8 अगस्त 2026
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सीएम धामी का बड़ा फैसला: उत्तराखंड में अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों व मॉल का होगा फायर सेफ्टी ऑडिट

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सीएम धामी का बड़ा फैसला: उत्तराखंड में अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों व मॉल का होगा फायर सेफ्टी ऑडिट

सारांश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून सचिवालय में बुलाई उच्चस्तरीय बैठक में साफ संदेश दिया — अग्नि सुरक्षा में लापरवाही नहीं चलेगी। अस्पतालों से लेकर कोचिंग सेंटरों तक, पूरे उत्तराखंड में फायर सेफ्टी ऑडिट का व्यापक अभियान शुरू होगा।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 23 जून 2026 को देहरादून सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक में फायर सेफ्टी ऑडिट के निर्देश दिए।
ऑडिट के दायरे में अस्पताल, कोचिंग सेंटर, बड़े मॉल, होटल और अन्य सार्वजनिक भवन शामिल हैं।
फायर सेफ्टी उपकरण, आपातकालीन निकास मार्ग , विद्युत सुरक्षा और निकासी तैयारियों की विशेष जाँच होगी।
अग्निशमन विभाग, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच समन्वय से समयबद्ध ऑडिट का निर्देश।
मानकों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के विरुद्ध तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 23 जून 2026 को देहरादून सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि उत्तराखंड के सभी अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों, बड़े मॉल, होटलों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और अन्य सार्वजनिक उपयोग वाले भवनों का तत्काल व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जनसुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और अग्नि सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

क्या हैं मुख्य निर्देश

मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन संस्थानों में अग्निशमन व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई जाएं, उन्हें तत्काल चिन्हित कर सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। ऑडिट के दौरान फायर सेफ्टी उपकरणों की कार्यशीलता, आपातकालीन निकास मार्गों, विद्युत सुरक्षा व्यवस्थाओं तथा आपदा की स्थिति में त्वरित निकासी की तैयारियों की विशेष रूप से जाँच की जाएगी।

विभागों के बीच समन्वय पर जोर

धामी ने अग्निशमन विभाग, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर समयबद्ध तरीके से ऑडिट प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में सार्वजनिक भवनों में अग्निकांड की घटनाओं को लेकर चिंता बढ़ी है और राज्य सरकारों पर निवारक कदम उठाने का दबाव है।

बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद

इस उच्चस्तरीय बैठक में बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, हेमकुंट साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्रजीत बिंद्रा, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, सचिव गृह शैलेश बगौली, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, सचिव विनय शंकर पाण्डेय, डीजी अभिसूचना एवं सुरक्षा अभिनव कुमार, आईजी रिद्धिम अग्रवाल, अपर सचिव बंशीधर तिवारी और अपर सचिव तृप्ति भट्ट उपस्थित रहे। धार्मिक स्थलों के प्रबंधन ट्रस्टों की उपस्थिति यह संकेत देती है कि ऑडिट का दायरा तीर्थस्थलों और उनसे जुड़े भवनों तक भी विस्तारित हो सकता है।

आम जनता पर असर

गौरतलब है कि उत्तराखंड में बड़ी संख्या में पर्यटक और तीर्थयात्री आते हैं, और होटलों व धर्मशालाओं में अग्नि सुरक्षा की स्थिति हमेशा से चिंता का विषय रही है। इस ऑडिट अभियान से उन लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा जो प्रतिदिन इन सार्वजनिक भवनों का उपयोग करते हैं। कोचिंग सेंटरों को विशेष रूप से शामिल किए जाने से छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।

आगे क्या होगा

राज्य सरकार से अपेक्षा है कि वह ऑडिट की समय-सीमा और मानकों के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई का ब्यौरा शीघ्र जारी करे। अग्निशमन विभाग को नोडल एजेंसी की भूमिका निभानी होगी और जिलावार रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपनी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — राज्य में ऐसे निर्देश पहले भी जारी हुए हैं जो कागजों तक सीमित रह गए। कोचिंग सेंटरों को विशेष रूप से शामिल करना सराहनीय है, क्योंकि देशभर में इन भवनों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था अक्सर उपेक्षित रहती है। बैठक में धार्मिक ट्रस्टों की मौजूदगी से संकेत मिलता है कि तीर्थस्थल भी दायरे में आ सकते हैं, जो पर्यटन-प्रधान उत्तराखंड के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। सरकार को चाहिए कि ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और उल्लंघनकर्ताओं पर कार्रवाई पारदर्शी तरीके से हो, अन्यथा यह अभियान महज औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तराखंड में फायर सेफ्टी ऑडिट का निर्देश किसने और कब दिया?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 23 जून 2026 को देहरादून सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में यह निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अग्नि सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
फायर सेफ्टी ऑडिट में कौन-कौन से भवन शामिल होंगे?
ऑडिट के दायरे में उत्तराखंड के सभी अस्पताल, कोचिंग सेंटर, बड़े मॉल, होटल, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और अन्य सार्वजनिक उपयोग वाले भवन शामिल होंगे। बैठक में धार्मिक ट्रस्टों की उपस्थिति से संकेत मिलता है कि तीर्थस्थल भी इसके दायरे में आ सकते हैं।
ऑडिट के दौरान किन चीजों की जाँच की जाएगी?
ऑडिट में फायर सेफ्टी उपकरणों की कार्यशीलता, आपातकालीन निकास मार्गों की स्थिति, विद्युत सुरक्षा व्यवस्थाओं और आपदा की स्थिति में त्वरित निकासी की तैयारियों की विशेष जाँच की जाएगी। मानकों पर खरे न उतरने वाले संस्थानों के विरुद्ध तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई का निर्देश दिया गया है।
ऑडिट की जिम्मेदारी किस विभाग की होगी?
अग्निशमन विभाग, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर समयबद्ध ढंग से ऑडिट पूरा करने का निर्देश दिया गया है। अग्निशमन विभाग को नोडल एजेंसी की भूमिका निभानी होगी।
इस फायर सेफ्टी ऑडिट का आम जनता पर क्या असर होगा?
इस अभियान से उन लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा जो प्रतिदिन अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों और मॉल जैसे सार्वजनिक भवनों का उपयोग करते हैं। उत्तराखंड में बड़ी संख्या में पर्यटक और तीर्थयात्री आते हैं, इसलिए होटलों और धर्मशालाओं में सुरक्षा सुधार का व्यापक प्रभाव पड़ेगा।
राष्ट्र प्रेस
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