ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा ऑडिट नियमित करने का दिया आदेश
सारांश
Key Takeaways
- अग्नि सुरक्षा उपायों का सख्त पालन
- नियमित निरीक्षण और मॉक ड्रिल
- आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया
- रोगियों की सुरक्षा को प्राथमिकता
- स्वास्थ्य विभाग में सुधार की आवश्यकता
भुवनेश्वर, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग ने रविवार को लोक सेवा भवन में राज्य स्वास्थ्य विभाग की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने राज्य के अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा उपायों के कठोर अनुपालन पर जोर देते हुए विभाग के अधिकारियों को समय-समय पर निगरानी रखने का निर्देश दिया।
बैठक में ओडिशा के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों, जिला मुख्यालय अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई।
मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा मानदंडों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए और नियमित निरीक्षण का आदेश दिया।
उन्होंने अधिकारियों को समय-समय पर निगरानी पर ध्यान केंद्रित करने एवं अग्नि सुरक्षा मानकों का उचित अनुपालन सुनिश्चित करने की सलाह भी दी।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्री ने आपातकालीन स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया की आवश्यकता और रोगी सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
मुकेश महालिंग ने निर्देश दिया कि सभी अस्पतालों में अग्निशामक उपकरण पूरी तरह से कार्यशील रहना चाहिए और नियमित निरीक्षण एवं मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को लोक निर्माण विभाग और अग्निशामक विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। बैठक के दौरान राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा की गई।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के लिए रोगियों और आम जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को राज्य भर के अस्पतालों में ऐसे खतरों से निपटने के लिए सतर्क रहने का निर्देश दिया।
यह ध्यान देने योग्य है कि हाल ही में कटक में सरकारी एससीबी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुई आग की घटना के बाद विपक्षी बीजू जनता दल (बीजेडी) और कांग्रेस ने नैतिक आधार पर स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की है।
इस घटना में आधिकारिक तौर पर 12 व्यक्तियों की जान गई। विपक्षी दलों ने इस घटना को राज्य के स्वास्थ्य विभाग में खामियों का प्रतीक बताया है।