राजेश एक्सपोर्ट्स पर ईडी का फेमा उल्लंघन का आरोप, NSE पर शेयर 5% गिरकर ₹97.02 पर
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 25 जून 2025 को सोने की प्रमुख कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स पर फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) के उल्लंघन का आरोप लगाया, जिसके बाद कंपनी के शेयर में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर 5 प्रतिशत का लोअर सर्किट लग गया और भाव फिसलकर ₹97.02 पर आ गया। यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब कंपनी पहले से ही भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की जाँच के घेरे में है।
ईडी की जाँच में क्या मिला
ईडी के बयान के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स ने सामान्य व्यावसायिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया और आयात, निर्यात, विदेशी निवेश तथा विदेशी व्यापार से जुड़े आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रही। एजेंसी ने बेंगलुरु और मुंबई में कंपनी के कुल नौ ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।
छापेमारी के बाद ईडी ने कहा कि सहायक अभिलेखों के अभाव में कई क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन को सत्यापित करना संभव नहीं हो सका। इसके अतिरिक्त, कंपनी के खातों में दर्ज इन्वेंट्री की तुलना में वास्तविक गोल्ड स्टॉक लगभग 40 प्रतिशत कम पाया गया — जो एक गंभीर विसंगति है।
वेतन विसंगतियाँ भी उजागर
ईडी की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों को दिया जा रहा वेतन उनके दायित्वों से मेल नहीं खाता। कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी (CFO) को 2020 से कोई वेतन नहीं मिला है, जबकि मैनेजिंग डायरेक्टर को मात्र ₹17,000 प्रति माह का वेतन दिया जा रहा है। जाँचकर्ताओं के अनुसार यह असामान्य वेतन संरचना वित्तीय अनियमितताओं की ओर संकेत करती है।
सेबी के आरोप और वित्तीय कुप्रबंधन
सेबी के अंतरिम आदेश के अनुसार, कंपनी ने वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2025 के बीच अपनी विदेशी सहायक कंपनियों के माध्यम से लगभग ₹15.15 लाख करोड़ की आय को गलत तरीके से प्रस्तुत किया। इन विदेशी सहायक कंपनियों के वित्तीय विवरण पर कोई सार्वजनिक प्रकटीकरण नहीं किया गया था।
सेबी ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी के प्रमोटर मेहता ने कंपनी की धनराशि अपने निजी खातों में स्थानांतरित की, जिससे शेयरधारकों को करीब ₹12,726 करोड़ का नुकसान हुआ। गौरतलब है कि सेबी ने यह भी पाया कि कंपनी ने बार-बार महत्वपूर्ण अकाउंटिंग सिस्टम, वित्तीय रिकॉर्ड और सहायक दस्तावेजों तक पहुँच देने से इनकार किया, जिससे फोरेंसिक ऑडिटर्स रिपोर्ट किए गए लेन-देन का स्वतंत्र रूप से सत्यापन नहीं कर सके।
बाज़ार पर असर
ईडी की कार्रवाई की खबर आते ही बाज़ार में राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर पर तत्काल दबाव बना और NSE पर 5% का लोअर सर्किट ट्रिगर हो गया। यह ऐसे समय में आया है जब कंपनी के शेयर पहले से ही सेबी जाँच की वजह से दबाव में थे। निवेशकों की धारणा बुरी तरह प्रभावित हुई है।
आगे क्या होगा
ईडी की जाँच अभी जारी है और फेमा उल्लंघन के आरोपों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। सेबी का अंतरिम आदेश भी प्रभावी है। बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार जब तक दोनों नियामक एजेंसियों की जाँच में स्पष्टता नहीं आती, कंपनी के शेयर पर दबाव बना रह सकता है।