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राजेश एक्सपोर्ट्स मामला: SEBI अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे बोले — अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया, आदेश मानें या कानूनी चुनौती दें

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राजेश एक्सपोर्ट्स मामला: SEBI अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे बोले — अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया, आदेश मानें या कानूनी चुनौती दें

सारांश

SEBI अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने राजेश एक्सपोर्ट्स मामले पर मीडिया में टिप्पणी से साफ इनकार किया — यह अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया है, आदेश मानें या चुनौती दें। इस बीच कंपनी का शेयर लगातार लोअर सर्किट पर, और SEBI ने 97-99% राजस्व को कथित तौर पर फर्जी बताया है।

मुख्य बातें

SEBI अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने 8 जून 2026 को मुंबई में राजेश एक्सपोर्ट्स मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी से इनकार किया।
SEBI ने प्रमोटर एवं सीईओ राजेश मेहता को कंपनी के शेयरों में कारोबार से प्रतिबंधित किया; वित्तीय अनियमितता और फंड डायवर्जन के आरोप।
नियामक के अनुसार कंपनी की 97 से 99 प्रतिशत आय कथित तौर पर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गई — इसे 'गंभीर और अभूतपूर्व' बताया गया।
राजेश एक्सपोर्ट्स का शेयर BSE पर 5% गिरकर ₹94.50 के लोअर सर्किट पर बंद हुआ।
SEBI का टोकनाइजेशन पायलट प्रोग्राम पूरा होने में अभी 6 से 9 महीने और लग सकते हैं।
कंपनी ने सभी आरोप खारिज किए; कहा — राजस्व आंकड़े सही, दस्तावेज पक्ष साबित करेंगे।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने 8 जून 2026 को मुंबई में आयोजित इंडिया इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस के दौरान स्पष्ट किया कि राजेश एक्सपोर्ट्स के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई एक अर्ध-न्यायिक (क्वासी-ज्यूडिशियल) प्रक्रिया का हिस्सा है और इस पर सार्वजनिक टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जारी किए गए आदेश का या तो पालन किया जाए या कानून में निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे चुनौती दी जाए।

SEBI अध्यक्ष का स्पष्ट रुख

पत्रकारों से बातचीत में पांडे ने कहा, 'सिद्धांत के तौर पर हम मीडिया में किसी व्यक्तिगत मामले पर टिप्पणी नहीं करते। यह एक अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया है, जिसमें आदेश जारी किए जाते हैं और उनका पालन किया जाना चाहिए या फिर कानून में निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्हें चुनौती दी जा सकती है। इसलिए मैं इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।' यह बयान ऐसे समय आया है जब SEBI ने हाल ही में राजेश एक्सपोर्ट्स के प्रमोटर एवं सीईओ राजेश मेहता को कंपनी के शेयरों में कारोबार करने से प्रतिबंधित कर दिया है।

SEBI के आरोप और अंतरिम आदेश

नियामक के अंतरिम आदेश में राजेश मेहता पर वित्तीय अनियमितताओं, फंड डायवर्जन और संबंधित पक्षों के साथ हुए लेनदेन में पर्याप्त जानकारी न देने के आरोप लगाए गए हैं। SEBI की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कंपनी से जुड़े फंड्स को व्यक्तिगत खातों और संबंधित संस्थाओं के जरिए कथित तौर पर घुमाया गया। नियामक के अनुसार, कंपनी की लगभग 97 से 99 प्रतिशत आय (रेवेन्यू) बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गई प्रतीत होती है — जिसे SEBI ने 'गंभीर और अभूतपूर्व' करार दिया है।

ऑडिटरों पर भी सवाल

SEBI ने यह भी आरोप लगाया है कि कंपनी के वैधानिक ऑडिटरों ने जांच में पूरा सहयोग नहीं किया। आश्वासन देने के बावजूद ऑडिट से जुड़े कार्यपत्र (वर्किंग पेपर्स) उपलब्ध नहीं कराए गए। नियामक का कहना है कि लगातार सहयोग न करना इस बात का संकेत हो सकता है कि महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने और जांच में बाधा डालने की कोशिश की गई। कंपनी को कई बार सही वित्तीय विवरण और फंड्स के अंतिम उपयोग की जानकारी देने का अवसर दिया गया, लेकिन जवाब संतोषजनक नहीं रहे।

शेयर बाज़ार पर असर

SEBI की कार्रवाई के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों पर भारी दबाव बना हुआ है। सोमवार, 8 जून को कंपनी का शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर 5 प्रतिशत गिरकर लोअर सर्किट और दिन के निचले स्तर ₹94.50 पर बंद हुआ। इससे पहले पिछले सप्ताह भी अंतरिम आदेश के बाद कंपनी का शेयर लगातार दो कारोबारी सत्रों में लोअर सर्किट पर बंद हुआ था।

कंपनी का पक्ष

राजेश एक्सपोर्ट्स ने SEBI के सभी आरोपों को खारिज किया है। स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में कंपनी ने कहा कि उसके राजस्व के आंकड़े सही हैं और किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता नहीं हुई है। कंपनी ने यह भी कहा कि नियामक के साथ संचार में कुछ गलतफहमी हो सकती है और प्रमाणित दस्तावेज उसके पक्ष को सही साबित करेंगे। गौरतलब है कि इस मामले में SEBI की अंतिम सुनवाई और आगे की कार्रवाई अभी बाकी है।

टोकनाइजेशन पर भी बोले SEBI प्रमुख

इस कॉन्फ्रेंस में पांडे ने बॉन्ड ब्रोकरों के लिए आने वाले नियमों और SEBI के टोकनाइजेशन पायलट प्रोग्राम पर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह पायलट कार्यक्रम पूरा होने में अभी 6 से 9 महीने और लग सकते हैं। यह बाज़ार अवसंरचना के डिजिटलीकरण की दिशा में नियामक के दीर्घकालिक प्रयासों का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस बड़े सवाल को नहीं ढकता कि एक सूचीबद्ध कंपनी की 97-99% आय कथित तौर पर फर्जी कैसे रह सकती है — और वैधानिक ऑडिटर इतने समय तक इसे नज़रअंदाज़ कैसे करते रहे। यह मामला केवल राजेश एक्सपोर्ट्स तक सीमित नहीं है; यह भारतीय बाज़ार में कॉर्पोरेट गवर्नेंस और ऑडिट जवाबदेही की व्यापक खामियों की ओर इशारा करता है। आलोचकों का कहना है कि SEBI की अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया की आड़ में जन-निवेशकों को सूचित रखने की जिम्मेदारी कमज़ोर पड़ जाती है। जब तक अंतिम आदेश नहीं आता, खुदरा निवेशकों के लिए शेयर में लगातार लोअर सर्किट ही एकमात्र संकेत बना हुआ है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजेश एक्सपोर्ट्स के खिलाफ SEBI की कार्रवाई क्या है?
SEBI ने राजेश एक्सपोर्ट्स के प्रमोटर एवं सीईओ राजेश मेहता को कंपनी के शेयरों में कारोबार से अगले आदेश तक प्रतिबंधित कर दिया है। नियामक ने वित्तीय अनियमितताओं, फंड डायवर्जन और संबंधित पक्षों के साथ लेनदेन में पर्याप्त जानकारी न देने के आरोप लगाए हैं।
SEBI अध्यक्ष ने राजेश एक्सपोर्ट्स पर टिप्पणी क्यों नहीं की?
SEBI अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने कहा कि यह मामला एक अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है और नियामक व्यक्तिगत मामलों पर मीडिया में टिप्पणी नहीं करता। उनके अनुसार, आदेश का या तो पालन किया जाए या कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे चुनौती दी जाए।
राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर पर क्या असर पड़ा है?
SEBI के अंतरिम आदेश के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स का शेयर BSE पर 5% गिरकर ₹94.50 के लोअर सर्किट पर बंद हुआ। पिछले सप्ताह भी शेयर लगातार दो कारोबारी सत्रों में लोअर सर्किट पर बंद हुआ था।
SEBI ने राजेश एक्सपोर्ट्स की आय पर क्या कहा है?
SEBI की अंतरिम जांच के अनुसार कंपनी की लगभग 97 से 99 प्रतिशत आय बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गई प्रतीत होती है। नियामक ने इन कथित अनियमितताओं को 'गंभीर और अभूतपूर्व' करार दिया है।
राजेश एक्सपोर्ट्स ने SEBI के आरोपों पर क्या कहा है?
कंपनी ने SEBI के सभी आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि राजस्व के आंकड़े सही हैं। कंपनी का कहना है कि नियामक के साथ संचार में कुछ गलतफहमी हो सकती है और प्रमाणित दस्तावेज उसके पक्ष को सही साबित करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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