23 अक्टूबर 2026
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ईडी की दिल्ली-मुंबई समेत 6 ठिकानों पर छापेमारी, 'मेगा मिलेनियम' का हवाला नेटवर्क उजागर

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ईडी की दिल्ली-मुंबई समेत 6 ठिकानों पर छापेमारी, 'मेगा मिलेनियम' का हवाला नेटवर्क उजागर

सारांश

प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली-मुंबई समेत करजत में एक साथ छापे मारकर 'मेगा मिलेनियम' कंपनी का हवाला नेटवर्क उजागर किया। दुबई-सिंगापुर से विदेशी मुद्रा, शेल कंपनियों से लेयरिंग और IVF सेंटरों के ज़रिए एग डोनेशन रैकेट — यह मामला एक बहु-स्तरीय वित्तीय अपराध की तस्वीर पेश करता है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 23 अक्टूबर 2026 को दिल्ली, मुंबई और करजत (महाराष्ट्र) समेत लगभग 6 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
मुख्य आरोपी हरीश डेढ़िया और उनकी पत्नी धारा डेढ़िया — दोनों 'मेगा मिलेनियम' कंपनी के डायरेक्टर — पर हवाला और मनी-लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं।
कथित तौर पर दुबई और सिंगापुर की संदिग्ध कंपनियों से भारी विदेशी मुद्रा मँगाई गई और शेल कंपनियों के ज़रिए सैकड़ों करोड़ रुपये की लेयरिंग की गई।
इसी जाँच में पहले ठाणे, बारामती और नासिक के IVF सेंटरों पर छापे में ₹29 लाख नकद और डिजिटल साक्ष्य जब्त हुए।
मामला बदलापुर (ठाणे) की FIR पर आधारित है; मंजूषा वानखेड़े समेत 17 लोगों पर BNS 2023 , ART एक्ट 2021 और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के तहत आरोप हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली, मुंबई और करजत (महाराष्ट्र) समेत लगभग आधा दर्जन ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई 'मेगा मिलेनियम' कंपनी के खिलाफ विदेशी मुद्रा की अवैध आवक और फर्जी कंपनियों के ज़रिए मनी-लॉन्ड्रिंग की जाँच के तहत की गई है। अधिकारियों के अनुसार, इस छापेमारी में एक बड़े हवाला नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है।

छापेमारी के मुख्य ठिकाने और बरामदगी

ईडी ने 'मेगा मिलेनियम' के कार्यालयों के साथ-साथ कंपनी के निदेशक हरीश डेढ़िया के मुंबई और दिल्ली स्थित आवासों तथा महाराष्ट्र के करजत में उनके फार्महाउस पर भी तलाशी ली। अधिकारियों ने बताया कि अब तक कई करोड़ रुपये मूल्य की विदेशी मुद्रा, भारतीय नकदी, कीमती आभूषण और अन्य सामान बरामद किए जा चुके हैं। ईडी की यह कार्रवाई अभी भी जारी बताई जा रही है।

मुख्य आरोपी और आरोप

इस मामले में हरीश डेढ़िया और उनकी पत्नी धारा डेढ़िया — दोनों कंपनी के डायरेक्टर — मुख्य आरोपी हैं। आरोप है कि दुबई और सिंगापुर की संदिग्ध कंपनियों से भारी विदेशी मुद्रा मँगाई गई। इसके अलावा, हरीश डेढ़िया ने कथित तौर पर अपने नौकरों और डमी व्यक्तियों को डायरेक्टर बनाकर फर्जी कंपनियाँ स्थापित कीं।

ईडी के अनुसार, इन कंपनियों के बनते ही उनमें सैकड़ों करोड़ रुपये डाले गए और फिर शेल कंपनियों के ज़रिए लेयरिंग कर काले धन को सफेद किया गया। यह मनी-लॉन्ड्रिंग का एक संगठित तंत्र था, जिसमें एकाधिक स्तरों पर रकम को छुपाया गया।

IVF और एग डोनेशन नेटवर्क से जुड़ा कनेक्शन

गौरतलब है कि ईडी की इसी जाँच के तहत इससे पहले ठाणे, बारामती और नासिक में कई अस्पतालों और आईवीएफ (IVF) सेंटरों पर भी छापेमारी की गई थी, जिसमें ₹29 लाख नकद और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए थे।

ईडी ने बताया कि यह मामला एक संगठित नेटवर्क से जुड़ा है, जो आर्थिक रूप से कमज़ोर महिलाओं को 'ह्यूमन एग डोनेशन' के लिए प्रेरित करता था और फिर उन्हें विभिन्न आईवीएफ सेंटरों और असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) बैंकों तक पहुँचाता था। इन महिलाओं को पैसे का लालच देकर राज़ी किया जाता था और एजेंटों को भी कमीशन मिलता था।

जाँच में सामने आया है कि दाताओं (डोनर्स) की पहचान छिपाने, बार-बार एग डोनेशन कराने और उन्हें चिकित्सकीय रूप से 'फिट' दिखाने के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, हलफनामे, सहमति पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, ब्लड टेस्ट रिपोर्ट और बीमा कागज़ात सहित फर्जी दस्तावेज़ों का इस्तेमाल किया जाता था।

जाँच का कानूनी आधार

ईडी के अनुसार, यह जाँच महाराष्ट्र के ठाणे ज़िले के बदलापुर (पूर्व) में दर्ज एक FIR और उसके बाद दाखिल चार्जशीट के आधार पर शुरू हुई। इसमें मंजूषा वानखेड़े और 16 अन्य लोगों पर 'भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023' के तहत धोखाधड़ी और जालसाज़ी के आरोप हैं। साथ ही 'असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021' और 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940' के उल्लंघन के भी आरोप हैं।

आगे क्या होगा

ईडी की टीमें फ़िलहाल बरामद दस्तावेज़ों और डिजिटल साक्ष्यों की जाँच में जुटी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय जाँच एजेंसियाँ हवाला और मनी-लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के खिलाफ अपनी कार्रवाइयाँ तेज़ कर रही हैं। जाँच का दायरा और आरोपियों की संख्या आने वाले दिनों में बढ़ सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

शेल कंपनियाँ और IVF सेंटरों का एक ही नेटवर्क में जुड़ना बताता है कि वित्तीय अपराध अब नए क्षेत्रों में पैठ बना रहा है। 'असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी रेगुलेशन एक्ट, 2021' जैसे कानून लागू होने के बावजूद एग डोनेशन रैकेट चलते रहना, नियामक निगरानी की कमी को उजागर करता है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे मामलों में एजेंसी की कार्रवाई अक्सर देर से आती है और बड़े सूत्रधार अक्सर बचे रहते हैं। असली परीक्षा यह होगी कि क्या इस बार जाँच शीर्ष तक पहुँचेगी या सिर्फ निचले स्तर के आरोपियों तक सिमट जाएगी।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने 'मेगा मिलेनियम' पर छापा क्यों मारा?
'मेगा मिलेनियम' कंपनी पर दुबई और सिंगापुर से अवैध विदेशी मुद्रा मँगाने, फर्जी कंपनियाँ बनाकर सैकड़ों करोड़ रुपये की लेयरिंग करने और काले धन को सफेद करने का आरोप है। ईडी की यह कार्रवाई बदलापुर (ठाणे) की FIR के आधार पर चल रही मनी-लॉन्ड्रिंग जाँच का हिस्सा है।
इस मामले में मुख्य आरोपी कौन हैं?
मुख्य आरोपी हरीश डेढ़िया और उनकी पत्नी धारा डेढ़िया हैं, जो दोनों 'मेगा मिलेनियम' कंपनी के डायरेक्टर हैं। इसके अलावा मंजूषा वानखेड़े और 16 अन्य लोगों पर भी BNS 2023 के तहत धोखाधड़ी व जालसाज़ी के आरोप हैं।
IVF सेंटरों का इस हवाला मामले से क्या संबंध है?
ईडी के अनुसार, एक संगठित नेटवर्क आर्थिक रूप से कमज़ोर महिलाओं को पैसे का लालच देकर बार-बार एग डोनेशन के लिए तैयार करता था और फर्जी दस्तावेज़ों के ज़रिए उन्हें विभिन्न IVF सेंटरों और ART बैंकों तक पहुँचाता था। इसी नेटवर्क से उत्पन्न धन को कंपनियों के ज़रिए लॉन्डर किया गया।
छापेमारी में अब तक क्या बरामद हुआ?
अधिकारियों के अनुसार, अब तक कई करोड़ मूल्य की विदेशी मुद्रा, भारतीय नकदी और कीमती आभूषण बरामद किए गए हैं। ठाणे, बारामती और नासिक के IVF सेंटरों पर पहले की गई छापेमारी में ₹29 लाख नकद और डिजिटल साक्ष्य भी जब्त हुए थे।
इस जाँच का कानूनी आधार क्या है?
जाँच महाराष्ट्र के ठाणे ज़िले के बदलापुर (पूर्व) में दर्ज FIR और उसके बाद दाखिल चार्जशीट पर आधारित है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023, असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट 2021 और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के उल्लंघन के आरोप हैं।
राष्ट्र प्रेस
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