10 अगस्त 2026
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राजेश एक्सपोर्ट्स पर ईडी का फेमा उल्लंघन का आरोप, NSE पर शेयर 5% गिरकर ₹97.02 पर

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राजेश एक्सपोर्ट्स पर ईडी का फेमा उल्लंघन का आरोप, NSE पर शेयर 5% गिरकर ₹97.02 पर

सारांश

ईडी ने राजेश एक्सपोर्ट्स पर फेमा उल्लंघन का आरोप लगाया और बेंगलुरु-मुंबई में नौ ठिकानों पर छापे मारे। गोल्ड स्टॉक 40% कम मिला, CFO को 2020 से वेतन नहीं। सेबी पहले ही ₹15.15 लाख करोड़ की आय गलत दर्शाने और ₹12,726 करोड़ के शेयरधारक नुकसान का आरोप लगा चुकी है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राजेश एक्सपोर्ट्स पर फेमा (FEMA) उल्लंघन का आरोप लगाया और बेंगलुरु व मुंबई में 9 ठिकानों पर छापे मारे।
कंपनी का शेयर NSE पर 5% गिरकर ₹97.02 पर बंद हुआ — लोअर सर्किट ट्रिगर।
ईडी को खातों में दर्ज इन्वेंट्री की तुलना में वास्तविक गोल्ड स्टॉक लगभग 40% कम मिला।
कंपनी के CFO को 2020 से कोई वेतन नहीं; MD को मात्र ₹17,000 प्रति माह ।
सेबी के अनुसार कंपनी ने FY21–FY25 के बीच ₹15.15 लाख करोड़ की आय गलत तरीके से प्रस्तुत की।
सेबी ने प्रमोटर मेहता पर शेयरधारकों को ₹12,726 करोड़ का नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 25 जून 2025 को सोने की प्रमुख कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स पर फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) के उल्लंघन का आरोप लगाया, जिसके बाद कंपनी के शेयर में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर 5 प्रतिशत का लोअर सर्किट लग गया और भाव फिसलकर ₹97.02 पर आ गया। यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब कंपनी पहले से ही भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की जाँच के घेरे में है।

ईडी की जाँच में क्या मिला

ईडी के बयान के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स ने सामान्य व्यावसायिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया और आयात, निर्यात, विदेशी निवेश तथा विदेशी व्यापार से जुड़े आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रही। एजेंसी ने बेंगलुरु और मुंबई में कंपनी के कुल नौ ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।

छापेमारी के बाद ईडी ने कहा कि सहायक अभिलेखों के अभाव में कई क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन को सत्यापित करना संभव नहीं हो सका। इसके अतिरिक्त, कंपनी के खातों में दर्ज इन्वेंट्री की तुलना में वास्तविक गोल्ड स्टॉक लगभग 40 प्रतिशत कम पाया गया — जो एक गंभीर विसंगति है।

वेतन विसंगतियाँ भी उजागर

ईडी की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों को दिया जा रहा वेतन उनके दायित्वों से मेल नहीं खाता। कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी (CFO) को 2020 से कोई वेतन नहीं मिला है, जबकि मैनेजिंग डायरेक्टर को मात्र ₹17,000 प्रति माह का वेतन दिया जा रहा है। जाँचकर्ताओं के अनुसार यह असामान्य वेतन संरचना वित्तीय अनियमितताओं की ओर संकेत करती है।

सेबी के आरोप और वित्तीय कुप्रबंधन

सेबी के अंतरिम आदेश के अनुसार, कंपनी ने वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2025 के बीच अपनी विदेशी सहायक कंपनियों के माध्यम से लगभग ₹15.15 लाख करोड़ की आय को गलत तरीके से प्रस्तुत किया। इन विदेशी सहायक कंपनियों के वित्तीय विवरण पर कोई सार्वजनिक प्रकटीकरण नहीं किया गया था।

सेबी ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी के प्रमोटर मेहता ने कंपनी की धनराशि अपने निजी खातों में स्थानांतरित की, जिससे शेयरधारकों को करीब ₹12,726 करोड़ का नुकसान हुआ। गौरतलब है कि सेबी ने यह भी पाया कि कंपनी ने बार-बार महत्वपूर्ण अकाउंटिंग सिस्टम, वित्तीय रिकॉर्ड और सहायक दस्तावेजों तक पहुँच देने से इनकार किया, जिससे फोरेंसिक ऑडिटर्स रिपोर्ट किए गए लेन-देन का स्वतंत्र रूप से सत्यापन नहीं कर सके।

बाज़ार पर असर

ईडी की कार्रवाई की खबर आते ही बाज़ार में राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर पर तत्काल दबाव बना और NSE पर 5% का लोअर सर्किट ट्रिगर हो गया। यह ऐसे समय में आया है जब कंपनी के शेयर पहले से ही सेबी जाँच की वजह से दबाव में थे। निवेशकों की धारणा बुरी तरह प्रभावित हुई है।

आगे क्या होगा

ईडी की जाँच अभी जारी है और फेमा उल्लंघन के आरोपों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। सेबी का अंतरिम आदेश भी प्रभावी है। बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार जब तक दोनों नियामक एजेंसियों की जाँच में स्पष्टता नहीं आती, कंपनी के शेयर पर दबाव बना रह सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजेश एक्सपोर्ट्स पर ईडी ने क्या आरोप लगाए हैं?
ईडी ने राजेश एक्सपोर्ट्स पर फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) के उल्लंघन का आरोप लगाया है। एजेंसी के अनुसार कंपनी आयात, निर्यात, विदेशी निवेश और विदेशी व्यापार से जुड़े आवश्यक दस्तावेज पेश करने में नाकाम रही और कई क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन सत्यापित नहीं हो सके।
राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर में लोअर सर्किट क्यों लगा?
25 जून 2025 को ईडी की फेमा उल्लंघन की कार्रवाई की खबर के बाद निवेशकों में बिकवाली का दबाव बना और NSE पर शेयर 5% गिरकर ₹97.02 पर आ गया, जिससे लोअर सर्किट ट्रिगर हो गया। कंपनी पहले से ही सेबी की जाँच के कारण दबाव में थी।
सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स पर क्या आरोप लगाए हैं?
सेबी के अंतरिम आदेश के अनुसार, कंपनी ने FY21 से FY25 के बीच विदेशी सहायक कंपनियों के माध्यम से लगभग ₹15.15 लाख करोड़ की आय गलत तरीके से प्रस्तुत की। सेबी ने प्रमोटर मेहता पर कंपनी की धनराशि निजी खातों में स्थानांतरित कर शेयरधारकों को ₹12,726 करोड़ का नुकसान पहुँचाने का भी आरोप लगाया है।
ईडी की छापेमारी में क्या-क्या मिला?
बेंगलुरु और मुंबई में कुल नौ ठिकानों पर छापेमारी के दौरान ईडी को खातों में दर्ज इन्वेंट्री की तुलना में वास्तविक गोल्ड स्टॉक लगभग 40% कम मिला। इसके अलावा CFO को 2020 से कोई वेतन नहीं मिला और MD को मात्र ₹17,000 प्रति माह वेतन दिया जा रहा है।
राजेश एक्सपोर्ट्स मामले में आगे क्या होगा?
ईडी की जाँच अभी जारी है और फेमा उल्लंघन साबित होने पर कंपनी व उसके अधिकारियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई हो सकती है। सेबी का अंतरिम आदेश भी प्रभावी है और दोनों एजेंसियों की जाँच में स्पष्टता आने तक कंपनी के शेयर पर दबाव बना रहने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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