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ओडिशा: OSDMA ने स्कूलों और कोचिंग सेंटरों में अग्नि सुरक्षा ऑडिट के दिए तत्काल आदेश

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ओडिशा: OSDMA ने स्कूलों और कोचिंग सेंटरों में अग्नि सुरक्षा ऑडिट के दिए तत्काल आदेश

सारांश

लखनऊ कोचिंग अग्निकांड के बाद ओडिशा सरकार हरकत में आई। OSDMA ने राज्यभर के स्कूलों, कोचिंग और कौशल केंद्रों में तत्काल फायर सेफ्टी ऑडिट के आदेश दिए हैं — NOC जांच, मॉक ड्रिल और निकास मार्गों की बाधामुक्ति इसके केंद्र में है।

मुख्य बातें

OSDMA ने 24 जून को ओडिशा के सभी शिक्षण संस्थानों, कोचिंग सेंटरों और कौशल विकास केंद्रों में तत्काल अग्नि सुरक्षा ऑडिट के आदेश जारी किए।
यह कदम लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में आग से छात्रों समेत कई लोगों की मौत के बाद उठाया गया।
निरीक्षण में 'ओडिशा फायर प्रिवेंशन एंड फायर सेफ्टी रूल्स, 2017' और 2025 संशोधन के पालन की जांच होगी।
संयुक्त निरीक्षण दल फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और NOC की वैधता की समीक्षा करेंगे; बहुमंजिला इमारतों पर विशेष ध्यान होगा।
संस्थानों को प्रत्येक तिमाही अग्नि सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम और नियमित मॉक ड्रिल आयोजित करने के निर्देश दिए गए।

ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (OSDMA) ने बुधवार, 24 जून को राज्य के सभी शिक्षण संस्थानों, कोचिंग सेंटरों और कौशल विकास केंद्रों में अग्नि सुरक्षा की तत्काल एवं सघन समीक्षा और ऑडिट कराने के निर्देश जारी किए। यह कदम लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग में छात्रों समेत कई लोगों की मौत के बाद देशभर में उत्पन्न सतर्कता के माहौल के बीच उठाया गया है।

निर्देश का मूल उद्देश्य

OSDMA के विशेष राहत आयुक्त एवं प्रबंध निदेशक राजेश प्रभाकर पाटिल ने सभी जिला कलेक्टरों और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के अध्यक्षों को जारी आधिकारिक पत्र में स्पष्ट किया कि छात्रों, प्रशिक्षुओं, शिक्षकों और सहायक कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस सक्रिय निर्देश में सुरक्षा नियमों के पालन में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरतने पर विशेष बल दिया गया है।

किन नियमों के तहत होगी जांच

नया शैक्षणिक सत्र आरंभ होते ही स्थानीय प्रशासन को निर्देशित किया गया है कि वे तत्काल फील्ड निरीक्षण करें। इन निरीक्षणों में 'ओडिशा फायर प्रिवेंशन एंड फायर सेफ्टी रूल्स, 2017' तथा 'ओडिशा फायर प्रिवेंशन एंड फायर सेफ्टी (अमेंडमेंट) रूल्स, 2025' के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में शैक्षणिक संस्थानों में अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

निरीक्षण अभियान की रूपरेखा

जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि सभी परिसरों में तत्काल और व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया जाए, जिसमें बहुमंजिला इमारतों और भीड़भाड़ वाले शहरी क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाए। संयुक्त निरीक्षण दल मौजूदा फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) की वैधता की बारीकी से जांच करेंगे।

निरीक्षण दल अग्निशामक यंत्रों, स्मोक डिटेक्टरों, अलार्म प्रणालियों और आपातकालीन प्रकाश व्यवस्था की कार्यशील स्थिति की समीक्षा करेंगे। संस्थानों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि कक्षाओं या निकास मार्गों पर ज्वलनशील सामग्री न रखी जाए, विद्युत प्रणाली का नियमित रखरखाव हो और पर्याप्त आपातकालीन निकास एवं साइनबोर्ड की व्यवस्था हो।

निकास मार्गों पर विशेष जोर

निर्देश में इस बात पर विशेष बल दिया गया है कि सभी निकास द्वारों, सीढ़ियों, गलियारों और आपातकालीन निकास रास्तों पर हर समय किसी भी प्रकार की रुकावट नहीं होनी चाहिए। संस्थानों को निकास स्थलों, एकत्रण बिंदुओं और आपातकालीन संपर्क नंबरों के स्पष्ट साइनबोर्ड लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं। यह भी सुनिश्चित करना होगा कि निकास द्वारों के दरवाजे बाहर की ओर खुलें और आपातकाल में सहजता से उपयोग किए जा सकें।

जागरूकता और मॉक ड्रिल की अनिवार्यता

आदेश में शैक्षणिक और प्रशिक्षण संस्थानों को केवल नियमों के अनुपालन तक सीमित न रहकर सक्रिय रूप से तैयार रहने पर जोर दिया गया है। इसके लिए प्रत्येक तिमाही में अग्नि सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की सिफारिश की गई है। ये कार्यक्रम अग्निशमन सेवा अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय में नियमित मॉक ड्रिल के रूप में आयोजित किए जाएंगे, जिससे संस्थानों की आपातकालीन तैयारी को और मजबूत किया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली कसौटी क्रियान्वयन में है। राज्यभर के सैकड़ों कोचिंग सेंटरों में NOC और फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट की स्थिति पहले से ही संदिग्ध रही है — महज आदेश जारी करने से जमीनी बदलाव नहीं आएगा। जब तक निरीक्षण के नतीजे सार्वजनिक नहीं होते और उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कठोर कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह अभियान कागजी खानापूर्ति बनने का जोखिम उठाता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

OSDMA ने अग्नि सुरक्षा ऑडिट का आदेश क्यों दिया?
लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में भीषण आग से छात्रों समेत कई लोगों की मौत के बाद OSDMA ने यह कदम उठाया। इस घटना के बाद देशभर में शैक्षणिक संस्थानों की अग्नि सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की आवश्यकता महसूस की गई।
ओडिशा में किन संस्थानों की जांच होगी?
राज्य के सभी स्कूलों, कोचिंग सेंटरों और कौशल विकास केंद्रों में निरीक्षण होगा। बहुमंजिला इमारतों और भीड़भाड़ वाले शहरी क्षेत्रों में स्थित संस्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी।
निरीक्षण में किन बातों की जांच की जाएगी?
निरीक्षण दल फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और NOC की वैधता, अग्निशामक यंत्रों, स्मोक डिटेक्टरों, आपातकालीन प्रकाश व्यवस्था और निकास मार्गों की स्थिति की जांच करेंगे। ओडिशा फायर प्रिवेंशन एंड फायर सेफ्टी रूल्स, 2017 और 2025 संशोधन के पालन की भी समीक्षा होगी।
संस्थानों को अग्नि सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाने होंगे?
संस्थानों को निकास मार्गों पर रुकावट हटानी होगी, ज्वलनशील सामग्री कक्षाओं से दूर रखनी होगी और विद्युत प्रणाली का नियमित रखरखाव करना होगा। इसके अलावा प्रत्येक तिमाही अग्नि सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम और मॉक ड्रिल भी आयोजित करने होंगे।
यह आदेश किसने जारी किया और किसे भेजा गया?
यह आदेश OSDMA के विशेष राहत आयुक्त एवं प्रबंध निदेशक राजेश प्रभाकर पाटिल ने जारी किया। यह सभी जिला कलेक्टरों और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के अध्यक्षों को भेजा गया है।
राष्ट्र प्रेस
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