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राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर 5% टूटे, लोअर सर्किट; SEBI का प्रमोटर राजेश मेहता पर शिकंजा

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राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर 5% टूटे, लोअर सर्किट; SEBI का प्रमोटर राजेश मेहता पर शिकंजा

सारांश

सेबी के अंतरिम आदेश ने राजेश एक्सपोर्ट्स को हिला दिया — शेयर 5% लुढ़ककर ₹104.65 पर लोअर सर्किट में। नियामक का दावा है कि कंपनी का 97-99% राजस्व बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया हो सकता है। प्रमोटर राजेश मेहता पर ट्रेडिंग पाबंदी, और LIC की 10% हिस्सेदारी की वजह से उसके शेयर भी 1% तक टूटे।

मुख्य बातें

राजेश एक्सपोर्ट्स का शेयर 4 जून को 4.99% गिरकर ₹104.65 पर लोअर सर्किट में बंद हुआ।
SEBI ने 3 जून के अंतरिम आदेश में कंपनी के 97-99% राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के आरोप लगाए।
प्रमोटर राजेश मेहता को कंपनी के शेयरों में किसी भी लेन-देन से रोका गया।
जाँच की अवधि अप्रैल 2020 से मार्च 2024 तक; BDO इंडिया सर्विसेज थी फॉरेंसिक ऑडिटर।
LIC की 10% हिस्सेदारी के चलते उसका शेयर भी करीब 1% गिरा।
कंपनी को 30 दिनों में सभी जानकारियाँ देनी होंगी; नया फॉरेंसिक ऑडिटर भी नियुक्त होगा।

राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में गुरुवार, 4 जून को 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और स्टॉक लोअर सर्किट पर जा पहुँचा, जब बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने कंपनी और उसके प्रमोटर राजेश मेहता के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किया। नियामक ने कंपनी पर व्यापक वित्तीय अनियमितताओं, जाँच में असहयोग और 97 से 99 प्रतिशत तक राजस्व बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

शेयर बाजार में गिरावट

BSE पर कंपनी का शेयर पिछले बंद भाव ₹110.15 की तुलना में 4.99 प्रतिशत लुढ़ककर ₹104.65 पर खुला और लोअर सर्किट में फँस गया। शेयर का 52-सप्ताह का उच्चतम स्तर ₹239 और न्यूनतम स्तर ₹80.11 रहा है। इस नियामकीय कार्रवाई की आँच भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) तक भी पहुँची, जिसके शेयर कारोबार के दौरान करीब 1 प्रतिशत तक गिर गए — कारण यह कि LIC की राजेश एक्सपोर्ट्स में लगभग 10 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

SEBI के आदेश में क्या है

सेबी ने 3 जून को जारी अंतरिम आदेश में कहा कि प्रारंभिक तौर पर ऐसे साक्ष्य मिले हैं जो दर्शाते हैं कि कंपनी द्वारा दिखाए गए लगभग 97 से 99 प्रतिशत राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया हो सकता है। आदेश में कहा गया, ‘मामले में पहली नजर में जो असामान्यताएँ सामने आई हैं, जिनमें कंपनी के लगभग 97 प्रतिशत से 99 प्रतिशत राजस्व को बढ़ाकर दिखाया गया है, वे बेहद गंभीर और अभूतपूर्व हैं।’

सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वर्ष्णेय ने प्रारंभिक निष्कर्षों को ‘बेहद गंभीर और अभूतपूर्व’ बताते हुए कहा कि निवेशकों की सुरक्षा और बाजार की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए तत्काल नियामकीय हस्तक्षेप आवश्यक था। नियामक ने प्रमोटर राजेश मेहता को कंपनी के शेयरों की खरीद, बिक्री या किसी भी प्रकार के लेन-देन से रोक दिया है।

जाँच का पूरा घटनाक्रम

यह मामला मार्च 2024 में मिली एक शेयरधारक की शिकायत से जुड़ा है, जिसमें कंपनी की पुस्तकों में दिखाए गए बड़े व्यापारिक देयकों पर चिंता जताई गई थी। प्रारंभिक समीक्षा के बाद सेबी ने अप्रैल 2020 से मार्च 2024 की अवधि की जाँच शुरू की और BDO इंडिया सर्विसेज को फॉरेंसिक ऑडिटर नियुक्त किया।

आदेश के अनुसार, कंपनी ने जाँच के दौरान कई बार प्रमुख लेखा प्रणालियों, वित्तीय रिकॉर्ड और जरूरी दस्तावेजों तक पहुँच उपलब्ध नहीं कराई, जिससे फॉरेंसिक ऑडिटर कई लेन-देन की स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सका। केवल कुछ चुनिंदा लेन-देन के दस्तावेज ही उपलब्ध कराए गए, जबकि मूल लेखा आँकड़ों तक पहुँच न मिलने से कई वित्तीय आँकड़ों का सत्यापन प्रभावित हुआ।

विदेशी सहायक कंपनियाँ और फंड ट्रेल

सेबी ने सिंगापुर और स्विट्जरलैंड सहित कई विदेशी सहायक और अप्रत्यक्ष सहायक कंपनियों की वित्तीय रिपोर्टिंग की भी समीक्षा की। नियामक ने आरोप लगाया कि धनराशि को कथित तौर पर ऐसे ढाँचों के माध्यम से भेजा गया हो सकता है, जिनसे उसके वास्तविक स्रोत और अंतिम गंतव्य को छिपाया गया — इससे कंपनी के वित्तीय खुलासों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

आगे क्या होगा

सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स को निर्देश दिया है कि वह जाँचकर्ताओं द्वारा माँगी गई सभी लंबित जानकारियाँ 30 दिनों के भीतर उपलब्ध कराए। साथ ही कंपनी के खातों और लेन-देन की अधिक व्यापक जाँच के लिए एक नए फॉरेंसिक ऑडिटर की नियुक्ति का भी आदेश दिया गया है। कंपनी से वित्तीय विवरणों और संबंधित-पक्ष लेन-देन की ‘सही और निष्पक्ष’ जानकारी देने को कहा गया है। निवेशकों की निगाहें अब अगले फॉरेंसिक ऑडिट और कंपनी की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास के सबसे बड़े अकाउंटिंग घोटालों में गिना जाएगा — सत्यम के स्तर का। चिंताजनक बात यह है कि शिकायत मार्च 2024 की थी, फिर भी अंतरिम आदेश आने में सवा साल लग गया, और इस बीच रिटेल निवेशक शेयर खरीदते-बेचते रहे। LIC जैसी सरकारी संस्था की 10% हिस्सेदारी यह भी सवाल खड़ा करती है कि बड़े संस्थागत निवेशक रेड फ्लैग्स पर इतनी देर से क्यों जागते हैं। असली परीक्षा अब नए फॉरेंसिक ऑडिटर की स्वतंत्रता और सिंगापुर-स्विट्जरलैंड के फंड ट्रेल की पारदर्शी जाँच में है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर में गिरावट क्यों आई?
सेबी ने 3 जून को कंपनी और प्रमोटर राजेश मेहता के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किया, जिसके बाद 4 जून को शेयर 4.99% गिरकर ₹104.65 पर लोअर सर्किट में पहुँच गया। नियामक ने कंपनी पर 97-99% राजस्व बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
SEBI के अंतरिम आदेश में क्या प्रमुख आरोप हैं?
सेबी ने कहा है कि प्रारंभिक साक्ष्यों से संकेत मिलते हैं कि कंपनी के लगभग 97 से 99 प्रतिशत राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया हो सकता है। साथ ही कंपनी पर जाँच में असहयोग करने और विदेशी सहायक कंपनियों के जरिए फंड का स्रोत छिपाने का भी आरोप है।
LIC के शेयरों पर इस कार्रवाई का क्या असर पड़ा?
भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के शेयर कारोबार के दौरान करीब 1 प्रतिशत तक गिर गए, क्योंकि LIC की राजेश एक्सपोर्ट्स में लगभग 10 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यह सरकारी बीमा कंपनी के पोर्टफोलियो पर सीधा असर है।
यह जाँच कब शुरू हुई थी और किस अवधि को कवर करती है?
मामला मार्च 2024 में मिली एक शेयरधारक की शिकायत से शुरू हुआ था। सेबी ने अप्रैल 2020 से मार्च 2024 तक की अवधि की जाँच के लिए BDO इंडिया सर्विसेज को फॉरेंसिक ऑडिटर नियुक्त किया था।
राष्ट्र प्रेस
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