सेबी का वेरानियम क्लाउड और MD साबले पर 7 साल का प्रतिबंध, ₹128.77 करोड़ का अवैध लाभ वापस करने का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी / SEBI) ने वेरानियम क्लाउड लिमिटेड (VCL) और उसके प्रबंध निदेशक हर्षवर्धन हनमंत साबले पर कड़ी नियामकीय कार्रवाई करते हुए दोनों को सात वर्षों के लिए प्रतिभूति बाज़ार से प्रतिबंधित कर दिया है। नियामक के अनुसार, कंपनी ने निवेशकों से जुटाई गई राशि का दुरुपयोग किया, वित्तीय विवरणों में कथित हेरफेर किया और भ्रामक कॉरपोरेट खुलासे जारी किए। यह आदेश 25 अगस्त 2026 को जारी किया गया।
मुख्य घटनाक्रम
सेबी की जांच मुख्य रूप से सितंबर 2022 में आए कंपनी के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) और उसके बाद जारी राइट्स इश्यू से संबंधित है। कंपनी ने IPO के ज़रिए ₹40.39 करोड़ जुटाए थे और दावा किया था कि इस राशि का उपयोग कंटेनर-आधारित एज डेटा सेंटर तथा डिजिटल लर्निंग सेंटर स्थापित करने में होगा। अगले वर्ष राइट्स इश्यू के माध्यम से ₹48.45 करोड़ और जुटाए गए।
सेबी के अनुसार, राइट्स इश्यू से प्राप्त राशि का लगभग 89.83 प्रतिशत हिस्सा प्रमोटर से जुड़ी संस्थाओं की ओर मोड़ दिया गया। इनमें से ₹32.73 करोड़ सीधे हर्षवर्धन साबले के व्यक्तिगत बैंक खाते में स्थानांतरित किए गए।
डेटा सेंटर के दावे निकले खोखले
जांच के दौरान सेबी और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने निरीक्षण में पाया कि सावंतवाड़ी के पंजीकृत पते पर कोई एज डेटा सेंटर मौजूद ही नहीं था। गोवा स्थित कथित डेटा सेंटर पर एक महीने में केवल छह यूनिट बिजली की खपत दर्ज हुई — जो किसी सक्रिय तकनीकी परिसर के लिए असंभव रूप से कम है। नियामक के अनुसार, परियोजनाओं से जुड़े मुख्य विक्रेता के पास आवश्यक स्थायी परिसंपत्तियाँ भी नहीं थीं।
वित्तीय आंकड़ों में कथित हेरफेर
सेबी ने कंपनी के खातों में गंभीर अनियमितताएँ पाईं। जांच के अनुसार, कंपनी ने दो वित्तीय वर्षों में अमटेलफोन इन्कॉरपोरेटेड नामक संस्था से ₹594.32 करोड़ की बिक्री दर्शाई, परंतु इन लेनदेनों के समर्थन में वास्तविक बैंक रसीदें नहीं मिलीं — ये केवल लेखा प्रविष्टियाँ थीं।
इसी प्रकार, कंपनी की अमेरिकी सहायक इकाई वेरानियम क्लाउड इंक की पूंजी मात्र 1,000 डॉलर थी और उसके पास कोई कर्मचारी नहीं था, फिर भी उसे एक ही तिमाही में ₹392.11 करोड़ का राजस्व अर्जित करने वाली इकाई के रूप में प्रस्तुत किया गया।
भ्रामक घोषणाओं से शेयर में उछाल, प्रमोटरों ने बेचे शेयर
सेबी के अनुसार, फरवरी 2023 में कंपनी ने फास्टवे ट्रांसमिशन्स प्राइवेट लिमिटेड के ₹2,683 करोड़ में संभावित अधिग्रहण की घोषणा की — जो कंपनी की कुल निवल संपत्ति से लगभग 20 गुना अधिक थी। इसके बाद कंपनी ने राजस्व में 984 प्रतिशत की वृद्धि दिखाई और शेयर मूल्य में तेज़ उछाल आया। नियामक का आरोप है कि इस स्थिति का फायदा उठाकर प्रमोटर समूह से जुड़ी संस्थाओं ने अपने शेयर ऊंचे दामों पर बेचे और ₹128.77 करोड़ से अधिक का अवैध लाभ कमाया, जबकि साधारण निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ा।
जुर्माना और प्रतिबंध: किस पर क्या कार्रवाई
हर्षवर्धन हनमंत साबले को ₹128.77 करोड़ का अवैध लाभ 12 प्रतिशत ब्याज सहित वापस जमा कराने और ₹20.4 करोड़ का जुर्माना अदा करने का निर्देश दिया गया है। वेरानियम क्लाउड लिमिटेड पर ₹1.3 करोड़ का दंड लगाया गया है और कंपनी को निवेशकों से कथित तौर पर डायवर्ट किए गए ₹62.51 करोड़ की वसूली करने को कहा गया है।
बीएम ट्रेडर्स के स्वामी राज जगतानी — जिन्हें सेबी ने मुखौटा इकाई के रूप में संचालित करने वाला बताया और जिन्हें कंपनी व साबले से ₹138 करोड़ से अधिक प्राप्त हुए — पर ₹10.1 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है और उन्हें चार वर्षों के लिए प्रतिभूति बाज़ार से प्रतिबंधित किया गया है। कंपनी के कार्यकारी निदेशक विनायक वसंत जाधव, फहीम यूनुस शेख और मुख्य वित्तीय अधिकारी मुकुंदन राघवन पर प्रत्येक पर ₹6 लाख का जुर्माना और एक वर्ष का प्रतिभूति बाज़ार प्रतिबंध लगाया गया है।
यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि छोटे-कैप IPO में पारदर्शिता की कमी किस तरह खुदरा निवेशकों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। सेबी की यह कार्रवाई आगे भी नियामकीय निगरानी के सख्त होने का संकेत देती है।