10 अगस्त 2026
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लखनऊ अग्निकांड के बाद योगी सरकार का बड़ा एक्शन: प्रदेशभर में अवैध कोचिंग सेंटरों पर चलेगा अभियान

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लखनऊ अग्निकांड के बाद योगी सरकार का बड़ा एक्शन: प्रदेशभर में अवैध कोचिंग सेंटरों पर चलेगा अभियान

सारांश

लखनऊ के कोचिंग सेंटर में आग की त्रासदी के बाद योगी सरकार ने प्रदेशव्यापी अभियान का ऐलान किया है — अवैध सेंटर बंद होंगे, पंजीकृत संस्थानों का सुरक्षा ऑडिट होगा। सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई टिकाऊ होगी या अगली दुर्घटना तक सीमित रहेगी।

मुख्य बातें

लखनऊ के कोचिंग सेंटर में हुए अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 23 जून 2026 को प्रदेशव्यापी जाँच अभियान का आदेश दिया।
सभी जिलाधिकारियों को अवैध कोचिंग सेंटरों की पहचान कर उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियमन अधिनियम, 2002 के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
पंजीकृत संस्थानों में अग्निशमन उपकरण, विद्युत व्यवस्था, आपातकालीन निकास और संरचनात्मक सुरक्षा का विशेष ऑडिट होगा।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा — विद्यार्थियों की सुरक्षा से किसी स्तर पर समझौता नहीं होगा।
विशेष सचिव उच्च शिक्षा निधि श्रीवास्तव ने सभी DM को औपचारिक पत्र जारी किया।

लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 23 जून 2026 को पूरे उत्तर प्रदेश में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा और वैधता की जाँच के लिए एक व्यापक प्रदेशव्यापी अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जनपदों में बिना पंजीकरण चल रहे कोचिंग सेंटरों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई करें और पंजीकृत संस्थानों का भी विशेष सुरक्षा ऑडिट कराएँ।

मुख्य घटनाक्रम

उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता के साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियमन अधिनियम, 2002 के तहत पंजीकरण के बिना संचालित किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा और नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

इस संबंध में विशेष सचिव उच्च शिक्षा निधि श्रीवास्तव की ओर से सभी जिलाधिकारियों को औपचारिक पत्र जारी किया गया है, जिसमें अवैध संस्थानों की पहचान और पंजीकृत सेंटरों के नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं।

निरीक्षण में क्या जाँचा जाएगा

मंत्री उपाध्याय ने बताया कि निरीक्षण अभियान के दौरान निम्नलिखित बिंदुओं की गहन समीक्षा की जाएगी:

भवन की संरचनात्मक सुरक्षा, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता, विद्युत व्यवस्था की स्थिति, आपातकालीन निकास मार्गों की पर्याप्तता, विद्यार्थियों की क्षमता के अनुरूप बुनियादी सुविधाएँ तथा अन्य निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन। किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर संबंधित संस्थानों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर शुरू किए गए इस अभियान को लेकर मंत्री उपाध्याय ने कहा कि योगी सरकार शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों और अभिभावकों का हित सर्वोपरि है और प्रदेश में संचालित प्रत्येक कोचिंग संस्थान को निर्धारित मानकों का पूर्णतः पालन करना होगा।

गौरतलब है कि यह अभियान ऐसे समय में आया है जब देशभर में कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। 2024 में नई दिल्ली के राजेंद्र नगर में एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने से तीन छात्रों की मौत के बाद भी इसी तरह के अभियानों की माँग उठी थी।

आम जनता और विद्यार्थियों पर असर

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए यह अभियान सीधे तौर पर प्रासंगिक है। उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में कोचिंग सेंटर संचालित होते हैं, जिनमें से कई कथित तौर पर बिना उचित पंजीकरण या सुरक्षा मानकों के चल रहे हैं। सरकार का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य हर विद्यार्थी को सुरक्षित, व्यवस्थित और भरोसेमंद शैक्षिक माहौल उपलब्ध कराना है।

आगे क्या होगा

जिलाधिकारियों द्वारा सर्वेक्षण रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद अवैध संस्थानों पर उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियमन अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। पंजीकृत संस्थानों को सुरक्षा मानकों के अनुरूप खुद को अद्यतन करने का अवसर दिया जाएगा, अन्यथा उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कदम उठाए जाएँगे। यह देखना होगा कि क्या यह अभियान महज एक अल्पकालिक प्रतिक्रिया बनकर रह जाता है या दीर्घकालिक नीतिगत बदलाव की नींव रखता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन व्यवस्थागत बदलाव सीमित रहा। असली परीक्षा यह है कि क्या इस बार जिलाधिकारियों का सर्वेक्षण महज कागजी खानापूर्ति बनेगा या वास्तविक बंदी और दंड तक पहुँचेगा। उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियमन अधिनियम 2002 दो दशक पुराना है और शहरी कोचिंग उद्योग की मौजूदा जटिलता के लिए पर्याप्त नहीं माना जाता। बिना स्वतंत्र तृतीय-पक्ष ऑडिट और समयबद्ध अनुपालन तंत्र के, यह अभियान अगली दुर्घटना तक की प्रतीक्षा में एक और घोषणा बनकर रह सकता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ कोचिंग सेंटर अग्निकांड के बाद योगी सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
योगी सरकार ने 23 जून 2026 को प्रदेशभर में अवैध कोचिंग सेंटरों की पहचान और कार्रवाई के लिए सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। साथ ही पंजीकृत संस्थानों का अग्नि सुरक्षा, विद्युत व्यवस्था और संरचनात्मक सुरक्षा का विशेष ऑडिट कराने का भी आदेश दिया गया है।
उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियमन अधिनियम 2002 क्या है?
यह उत्तर प्रदेश सरकार का वह कानून है जिसके तहत प्रदेश में संचालित सभी कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण अनिवार्य है। बिना पंजीकरण के चलने वाले संस्थानों के विरुद्ध इसी अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाती है।
कोचिंग सेंटरों के निरीक्षण में किन बातों की जाँच होगी?
निरीक्षण के दौरान भवन की संरचनात्मक सुरक्षा, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता, विद्युत व्यवस्था, आपातकालीन निकास मार्ग, विद्यार्थियों की क्षमता के अनुरूप बुनियादी सुविधाएँ और अन्य सुरक्षा मानकों की जाँच की जाएगी। किसी भी अनियमितता पर संस्थान के विरुद्ध कार्रवाई होगी।
इस अभियान से विद्यार्थियों पर क्या असर पड़ेगा?
अवैध या असुरक्षित कोचिंग सेंटर बंद होने से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को अल्पकालिक असुविधा हो सकती है। हालाँकि सरकार का उद्देश्य दीर्घकालिक रूप से हर विद्यार्थी को सुरक्षित और मानक-अनुरूप शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराना है।
क्या इससे पहले भी ऐसे अभियान चले हैं?
हाँ, 2024 में नई दिल्ली के राजेंद्र नगर में कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने से तीन छात्रों की मौत के बाद देशभर में इसी तरह की जाँच और कार्रवाई की माँग उठी थी। आलोचकों का कहना है कि उस समय भी अभियान चले लेकिन व्यवस्थागत सुधार सीमित रहे।
राष्ट्र प्रेस
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