24 अगस्त 2026
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स्टॉकहोम में 50,000 से अधिक लोगों का जलवायु मार्च, चुनाव से तीन हफ्ते पहले सरकार पर दबाव

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स्टॉकहोम में 50,000 से अधिक लोगों का जलवायु मार्च, चुनाव से तीन हफ्ते पहले सरकार पर दबाव

सारांश

स्वीडन के चुनावी मौसम में जलवायु मुद्दा केंद्र में आ गया है — स्टॉकहोम में 50,000 से अधिक लोगों और 280 संगठनों का एकजुट होना महज़ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि सरकार को चुनाव से पहले जवाब माँगने की सामूहिक चेतावनी है।

मुख्य बातें

स्टॉकहोम में 24 अगस्त को 50,000 से अधिक लोगों ने जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध विशाल मार्च निकाला।
प्रदर्शन में 280 संगठनों ने भाग लिया — पर्यावरण, मानवाधिकार, श्रमिक यूनियन और धार्मिक समूह शामिल।
एसओएम इंस्टीट्यूट सर्वेक्षण के अनुसार वामपंथी मतदाताओं में जलवायु चिंता 65% , दक्षिणपंथियों में 30% से कम।
नोवस सर्वेक्षण में जलवायु मुद्दा जनवरी के नौवें से जून में छठे स्थान पर पहुँचा।
स्वीडन में 13 सितंबर को रिक्सडाग व क्षेत्रीय परिषदों के लिए चुनाव होंगे।

स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम के मध्य में 50,000 से अधिक लोगों ने 24 अगस्त को जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध सख्त सरकारी कदमों की माँग को लेकर विशाल मार्च निकाला। यह प्रदर्शन 13 सितंबर को होने वाले राष्ट्रीय संसदीय चुनावों से ठीक तीन सप्ताह पहले आयोजित किया गया, जिससे जलवायु मुद्दा इस चुनावी मौसम के केंद्र में आ गया है।

मुख्य घटनाक्रम

स्वीडिश मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रविवार को हुए इस प्रदर्शन में करीब 280 संगठनों ने भागीदारी की। इनमें पर्यावरण समूह, मानवाधिकार संगठन, मजदूर यूनियनें, धार्मिक संस्थाएँ, शोधकर्ता और सांस्कृतिक समूह शामिल थे — जो इस आंदोलन की व्यापक सामाजिक आधार को दर्शाता है।

स्वीडिश सोसाइटी फॉर नेचर कंजर्वेशन की अध्यक्ष और प्रमुख आयोजकों में से एक बीट्रिस रिंडेवाल ने स्वीडिश मीडिया से कहा कि 'नीति निर्माताओं को जलवायु संकट को गंभीरता से लेना चाहिए।'

जलवायु मुद्दे पर राजनीतिक विभाजन

गोटेनबर्ग विश्वविद्यालय के स्वतंत्र शोध संस्थान एसओएम इंस्टीट्यूट के ताज़ा राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार, खुद को राजनीतिक रूप से वामपंथी मानने वाले लगभग 65 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे जलवायु परिवर्तन को लेकर बहुत चिंतित हैं। इसके विपरीत, दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े लोगों में यह आँकड़ा 30 प्रतिशत से भी कम रहा।

यह विभाजन बताता है कि जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि एक तीखा राजनीतिक फाल्टलाइन बन चुका है।

चुनावी महत्व में उछाल

स्वीडन की सर्वे एजेंसी नोवस द्वारा जून में किए गए एक सर्वेक्षण में जलवायु परिवर्तन मतदाताओं के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दों की सूची में छठे स्थान पर रहा — जबकि जनवरी में यह नौवें स्थान पर था। यह उछाल दर्शाता है कि आम चुनाव नज़दीक आते-आते जलवायु एजेंडे की प्रासंगिकता तेज़ी से बढ़ी है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

गोटेनबर्ग विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के प्रोफेसर मार्टिन हुल्टमैन ने स्वीडिश अखबार डागेन्स न्येहेटर से कहा कि 'स्वीडन में जलवायु मुद्दे को लेकर लोगों की भागीदारी और दिलचस्पी की एक नई लहर देखने को मिल रही है।'

उन्होंने बताया कि पिछली लहर कोविड-19 महामारी के दौरान कमज़ोर पड़ गई थी — जिसके पीछे जीवाश्म ईंधन उद्योग की लॉबिंग, गलत सूचनाओं का प्रसार और दक्षिणपंथी राष्ट्रवादी ताकतों की चुनावी सफलताएँ जैसे कारण थे। हुल्टमैन के अनुसार, अब लोग जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में अधिक प्रत्यक्ष रूप से महसूस कर रहे हैं, जो इस नई जागरूकता का एक बड़ा कारण हो सकता है।

आगे क्या होगा

स्वीडन में 13 सितंबर को संसद रिक्सडाग के साथ-साथ क्षेत्रीय और नगर परिषदों के लिए भी एक साथ चुनाव होंगे। यह प्रदर्शन सत्तारूढ़ दलों पर चुनाव से पहले जलवायु नीति पर स्पष्ट प्रतिबद्धता जताने का दबाव बनाता है। गौरतलब है कि इस तरह के जन-प्रदर्शनों का चुनावी नतीजों पर प्रभाव स्वीडन में पहले भी देखा गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह जन-दबाव चुनाव के बाद भी नीतिगत बदलाव में तब्दील होगा। स्वीडन में जलवायु मुद्दे पर वामपंथ और दक्षिणपंथ के बीच 35 प्रतिशत अंक का अंतर बताता है कि यह मुद्दा अब पर्यावरण की सीमा से निकलकर विचारधारा की जंग बन चुका है। गौरतलब है कि कोविड के बाद जलवायु आंदोलन की यह वापसी यूरोप के कई देशों में एक साथ दिख रही है, जो दर्शाता है कि जीवाश्म ईंधन लॉबी और गलत सूचनाओं के बावजूद जन-चेतना फिर से संगठित हो रही है। मुख्यधारा की कवरेज प्रदर्शन की भीड़ पर केंद्रित रहती है — जबकि नीति-प्रतिबद्धता की अनुपस्थिति पर सवाल उठाना ज़रूरी है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्टॉकहोम में जलवायु मार्च क्यों निकाला गया?
स्वीडन में 13 सितंबर को होने वाले राष्ट्रीय चुनावों से तीन सप्ताह पहले 50,000 से अधिक लोगों ने सरकार से जलवायु परिवर्तन पर सख्त नीतिगत कदम उठाने की माँग को लेकर यह मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य चुनावी एजेंडे में जलवायु मुद्दे को केंद्रीय स्थान दिलाना था।
इस प्रदर्शन में कितने और कौन-से संगठन शामिल थे?
स्वीडिश मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रदर्शन में करीब 280 संगठनों ने भाग लिया। इनमें पर्यावरण समूह, मानवाधिकार संगठन, मजदूर यूनियनें, धार्मिक संस्थाएँ, शोधकर्ता और सांस्कृतिक समूह शामिल थे।
स्वीडन में जलवायु परिवर्तन को लेकर मतदाताओं की राय कैसी है?
गोटेनबर्ग विश्वविद्यालय के एसओएम इंस्टीट्यूट के सर्वेक्षण के अनुसार, वामपंथी मतदाताओं में 65% जलवायु परिवर्तन को लेकर बहुत चिंतित हैं, जबकि दक्षिणपंथी मतदाताओं में यह आँकड़ा 30% से कम है। नोवस एजेंसी के जून सर्वेक्षण में जलवायु मुद्दा मतदाताओं की प्राथमिकता सूची में जनवरी के नौवें से छठे स्थान पर आ गया।
प्रोफेसर मार्टिन हुल्टमैन ने जलवायु आंदोलन की वापसी के बारे में क्या कहा?
गोटेनबर्ग विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र प्रोफेसर मार्टिन हुल्टमैन ने डागेन्स न्येहेटर से कहा कि स्वीडन में जलवायु मुद्दे पर जन-भागीदारी की एक नई लहर आ रही है। उनके अनुसार, कोविड-19 महामारी के दौरान यह लहर कमज़ोर पड़ गई थी — जिसके पीछे जीवाश्म ईंधन लॉबिंग, गलत सूचनाएँ और दक्षिणपंथी ताकतों की चुनावी सफलता जैसे कारण थे।
स्वीडन में अगले चुनाव कब होंगे और क्या दाँव पर है?
स्वीडन में 13 सितंबर को संसद रिक्सडाग के साथ-साथ क्षेत्रीय और नगर परिषदों के लिए एक साथ चुनाव होंगे। जलवायु प्रदर्शन के बाद यह चुनाव इस बात की परीक्षा होगी कि क्या जन-दबाव नीतिगत प्रतिबद्धता में बदल पाता है।
राष्ट्र प्रेस
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