सीएम धामी का बड़ा फैसला: उत्तराखंड में अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों व मॉल का होगा फायर सेफ्टी ऑडिट
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 23 जून 2026 को देहरादून सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि उत्तराखंड के सभी अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों, बड़े मॉल, होटलों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और अन्य सार्वजनिक उपयोग वाले भवनों का तत्काल व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जनसुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और अग्नि सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
क्या हैं मुख्य निर्देश
मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन संस्थानों में अग्निशमन व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई जाएं, उन्हें तत्काल चिन्हित कर सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। ऑडिट के दौरान फायर सेफ्टी उपकरणों की कार्यशीलता, आपातकालीन निकास मार्गों, विद्युत सुरक्षा व्यवस्थाओं तथा आपदा की स्थिति में त्वरित निकासी की तैयारियों की विशेष रूप से जाँच की जाएगी।
विभागों के बीच समन्वय पर जोर
धामी ने अग्निशमन विभाग, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर समयबद्ध तरीके से ऑडिट प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में सार्वजनिक भवनों में अग्निकांड की घटनाओं को लेकर चिंता बढ़ी है और राज्य सरकारों पर निवारक कदम उठाने का दबाव है।
बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद
इस उच्चस्तरीय बैठक में बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, हेमकुंट साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्रजीत बिंद्रा, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, सचिव गृह शैलेश बगौली, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, सचिव विनय शंकर पाण्डेय, डीजी अभिसूचना एवं सुरक्षा अभिनव कुमार, आईजी रिद्धिम अग्रवाल, अपर सचिव बंशीधर तिवारी और अपर सचिव तृप्ति भट्ट उपस्थित रहे। धार्मिक स्थलों के प्रबंधन ट्रस्टों की उपस्थिति यह संकेत देती है कि ऑडिट का दायरा तीर्थस्थलों और उनसे जुड़े भवनों तक भी विस्तारित हो सकता है।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि उत्तराखंड में बड़ी संख्या में पर्यटक और तीर्थयात्री आते हैं, और होटलों व धर्मशालाओं में अग्नि सुरक्षा की स्थिति हमेशा से चिंता का विषय रही है। इस ऑडिट अभियान से उन लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा जो प्रतिदिन इन सार्वजनिक भवनों का उपयोग करते हैं। कोचिंग सेंटरों को विशेष रूप से शामिल किए जाने से छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार से अपेक्षा है कि वह ऑडिट की समय-सीमा और मानकों के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई का ब्यौरा शीघ्र जारी करे। अग्निशमन विभाग को नोडल एजेंसी की भूमिका निभानी होगी और जिलावार रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपनी होगी।