9 अगस्त 2026
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राजेश एक्सपोर्ट्स पर ईडी की छापेमारी: बेंगलुरु-मुंबई में 9 ठिकाने खंगाले, ₹3,000 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन की जांच

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राजेश एक्सपोर्ट्स पर ईडी की छापेमारी: बेंगलुरु-मुंबई में 9 ठिकाने खंगाले, ₹3,000 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन की जांच

सारांश

ईडी की यह कार्रवाई सिर्फ एक छापेमारी नहीं — ₹7.7 लाख करोड़ के राजस्व वाली कंपनी के एमडी को ₹17,000 मासिक वेतन, सीएफओ को 2020 से शून्य वेतन, और ₹1,035 करोड़ के अफ्रीकी निवेश के गायब दस्तावेज। यह कॉर्पोरेट पारदर्शिता पर गहरा सवाल है।

मुख्य बातें

ईडी ने 24 जून 2025 को राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के बेंगलुरु और मुंबई में 9 परिसरों पर तलाशी और जब्ती अभियान चलाया।
जांच फेमा के कथित उल्लंघन से जुड़ी है; ₹3,000 करोड़ के संदिग्ध विदेशी लेनदेन की जांच हो रही है।
अफ्रीकी खदानों में ₹1,035 करोड़ के निवेश से जुड़े दस्तावेज न तलाशी में मिले, न कंपनी ने उपलब्ध कराए।
स्टॉक रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में लगभग 40% का अंतर पाया गया।
सीएफओ को 2020 से कोई वेतन नहीं; एमडी को केवल ₹17,000 प्रति माह — जबकि कंपनी का समेकित राजस्व ₹7.7 लाख करोड़ ।
कथित तौर पर 'एनआरआई बेनामीदारों' के जरिए शेयर हेरफेर से ₹600 करोड़ से अधिक विदेश भेजे जाने की आशंका।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (आरईएल) और उससे जुड़े व्यक्तियों के विरुद्ध विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के कथित उल्लंघन की जांच के तहत बेंगलुरु और मुंबई में कंपनी के 9 परिसरों पर तलाशी और जब्ती अभियान चलाया। मंगलवार, 24 जून 2025 से शुरू हुई इस कार्रवाई की जानकारी ईडी ने एक आधिकारिक बयान में दी। जांच में कथित तौर पर ₹3,000 करोड़ से अधिक के संदिग्ध विदेशी लेनदेन, स्टॉक में हेरफेर और अघोषित विदेशी संपत्तियों के सुराग मिले हैं।

मुख्य घटनाक्रम

ईडी के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड अपने विदेशी लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड जांच एजेंसी को उपलब्ध कराने में विफल रही है। कंपनी ने आयात, निर्यात, विदेशी निवेश और विदेशी व्यापार से संबंधित बकाया भुगतान एवं प्राप्तियों के निपटान के दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए, जिसके कारण इन लेनदेन की प्रामाणिकता की जांच करना कथित तौर पर अत्यंत कठिन हो गया है।

जांच एजेंसी ने बताया कि कंपनी द्वारा अफ्रीकी खदानों में किए गए ₹1,035 करोड़ के निवेश से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड न तो तलाशी के दौरान मिले और न ही कंपनी उन्हें अब तक उपलब्ध करा सकी है।

संदिग्ध विदेशी लेनदेन और स्टॉक विसंगति

ईडी के अनुसार, कंपनी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और अन्य विदेशी क्षेत्रों में स्थित संदिग्ध कंपनियों के साथ व्यापारिक देनदारियों और प्राप्तियों का समायोजन (सेट-ऑफ) करती रही। इन लेनदेन में शामिल राशि कथित तौर पर लगभग ₹3,000 करोड़ है और इसकी विस्तृत जांच की जा रही है।

तलाशी के दौरान किए गए भौतिक सत्यापन में कंपनी के फैक्ट्री रजिस्टर में दर्ज स्टॉक और मौके पर उपलब्ध वास्तविक स्टॉक के बीच लगभग 40 प्रतिशत का अंतर पाया गया — जो जांचकर्ताओं के लिए एक बड़ा संकेत है।

वेतन विसंगति और वित्तीय अनियमितताएं

जांच में कंपनी के प्रमुख व्यावसायिक संकेतकों में भी असामान्यताएं उजागर हुई हैं। ईडी के अनुसार, कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) को वर्ष 2020 से कोई वेतन नहीं मिला है, जबकि प्रबंध निदेशक (एमडी) को केवल लगभग ₹17,000 प्रति माह वेतन दिया जा रहा था। यह स्थिति तब है जब कंपनी ने लगभग ₹7.7 लाख करोड़ के समेकित राजस्व की रिपोर्ट दी है।

आलोचकों का कहना है कि इतने विशाल राजस्व वाली कंपनी के शीर्ष प्रबंधन को इतना कम वेतन मिलना वित्तीय रिपोर्टिंग की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

शेयर हेरफेर और आईसीआईजे लीक का संदर्भ

जांच में कंपनी के शेयरों में कुछ व्यक्तियों द्वारा किए गए संदिग्ध ब्लॉक ट्रेड भी सामने आए हैं। ईडी ने बताया कि इन व्यक्तियों के नाम इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) द्वारा जारी लीक में भी शामिल हैं, जिससे संभावित अघोषित विदेशी संपत्तियों (ऑफशोर लिंक) की आशंका पैदा हुई है। इसके अलावा, कथित तौर पर 'एनआरआई बेनामीदारों' का उपयोग कर शेयरों में हेरफेर के जरिए ₹600 करोड़ से अधिक की राशि भारत से बाहर भेजे जाने की बात भी जांच में उभरी है।

आगे की जांच

ईडी ने बताया कि तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए गए हैं, जिनकी विस्तृत जांच जारी है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब नियामक एजेंसियां बड़े कॉर्पोरेट समूहों के विदेशी लेनदेन पर नजर कड़ी कर रही हैं। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 मासिक एमडी वेतन का विरोधाभास अपने आप में एक गंभीर संकेत है। ₹1,035 करोड़ के अफ्रीकी खदान निवेश के दस्तावेजों का गायब होना और आईसीआईजे लीक से जुड़े नाम यह दर्शाते हैं कि यह जांच सिर्फ तकनीकी फेमा उल्लंघन तक सीमित नहीं रह सकती। असली परीक्षा यह है कि ईडी जब्त डिजिटल साक्ष्यों को अभियोजन योग्य मामले में कितनी तेजी से बदल पाती है, क्योंकि भारत में बड़े कॉर्पोरेट मामले अक्सर जांच के चक्रव्यूह में वर्षों तक उलझे रहते हैं।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने राजेश एक्सपोर्ट्स पर छापेमारी क्यों की?
ईडी ने फेमा (विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम) के कथित उल्लंघन की जांच के तहत यह कार्रवाई की। कंपनी पर आरोप है कि उसने विदेशी लेनदेन के दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए और यूएई सहित अन्य देशों की संदिग्ध कंपनियों के साथ लगभग ₹3,000 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन किए।
राजेश एक्सपोर्ट्स के खिलाफ क्या-क्या आरोप हैं?
ईडी के अनुसार, कंपनी पर अफ्रीकी खदानों में ₹1,035 करोड़ के निवेश के दस्तावेज न देने, स्टॉक रिकॉर्ड में 40% की विसंगति, यूएई की संदिग्ध कंपनियों से सेट-ऑफ लेनदेन और 'एनआरआई बेनामीदारों' के जरिए ₹600 करोड़ से अधिक विदेश भेजने के आरोप हैं। ये सभी आरोप कथित हैं और जांच जारी है।
राजेश एक्सपोर्ट्स के सीएफओ और एमडी के वेतन को लेकर क्या विसंगति मिली?
ईडी के अनुसार, कंपनी के सीएफओ को वर्ष 2020 से कोई वेतन नहीं मिला है और एमडी को केवल लगभग ₹17,000 प्रति माह वेतन दिया जा रहा था। यह तब है जब कंपनी ने लगभग ₹7.7 लाख करोड़ के समेकित राजस्व की रिपोर्ट दी है, जो जांचकर्ताओं के लिए एक बड़ी विसंगति है।
आईसीआईजे लीक का इस मामले से क्या संबंध है?
ईडी ने बताया कि कंपनी के शेयरों में संदिग्ध ब्लॉक ट्रेड करने वाले कुछ व्यक्तियों के नाम इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) की लीक सूची में भी शामिल हैं। इससे संभावित अघोषित विदेशी संपत्तियों की आशंका पैदा हुई है, जिसकी जांच जारी है।
राजेश एक्सपोर्ट्स मामले में आगे क्या होगा?
ईडी ने जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है और मामले में आगे की कार्रवाई जारी है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर फेमा के तहत कार्रवाई और संभावित संपत्ति कुर्की की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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