राजेश एक्सपोर्ट्स पर ईडी की छापेमारी: बेंगलुरु-मुंबई में 9 ठिकाने खंगाले, ₹3,000 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन की जांच
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (आरईएल) और उससे जुड़े व्यक्तियों के विरुद्ध विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के कथित उल्लंघन की जांच के तहत बेंगलुरु और मुंबई में कंपनी के 9 परिसरों पर तलाशी और जब्ती अभियान चलाया। मंगलवार, 24 जून 2025 से शुरू हुई इस कार्रवाई की जानकारी ईडी ने एक आधिकारिक बयान में दी। जांच में कथित तौर पर ₹3,000 करोड़ से अधिक के संदिग्ध विदेशी लेनदेन, स्टॉक में हेरफेर और अघोषित विदेशी संपत्तियों के सुराग मिले हैं।
मुख्य घटनाक्रम
ईडी के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड अपने विदेशी लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड जांच एजेंसी को उपलब्ध कराने में विफल रही है। कंपनी ने आयात, निर्यात, विदेशी निवेश और विदेशी व्यापार से संबंधित बकाया भुगतान एवं प्राप्तियों के निपटान के दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए, जिसके कारण इन लेनदेन की प्रामाणिकता की जांच करना कथित तौर पर अत्यंत कठिन हो गया है।
जांच एजेंसी ने बताया कि कंपनी द्वारा अफ्रीकी खदानों में किए गए ₹1,035 करोड़ के निवेश से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड न तो तलाशी के दौरान मिले और न ही कंपनी उन्हें अब तक उपलब्ध करा सकी है।
संदिग्ध विदेशी लेनदेन और स्टॉक विसंगति
ईडी के अनुसार, कंपनी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और अन्य विदेशी क्षेत्रों में स्थित संदिग्ध कंपनियों के साथ व्यापारिक देनदारियों और प्राप्तियों का समायोजन (सेट-ऑफ) करती रही। इन लेनदेन में शामिल राशि कथित तौर पर लगभग ₹3,000 करोड़ है और इसकी विस्तृत जांच की जा रही है।
तलाशी के दौरान किए गए भौतिक सत्यापन में कंपनी के फैक्ट्री रजिस्टर में दर्ज स्टॉक और मौके पर उपलब्ध वास्तविक स्टॉक के बीच लगभग 40 प्रतिशत का अंतर पाया गया — जो जांचकर्ताओं के लिए एक बड़ा संकेत है।
वेतन विसंगति और वित्तीय अनियमितताएं
जांच में कंपनी के प्रमुख व्यावसायिक संकेतकों में भी असामान्यताएं उजागर हुई हैं। ईडी के अनुसार, कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) को वर्ष 2020 से कोई वेतन नहीं मिला है, जबकि प्रबंध निदेशक (एमडी) को केवल लगभग ₹17,000 प्रति माह वेतन दिया जा रहा था। यह स्थिति तब है जब कंपनी ने लगभग ₹7.7 लाख करोड़ के समेकित राजस्व की रिपोर्ट दी है।
आलोचकों का कहना है कि इतने विशाल राजस्व वाली कंपनी के शीर्ष प्रबंधन को इतना कम वेतन मिलना वित्तीय रिपोर्टिंग की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
शेयर हेरफेर और आईसीआईजे लीक का संदर्भ
जांच में कंपनी के शेयरों में कुछ व्यक्तियों द्वारा किए गए संदिग्ध ब्लॉक ट्रेड भी सामने आए हैं। ईडी ने बताया कि इन व्यक्तियों के नाम इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) द्वारा जारी लीक में भी शामिल हैं, जिससे संभावित अघोषित विदेशी संपत्तियों (ऑफशोर लिंक) की आशंका पैदा हुई है। इसके अलावा, कथित तौर पर 'एनआरआई बेनामीदारों' का उपयोग कर शेयरों में हेरफेर के जरिए ₹600 करोड़ से अधिक की राशि भारत से बाहर भेजे जाने की बात भी जांच में उभरी है।
आगे की जांच
ईडी ने बताया कि तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए गए हैं, जिनकी विस्तृत जांच जारी है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब नियामक एजेंसियां बड़े कॉर्पोरेट समूहों के विदेशी लेनदेन पर नजर कड़ी कर रही हैं। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।