स्टॉकहोम में 50,000 से अधिक लोगों का जलवायु मार्च, चुनाव से तीन हफ्ते पहले सरकार पर दबाव
सारांश
मुख्य बातें
स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम के मध्य में 50,000 से अधिक लोगों ने 24 अगस्त को जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध सख्त सरकारी कदमों की माँग को लेकर विशाल मार्च निकाला। यह प्रदर्शन 13 सितंबर को होने वाले राष्ट्रीय संसदीय चुनावों से ठीक तीन सप्ताह पहले आयोजित किया गया, जिससे जलवायु मुद्दा इस चुनावी मौसम के केंद्र में आ गया है।
मुख्य घटनाक्रम
स्वीडिश मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रविवार को हुए इस प्रदर्शन में करीब 280 संगठनों ने भागीदारी की। इनमें पर्यावरण समूह, मानवाधिकार संगठन, मजदूर यूनियनें, धार्मिक संस्थाएँ, शोधकर्ता और सांस्कृतिक समूह शामिल थे — जो इस आंदोलन की व्यापक सामाजिक आधार को दर्शाता है।
स्वीडिश सोसाइटी फॉर नेचर कंजर्वेशन की अध्यक्ष और प्रमुख आयोजकों में से एक बीट्रिस रिंडेवाल ने स्वीडिश मीडिया से कहा कि 'नीति निर्माताओं को जलवायु संकट को गंभीरता से लेना चाहिए।'
जलवायु मुद्दे पर राजनीतिक विभाजन
गोटेनबर्ग विश्वविद्यालय के स्वतंत्र शोध संस्थान एसओएम इंस्टीट्यूट के ताज़ा राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार, खुद को राजनीतिक रूप से वामपंथी मानने वाले लगभग 65 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे जलवायु परिवर्तन को लेकर बहुत चिंतित हैं। इसके विपरीत, दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े लोगों में यह आँकड़ा 30 प्रतिशत से भी कम रहा।
यह विभाजन बताता है कि जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि एक तीखा राजनीतिक फाल्टलाइन बन चुका है।
चुनावी महत्व में उछाल
स्वीडन की सर्वे एजेंसी नोवस द्वारा जून में किए गए एक सर्वेक्षण में जलवायु परिवर्तन मतदाताओं के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दों की सूची में छठे स्थान पर रहा — जबकि जनवरी में यह नौवें स्थान पर था। यह उछाल दर्शाता है कि आम चुनाव नज़दीक आते-आते जलवायु एजेंडे की प्रासंगिकता तेज़ी से बढ़ी है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
गोटेनबर्ग विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के प्रोफेसर मार्टिन हुल्टमैन ने स्वीडिश अखबार डागेन्स न्येहेटर से कहा कि 'स्वीडन में जलवायु मुद्दे को लेकर लोगों की भागीदारी और दिलचस्पी की एक नई लहर देखने को मिल रही है।'
उन्होंने बताया कि पिछली लहर कोविड-19 महामारी के दौरान कमज़ोर पड़ गई थी — जिसके पीछे जीवाश्म ईंधन उद्योग की लॉबिंग, गलत सूचनाओं का प्रसार और दक्षिणपंथी राष्ट्रवादी ताकतों की चुनावी सफलताएँ जैसे कारण थे। हुल्टमैन के अनुसार, अब लोग जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में अधिक प्रत्यक्ष रूप से महसूस कर रहे हैं, जो इस नई जागरूकता का एक बड़ा कारण हो सकता है।
आगे क्या होगा
स्वीडन में 13 सितंबर को संसद रिक्सडाग के साथ-साथ क्षेत्रीय और नगर परिषदों के लिए भी एक साथ चुनाव होंगे। यह प्रदर्शन सत्तारूढ़ दलों पर चुनाव से पहले जलवायु नीति पर स्पष्ट प्रतिबद्धता जताने का दबाव बनाता है। गौरतलब है कि इस तरह के जन-प्रदर्शनों का चुनावी नतीजों पर प्रभाव स्वीडन में पहले भी देखा गया है।