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सेबी की जांच: सोशल मीडिया से शेयर हेरफेर कर ₹20.25 करोड़ कमाने के आरोप में 7 सदस्यीय परिवार

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सेबी की जांच: सोशल मीडिया से शेयर हेरफेर कर ₹20.25 करोड़ कमाने के आरोप में 7 सदस्यीय परिवार

सारांश

सेबी ने एक परिवार के 7 सदस्यों पर टेलीग्राम, व्हाट्सएप और एक्स के ज़रिए 82 शेयरों में हेरफेर का आरोप लगाया है। कथित अवैध मुनाफा ₹20.25 करोड़; रोहन और शेरोन गुप्ता सबसे बड़े लाभार्थी। जांच अवधि में ट्रेड वैल्यू 86% और मुनाफा 242% बढ़ा।

मुख्य बातें

सेबी ने एक ही परिवार के 7 सदस्यों पर सोशल मीडिया से शेयर हेरफेर का आरोप लगाया।
कथित अवैध मुनाफा शुरुआती तौर पर ₹20.25 करोड़ ; जांच अवधि में स्क्वायर-ऑफ मुनाफा ₹58.40 करोड़ तक पहुँचा।
जांच अवधि 1 दिसंबर 2023 से 20 जनवरी 2026 ; कुल 82 शेयरों में हेरफेर का आरोप।
रोहन गुप्ता और शेरोन गुप्ता सबसे बड़े लाभार्थी, दोनों ने मिलकर कथित तौर पर ₹50 करोड़ कमाए।
21-24 जनवरी 2026 के बीच अदालत की अनुमति से तलाशी और जब्ती अभियान; इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त।
ग्रॉस ट्रेड वैल्यू जांच अवधि में ₹548.62 करोड़ से बढ़कर ₹1,023.40 करोड़ — 86% की वृद्धि।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने मुंबई के एक ही परिवार के सात सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि उन्होंने टेलीग्राम, व्हाट्सएप और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर छोटे निवेशकों को गुमराह किया और शेयरों की सार्वजनिक सिफारिश से पहले खरीदारी करके कथित तौर पर ₹20.25 करोड़ का अवैध मुनाफा कमाया। नियामक के अंतरिम प्रवर्तन आदेश के अनुसार, यह मामला बाजार में सुनियोजित धोखाधड़ी और हेरफेर का है।

क्या है पूरा मामला

सेबी के आदेश के अनुसार, आरोपी परिवार के सदस्य पहले एसएमई प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध कम-लिक्विडिटी वाले शेयरों में चुपचाप निवेश कर लेते थे। इसके बाद वे सोशल मीडिया चैनलों के ज़रिए उन्हीं शेयरों की बड़े पैमाने पर सिफारिश करते थे, जिससे कृत्रिम रूप से कीमतें बढ़तीं और वे मुनाफा बटोरते थे। सेबी के आदेश में स्पष्ट कहा गया है: 'इन व्यक्तियों ने पहली नजर में धोखाधड़ी, बाजार में हेरफेर और अनुचित व्यापारिक गतिविधियों में शामिल होकर काम किया। उन्होंने शेयरों की कीमत कृत्रिम रूप से बढ़ाने के इरादे से सिफारिशें जारी कीं और जांच अवधि के दौरान कुल 82 शेयरों में मुनाफा कमाया।'

जांच अवधि में चौंकाने वाले आंकड़े

सेबी ने 1 दिसंबर 2023 से 20 जनवरी 2026 तक की अवधि की जांच की। आंकड़ों के अनुसार, सातों आरोपियों का कुल ग्रॉस ट्रेड वैल्यू जांच से पहले ₹548.62 करोड़ था, जो जांच अवधि में बढ़कर ₹1,023.40 करोड़ हो गया — यानी करीब 86 प्रतिशत की वृद्धि। इसी दौरान इनका कुल स्क्वायर-ऑफ मुनाफा ₹17.06 करोड़ से उछलकर ₹58.40 करोड़ पहुँच गया, जो 242 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।

सबसे बड़े लाभार्थी

सेबी ने रोहन गुप्ता और शेरोन गुप्ता को इस मामले के सबसे बड़े लाभार्थियों में बताया है। नियामक के अनुसार, दोनों ने मिलकर कथित तौर पर करीब ₹50 करोड़ का मुनाफा कमाया।

तलाशी और जब्ती अभियान

बाजार नियामक ने अदालत की अनुमति मिलने के बाद 21 जनवरी से 24 जनवरी 2026 के बीच तलाशी और जब्ती अभियान चलाया। इस दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए और आरोपियों के बयान शपथ के तहत दर्ज किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों को इस बात की जानकारी थी कि सेबी छोटे स्तर के ऑपरेटरों पर भी सख्त कार्रवाई कर रहा है, और उन्हें अपनी पकड़ में आने की आशंका भी थी।

आगे क्या होगा

यह मामला 'पंप-एंड-डंप' रणनीति का एक विस्तृत उदाहरण है, जिसमें सोशल मीडिया को हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया। गौरतलब है कि सेबी हाल के वर्षों में फिनफ्लुएंसर और अनधिकृत सलाहकारों पर अपनी निगरानी लगातार बढ़ा रहा है। अंतरिम आदेश के बाद आरोपियों को आगे की नियामकीय और संभावित कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एसएमई प्लेटफॉर्म पर कम-लिक्विडिटी वाले शेयरों में हेरफेर की यह गति और पैमाना नियामकीय निगरानी की सीमाओं को उजागर करता है। 242 प्रतिशत मुनाफे की वृद्धि यह बताती है कि यह कोई आकस्मिक लाभ नहीं, बल्कि सुनियोजित रणनीति थी। असली सवाल यह है कि क्या अंतरिम आदेश से आगे ठोस दंडात्मक कार्रवाई होगी, या यह भी चेतावनी बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेबी ने इस परिवार पर क्या आरोप लगाए हैं?
सेबी ने एक ही परिवार के 7 सदस्यों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने टेलीग्राम, व्हाट्सएप और एक्स पर शेयर टिप्स फैलाकर बाजार में हेरफेर किया और कथित तौर पर ₹20.25 करोड़ का अवैध मुनाफा कमाया। सेबी के अनुसार उन्होंने 82 शेयरों में यह गतिविधि की।
रोहन गुप्ता और शेरोन गुप्ता कौन हैं?
सेबी ने रोहन गुप्ता और शेरोन गुप्ता को इस मामले के सबसे बड़े लाभार्थी बताया है। नियामक के अनुसार, दोनों ने मिलकर कथित तौर पर करीब ₹50 करोड़ का मुनाफा कमाया।
सेबी ने यह जांच कब और कैसे की?
सेबी ने 1 दिसंबर 2023 से 20 जनवरी 2026 तक की अवधि की जांच की। 21 से 24 जनवरी 2026 के बीच अदालत की अनुमति से तलाशी और जब्ती अभियान चलाया गया, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए और बयान शपथ के तहत दर्ज हुए।
इस मामले में 'पंप-एंड-डंप' रणनीति क्या है?
पंप-एंड-डंप में आरोपी पहले कम-लिक्विडिटी वाले शेयर खरीदते हैं, फिर सोशल मीडिया पर उनकी सिफारिश कर कीमत कृत्रिम रूप से बढ़ाते हैं और ऊँची कीमत पर बेचकर मुनाफा कमाते हैं। इस मामले में एसएमई प्लेटफॉर्म के शेयरों को निशाना बनाया गया।
आरोपियों को आगे किस कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है?
सेबी के अंतरिम प्रवर्तन आदेश के बाद आरोपियों को नियामकीय दंड, संपत्ति जब्ती और संभावित आपराधिक कार्यवाही का सामना हो सकता है। अभी तक अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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