एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट शेयर इश्यू प्राइस ₹574 से नीचे, लिस्टिंग के एक हफ्ते में 1.15% टूटा
सारांश
मुख्य बातें
एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयर 30 जुलाई को अपने इश्यू प्राइस ₹574 से नीचे फिसल गए — लिस्टिंग के महज एक सप्ताह के भीतर यह गिरावट निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गई है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर दोपहर 3 बजे तक यह शेयर 1.15 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ ₹569.10 पर कारोबार कर रहा था।
इंट्राडे उतार-चढ़ाव
गुरुवार के कारोबारी सत्र में एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का शेयर ₹576.05 पर सपाट खुला और शुरुआती कारोबार में ₹579.90 का उच्चतम स्तर छुआ। हालाँकि, बिकवाली का दबाव बढ़ते ही शेयर गिरता चला गया और ₹565.05 का नया न्यूनतम स्तर दर्ज किया — जो इसकी लिस्टिंग के बाद का सबसे निचला स्तर है।
यह गिरावट इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि व्यापक बाज़ार में तेज़ी का माहौल था — सेंसेक्स इस दौरान 219 अंक (0.28 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 77,874 पर और निफ्टी 65 अंक (0.27 प्रतिशत) की तेज़ी के साथ 24,309 पर था।
लिस्टिंग और IPO का प्रदर्शन
एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का शेयर 21 जुलाई को NSE पर 6.85 प्रतिशत के प्रीमियम के साथ ₹613.30 पर सूचीबद्ध हुआ था। लिस्टिंग के दिन शेयर ने ₹624.95 का अब तक का सर्वोच्च स्तर बनाया था। लेकिन उस ऊँचाई से अब तक शेयर करीब 9.6 प्रतिशत नीचे आ चुका है।
14 से 16 जुलाई के बीच खुले इस आईपीओ को बाज़ार से ज़बरदस्त प्रतिक्रिया मिली थी और यह 41.66 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इस पब्लिक इश्यू के ज़रिये कंपनी ने ₹9,812.91 करोड़ जुटाए थे और इसका प्राइस बैंड ₹545–₹574 प्रति शेयर रखा गया था।
कंपनी की पृष्ठभूमि
एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट की स्थापना 1987 में हुई थी और यह भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की सहयोगी कंपनी है। त्रैमासिक औसत एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (QAAUM) के आधार पर यह भारत की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी ₹12.51 लाख करोड़ के म्यूचुअल फंड एसेट्स का प्रबंधन कर रही थी और बाज़ार में उसकी हिस्सेदारी 15.3 प्रतिशत थी।
व्यापक बाज़ार का मिज़ाज
गुरुवार को लार्जकैप शेयरों में तेज़ी देखी गई, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक करीब आधा प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ कारोबार कर रहे थे। यह विभाजन दर्शाता है कि बाज़ार में चयनात्मक खरीदारी हो रही है और छोटे निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, हाल की IPO लिस्टिंग के बाद शुरुआती मुनाफावसूली एक सामान्य प्रवृत्ति है, लेकिन इश्यू प्राइस से नीचे जाना उन निवेशकों के लिए नुकसान की स्थिति बनाता है जिन्होंने ऊपरी प्राइस बैंड पर आवेदन किया था। आने वाले सत्रों में कंपनी के तिमाही नतीजे और व्यापक बाज़ार का रुख शेयर की दिशा तय करेंगे।