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अमरावती NICU अग्निकांड: दम घुटने से हुई तीन नवजातों की मौत, वेंटिलेशन और ऑक्सीजन सप्लाई बनी वजह — डॉ. तुषार पालवे

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अमरावती NICU अग्निकांड: दम घुटने से हुई तीन नवजातों की मौत, वेंटिलेशन और ऑक्सीजन सप्लाई बनी वजह — डॉ. तुषार पालवे

सारांश

अमरावती NICU अग्निकांड में तीन नवजातों की मौत जलने से नहीं, दम घुटने से हुई — वेंटिलेटर में विस्फोट, ऑक्सीजन लाइन से भड़की आग और वेंटिलेशन की कमी ने मिलकर त्रासदी को जन्म दिया। कामा अस्पताल के डीन डॉ. तुषार पालवे ने इसे देशभर के NICU के लिए चेतावनी बताया।

मुख्य बातें

अमरावती के महिला जिला अस्पताल के NICU में आग से तीन नवजात शिशुओं की मौत हुई।
तुषार पालवे के अनुसार मौत जलने से नहीं, बल्कि कार्बन मोनोऑक्साइड / कार्बन डाइऑक्साइड से दम घुटने से हुई।
वेंटिलेटर के कंप्रेसर में विस्फोट और ऑक्सीजन लाइन की मौजूदगी से आग तेज़ी से फैली।
वेंटिलेशन की अपर्याप्त व्यवस्था के कारण धुआँ बाहर नहीं निकल सका, जो मौत की मुख्य वजह बनी।
कामा अस्पताल में NICU को 16 अलग केबिन में बाँटा गया है — प्रत्येक में 1-2 शिशु — ताकि आग फैलने का खतरा कम हो।
विशेषज्ञों ने NICU के इलेक्ट्रिकल उपकरणों के नियमित रखरखाव को अनिवार्य बताया।

अमरावती के महिला जिला अस्पताल के NICU वार्ड में लगी भीषण आग में तीन नवजात शिशुओं की मौत के बाद चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया है। मुंबई के कामा अस्पताल के डीन डॉ. तुषार पालवे ने इस हादसे पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि शिशुओं की मौत जलने से नहीं, बल्कि दम घुटने से हुई — जिसकी मुख्य वजह वेंटिलेशन की कमी और ऑक्सीजन सप्लाई के कारण आग का तेज़ी से फैलना रही।

हादसे की वजह क्या रही

डॉ. पालवे ने बताया, 'अमरावती की घटना में वेंटिलेटर में धमाका होने की बात सामने आई है। वेंटिलेटर में एक कंप्रेसर होता है — कभी-कभी अत्यधिक गर्मी की वजह से उसमें विस्फोट हो जाता है और आग लग जाती है।' उन्होंने जोड़ा कि NICU में ऑक्सीजन लाइन की मौजूदगी से आग बेहद तेज़ी से फैल सकती है, क्योंकि इन वार्डों में ऑक्सीजन की आपूर्ति सामान्य से अधिक रहती है।

दम घुटने से हुई मौत — विशेषज्ञ की राय

डॉ. पालवे ने कहा, 'मुझे लगता है कि तीनों मौतें जलने की वजह से नहीं, बल्कि दम घुटने की वजह से हुई होंगी। आग से उत्पन्न कार्बन मोनोऑक्साइड या कार्बन डाइऑक्साइड की अधिकता के कारण नवजातों की जान गई।' उन्होंने यह भी कहा कि नवजात शिशु उस समय अत्यंत कमज़ोर अवस्था में होते हैं, हालाँकि अधिकांश बच्चों को बचा लिया गया। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, NICU में वेंटिलेशन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी, जिससे धुआँ बाहर नहीं निकल सका और यही मौत की प्रमुख वजह बनी।

कामा अस्पताल में सुरक्षा के इंतज़ाम

इस हादसे के बाद मुंबई के कामा अस्पताल में आपातकालीन सुरक्षा बैठक बुलाई गई। डॉ. पालवे ने बताया कि उनके अस्पताल में फायर सेफ्टी ऑडिट पूरा हो चुका है। NICU को 16 अलग-अलग केबिन में विभाजित किया गया है, जिनमें से प्रत्येक में केवल 1 या 2 शिशु रखे जाते हैं। इस व्यवस्था से एक केबिन में आग लगने पर वह दूसरे केबिन तक नहीं फैल सकती।

विशेषज्ञों की सीख और आगे की राह

डॉ. पालवे ने ज़ोर देकर कहा कि इस दुखद हादसे से यह सबक लेना ज़रूरी है कि NICU में मौजूद वेंटिलेटर सहित सभी इलेक्ट्रिकल उपकरणों का नियमित रखरखाव अनिवार्य है। उन्होंने दोहराया कि अमरावती अस्पताल में हवा के आवागमन की पर्याप्त व्यवस्था न होना इस त्रासदी की मूल वजह प्रतीत होती है। देशभर के अस्पतालों को NICU की अग्नि सुरक्षा और वेंटिलेशन मानकों की तत्काल समीक्षा करनी चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

दरअसल उस प्रणालीगत लापरवाही को उजागर करता है जो बजट की कमी और रखरखाव की उपेक्षा में पलती है। सवाल यह है कि क्या इस हादसे के बाद राज्य सरकारें केवल बैठकें बुलाएँगी, या NICU के वेंटिलेशन और उपकरण रखरखाव के लिए बाध्यकारी राष्ट्रीय मानक लागू किए जाएँगे।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमरावती NICU आग में नवजातों की मौत कैसे हुई?
डॉ. तुषार पालवे के अनुसार, तीनों नवजातों की मौत जलने से नहीं, बल्कि दम घुटने से हुई। आग से उत्पन्न कार्बन मोनोऑक्साइड या कार्बन डाइऑक्साइड की अधिकता और वेंटिलेशन की कमी के कारण धुआँ बाहर नहीं निकल सका, जिससे शिशुओं का दम घुट गया।
अमरावती NICU में आग कैसे लगी?
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, NICU में वेंटिलेटर के कंप्रेसर में अत्यधिक गर्मी के कारण विस्फोट हुआ। इसके बाद NICU में मौजूद ऑक्सीजन लाइन की वजह से आग तेज़ी से पूरे वार्ड में फैल गई।
NICU में ऑक्सीजन सप्लाई से आग का खतरा क्यों बढ़ जाता है?
NICU में नवजातों के लिए सामान्य से अधिक ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है। ऑक्सीजन एक दहन-सहायक गैस है, जो किसी भी चिंगारी या आग को कई गुना तेज़ी से भड़काने में सहायक होती है, जिससे आग पर काबू पाना मुश्किल हो जाता है।
कामा अस्पताल ने इस हादसे के बाद क्या कदम उठाए?
मुंबई के कामा अस्पताल में आपातकालीन सुरक्षा बैठक बुलाई गई। डीन डॉ. तुषार पालवे ने बताया कि उनके अस्पताल में फायर सेफ्टी ऑडिट पूरा हो चुका है और NICU को 16 अलग-अलग केबिन में बाँटा गया है, जिनमें प्रत्येक में केवल 1-2 शिशु रखे जाते हैं ताकि आग फैलने का खतरा न्यूनतम रहे।
NICU की सुरक्षा के लिए विशेषज्ञों ने क्या सुझाव दिए हैं?
डॉ. पालवे ने कहा कि NICU में वेंटिलेटर सहित सभी इलेक्ट्रिकल उपकरणों का नियमित रखरखाव अनिवार्य है। साथ ही, पर्याप्त वेंटिलेशन की व्यवस्था सुनिश्चित करना और NICU को छोटे-छोटे खंडों में विभाजित करना भी ज़रूरी बताया गया।
राष्ट्र प्रेस
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