायक रोहित पवार ने कहा, 'जब भी ऐसी घटनाएं होती हैं, तो गरीब लोग ही अपनी जान गंवाते हैं। हमें लगता है कि यह सरकार गरीबों की जान की कोई परवाह नहीं करती।' उन्होंने दावा किया कि आँकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में आदिवासी बच्चों के स्कूलों और हॉस्टलों में कुपोषण, गंभीर बीमारियों, दुर्घटनाओं और साँप के काटने जैसी विभिन्न वजहों से करीब 44,000 बच्चों की मौत हो चुकी है।
रोहित पवार ने यह भी याद दिलाया कि 2021 में इसी तरह की एक घटना के बाद एक विशेष समिति गठित की गई थी, जिसे महाराष्ट्र भर के अस्पतालों का ऑडिट कर सिफारिशें देने का काम सौंपा गया था। उन्होंने कहा, 'समिति ने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी, लेकिन दुख की बात है कि उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।' उन्होंने माँग की कि सरकार उस रिपोर्ट के आधार पर छह महीने का एक्शन प्लान तैयार कर महाराष्ट्र के हर तालुका के हर सरकारी अस्पताल में लागू किए जाने वाले उपायों की जानकारी सार्वजनिक करे।
कांग्रेस नेता का दौरा: 'अस्पताल में फायर ब्रिगेड तक नहीं थी'
पूर्व मंत्री एवं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) नेता यशोमती चंद्रकांत ठाकुर ने अस्पताल का दौरा करने के बाद कहा, 'यहाँ फायर ब्रिगेड नहीं थी। यह सत्तापक्ष की जिम्मेदारी बनती है।' उन्होंने बताया कि अक्सर लोगों के फोन आते हैं कि अस्पताल में डॉक्टर नहीं हैं और कई बार उन्हें खुद अस्पताल जाकर डॉक्टरों से बात करनी पड़ती है। ठाकुर ने यह भी उल्लेख किया कि कुछ दिन पहले एक महिला को अस्पताल में अटेंड नहीं किया गया, जिसके कारण उसका बच्चा गर्भ में ही मर गया।
आम जनता और परिजनों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र के सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुरक्षा मानकों को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि NICU जैसी संवेदनशील इकाइयों में भर्ती नवजात पहले से ही जीवन-संकट में होते हैं — ऐसे में सुरक्षा चूक की कीमत सबसे कमजोर जिंदगियाँ चुकाती हैं। इस घटना में अपने नवजात खोने वाले परिवारों की पीड़ा असहनीय है।
क्या होगा आगे
विपक्ष की माँग है कि राज्य सरकार तत्काल फायर ऑडिट और मेडिकल उपकरण सेफ्टी ऑडिट कराए, 2021 की समिति रिपोर्ट पर छह महीने का ठोस एक्शन प्लान जारी करे और दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इस हादसे ने एक बार फिर राज्य के सरकारी स्वास्थ्य ढाँचे की जवाबदेही को केंद्र में ला दिया है।