23 सितंबर 2026
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ईडी की बड़ी कार्रवाई: मनी लॉन्ड्रिंग और फेमा उल्लंघन में कोलकाता, दिल्ली, बेंगलुरु में 16 जगह छापेमारी

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ईडी की बड़ी कार्रवाई: मनी लॉन्ड्रिंग और फेमा उल्लंघन में कोलकाता, दिल्ली, बेंगलुरु में 16 जगह छापेमारी

सारांश

प्रवर्तन निदेशालय ने एक ही दिन तीन बड़े शहरों — कोलकाता, दिल्ली और बेंगलुरु — में 16 ठिकानों पर एक साथ छापा मारा। मामला MBECL के कथित अवैध अधिग्रहण, फेमा उल्लंघन और करोड़ों की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, जिसमें IBC की धारा 29ए के तहत अयोग्य लोगों की कथित संलिप्तता की भी जाँच हो रही है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 23 सितंबर 2026 को कोलकाता, दिल्ली और बेंगलुरु में एक साथ 16 ठिकानों पर छापेमारी की।
मामला मैकनली भारत इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड (MBECL) के अधिग्रहण में कथित मनी लॉन्ड्रिंग और फेमा उल्लंघन से जुड़ा है।
कोलकाता में बालीगंज और न्यू अलीपुर स्थित कॉर्पोरेट डायरेक्टरों के आवासों पर तलाशी ली गई।
जाँच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या IBC, 2016 की धारा 29ए के तहत अयोग्य व्यक्तियों ने इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर कंपनी पर फिर से नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की।
ईडी अधिकारी बैंक खाते, कॉर्पोरेट रिकॉर्ड और विदेशी मुद्रा लेनदेन से जुड़े दस्तावेज़ खंगाल रहे हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार, 23 सितंबर 2026 को कोलकाता, दिल्ली और बेंगलुरु में एक साथ 16 ठिकानों पर छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई कथित मनी लॉन्ड्रिंग, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के कथित उल्लंघन और एक कॉर्पोरेट कंपनी के अधिग्रहण से जुड़े करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले की जाँच के तहत की गई।

कोलकाता में कहाँ-कहाँ हुई तलाशी

सूत्रों के मुताबिक, कोलकाता में दक्षिण कोलकाता के बालीगंज और न्यू अलीपुर स्थित दो कॉर्पोरेट कंपनियों के डायरेक्टरों के आवासों समेत कुल दो ठिकानों पर तलाशी ली गई। ईडी अधिकारी इन स्थानों पर बैंक खातों के दस्तावेज़ और कॉर्पोरेट रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं।

मामले की जड़ — MBECL अधिग्रहण और फेमा उल्लंघन

सूत्रों के अनुसार, यह तलाशी अभियान मैकनली भारत इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड (MBECL) के नियंत्रण को हथियाने में इस्तेमाल किए गए फंड की आवाजाही में कथित गड़बड़ियों और फेमा के कथित उल्लंघन से जुड़ा है। जिन ठिकानों पर छापा पड़ा, उनका संबंध कथित तौर पर MBECL और उसके अधिग्रहण की प्रक्रिया से जुड़ी कई निजी कंपनियों तथा व्यक्तियों से है।

गौरतलब है कि एजेंसी इस बात की भी जाँच कर रही है कि क्या इनसॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रक्रिया का दुरुपयोग कर उन लोगों द्वारा कंपनी पर अप्रत्यक्ष रूप से फिर से नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की गई, जो इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 की धारा 29ए के तहत इसके लिए अयोग्य हो सकते हैं।

तीन शहरों में एक साथ अभियान

कोलकाता के अलावा दिल्ली और बेंगलुरु में भी ईडी की अलग-अलग टीमें समानांतर रूप से छापेमारी और तलाशी अभियान चला रही हैं। कुल मिलाकर केंद्रीय एजेंसी के अधिकारी तीनों शहरों में 16 ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई कर रहे हैं, जो इस जाँच की व्यापकता को दर्शाता है।

आरोपों की गंभीरता

सूत्रों के मुताबिक, मामले में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी, विदेशी मुद्रा लेनदेन के नाम पर कथित धोखाधड़ी और भारी मात्रा में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। ईडी के अनुसार, इन्हीं सूचनाओं के आधार पर बहु-शहरी तलाशी अभियान शुरू किया गया।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब ईडी ने हाल के महीनों में कॉर्पोरेट अधिग्रहण से जुड़े कई मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में शिकंजा कसा है। छापेमारी के बाद एजेंसी कथित आरोपियों को समन जारी करने और गिरफ़्तारी या संपत्ति कुर्की की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। फ़िलहाल ईडी की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि लक्षित कार्रवाई है। MBECL जैसी कंपनी के इनसॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन में धारा 29ए की कथित अवहेलना, अगर साबित हुई, तो यह IBC की बुनियादी मंशा पर ही सवाल खड़े करेगी। यह मामला उस बड़े प्रवृत्ति की एक कड़ी है जहाँ अयोग्य प्रमोटर कानूनी खामियों का फायदा उठाकर अपनी ही डूबी कंपनियों पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश करते हैं। कॉर्पोरेट दिवाला सुधार की विश्वसनीयता की असली परीक्षा यह होगी कि ईडी की जाँच कितनी दूर तक जाती है और क्या अभियोजन तक पहुँचती है।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने कोलकाता, दिल्ली और बेंगलुरु में छापेमारी क्यों की?
प्रवर्तन निदेशालय ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग, फेमा उल्लंघन और MBECL के अधिग्रहण में इस्तेमाल हुए फंड की गड़बड़ियों की जाँच के तहत यह कार्रवाई की। एजेंसी के मुताबिक, इन तीनों शहरों में कुल 16 ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली गई।
MBECL क्या है और इस मामले से इसका क्या संबंध है?
MBECL यानी मैकनली भारत इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड एक कॉर्पोरेट कंपनी है जिसके अधिग्रहण की प्रक्रिया में कथित वित्तीय गड़बड़ियाँ सामने आई हैं। ईडी की जाँच का केंद्र यह है कि इस कंपनी का नियंत्रण हासिल करने के लिए किस तरह के फंड का इस्तेमाल किया गया और क्या उस प्रक्रिया में फेमा का उल्लंघन हुआ।
IBC की धारा 29ए इस मामले में क्यों महत्वपूर्ण है?
इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 की धारा 29ए उन लोगों को इनसॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रक्रिया में बोली लगाने से रोकती है जो कानूनी रूप से अयोग्य हों। ईडी जाँच कर रही है कि क्या ऐसे अयोग्य व्यक्तियों ने इस प्रक्रिया का दुरुपयोग कर MBECL पर अप्रत्यक्ष रूप से फिर से नियंत्रण हासिल किया।
कोलकाता में किन जगहों पर छापेमारी हुई?
सूत्रों के अनुसार, कोलकाता में दक्षिण कोलकाता के बालीगंज और न्यू अलीपुर में दो कॉर्पोरेट कंपनियों के डायरेक्टरों के आवासों पर तलाशी ली गई। ईडी अधिकारी वहाँ बैंक खाते और कॉर्पोरेट दस्तावेज़ खंगाल रहे हैं।
ईडी की इस छापेमारी के बाद आगे क्या हो सकता है?
तलाशी अभियान के बाद ईडी आमतौर पर संबंधित व्यक्तियों को समन जारी करती है और साक्ष्यों के आधार पर संपत्ति कुर्की या गिरफ़्तारी की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। फ़िलहाल एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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