ओडिशा के एससीबी अस्पताल में आग: १२ मृतकों के बाद स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग

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ओडिशा के एससीबी अस्पताल में आग: १२ मृतकों के बाद स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग

सारांश

ओडिशा के कटक में एससीबी मेडिकल कॉलेज में आग से १२ लोगों की मौत के बाद, विपक्ष ने स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। इस संकट पर राजनीतिक प्रतिक्रिया में तीव्रता आई है।

मुख्य बातें

ओडिशा के कटक में आग से १२ लोगों की मौत हुई।
विपक्ष ने स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की।
मृतकों के परिवारों के लिए २५ लाख रुपए का मुआवजा घोषित।
स्वास्थ्य मंत्री ने सुरक्षा उपायों की बात की।
न्यायिक जांच की घोषणा की गई।

भुवनेश्वर, १७ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सोमवार को ओडिशा के कटक स्थित एससीबी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में लगी भीषण आग की घटना ने १२ लोगों की जान ले ली। इसके बाद, मंगलवार को विपक्षी दल बीजू जनता दल (बीजद) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ओडिशा विधानसभा में तीव्र विरोध प्रदर्शन किया। इन दलों ने नैतिक आधार पर स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग के तत्काल इस्तीफे की मांग की।

जैसे ही मंगलवार को प्रश्नकाल की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्ष के सदस्य पोस्टर लेकर विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी के आसन की ओर भागे; वे सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे और स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

भंग होने के कारण सदन को पहले दोपहर १२ बजे तक और फिर शाम ४ बजे तक स्थगित कर दिया गया।

शून्यकाल की कार्यवाही के दौरान, विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने कहा, "कल, मैंने कटक में एससीबी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का दौरा किया। जो दृश्य मैंने देखा, वह न केवल एक दुखद घटना का था, बल्कि हमारे राज्य के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान में सुरक्षा मानकों के गिरने की एक कड़वी याद भी थी।"

पटनायक ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि जो मरीज ठीक होने की उम्मीद के साथ अस्पताल आए थे, उन्हें प्रशासनिक लापरवाही के कारण एक भयानक अंत का सामना करना पड़ा।

स्वास्थ्य मंत्री महालिंग के इस्तीफे की मांग करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "जब परिवार शोक मना रहे हों, तब स्वास्थ्य विभाग जांच की आड़ में नहीं छिप सकता। न्यायिक जांच का स्वागत है, लेकिन यह राजनीतिक नेतृत्व को उसकी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करती। इसलिए, मैं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मुकेश महालिंग के तत्काल इस्तीफे की मांग करता हूं। उन्हें सुरक्षा निगरानी में हुई इस विनाशकारी चूक की नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए।"

उन्होंने मृत मरीजों के परिवारों के लिए २५ लाख रुपए की अनुग्रह राशि की घोषणा पर भी आपत्ति जताई और इसे अपर्याप्त बताया। उन्होंने प्रत्येक मृतक पीड़ित के परिवार के लिए ५० लाख रुपए की अनुग्रह राशि की मांग की।

इस बीच, स्वास्थ्य मंत्री महालिंग ने मंगलवार को सदन में कहा कि एससीबी अग्निकांड में मरने वालों की संख्या बढ़कर १२ हो गई है।

मंत्री ने कहा कि दुखद घटना के तुरंत बाद, ट्रॉमा केयर सेंटर के कर्मचारियों ने युद्धस्तर पर काम करते हुए पहली मंजिल के आईसीयू और आस-पास के वार्डों से २३ मरीजों को स्थानांतरित किया। इनमें से गंभीर हालत वाले सात मरीजों की तत्काल मृत्यु हो गई।

इसके अतिरिक्त, पांच अन्य गंभीर रूप से बीमार मरीजों की भी बाद में मृत्यु हो गई। उन्होंने बताया कि मरीजों को बचाने में जुटे ११ चिकित्सा कर्मचारी भीषण आग के कारण घायल हो गए हैं, जिनका इलाज चल रहा है और उनकी जान अब खतरे से बाहर है।

उन्होंने बताया कि एससीबी मेडिकल कॉलेज में ८५ अलग-अलग कमरे हैं। इनमें से हर कमरे में आवश्यक सुरक्षा जरूरतों की पहचान कर ली गई है। लोक निर्माण विभाग ने इन सभी उपायों को लागू करने की जिम्मेदारी ली है। जिस कमरे में आग लगी, वहां एक रैंप, अग्निशामक यंत्र और हाइड्रेंट मौजूद थे। ये सभी सुरक्षा उपाय पिछले छह महीनों में मौजूदा सरकार के कार्यकाल के दौरान लागू किए गए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एससीबी अस्पताल में आग कैसे लगी?
अभी तक आग लगने के कारणों की पूरी जानकारी नहीं मिली है, लेकिन यह घटना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का संकेत देती है।
क्या सरकार ने मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजा घोषित किया है?
हाँ, सरकार ने मृतकों के परिवारों के लिए २५ लाख रुपए की अनुग्रह राशि की घोषणा की है, लेकिन विपक्ष इसे अपर्याप्त मान रहा है।
क्या स्वास्थ्य मंत्री ने इस्तीफा दिया?
अभी तक स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग ने इस्तीफा नहीं दिया है, लेकिन विपक्ष ने उनकी इस्तीफे की मांग की है।
इस घटना के बाद सरकार की क्या प्रतिक्रिया है?
स्वास्थ्य मंत्री ने घटना की गंभीरता को स्वीकार किया है और सुरक्षा उपायों को लागू करने की बात कही है।
क्या न्यायिक जांच की जाएगी?
जी हाँ, न्यायिक जांच की घोषणा की गई है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि यह राजनीतिक नेतृत्व को जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता।
राष्ट्र प्रेस
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