ईडी की दिल्ली-मुंबई समेत 6 ठिकानों पर छापेमारी, 'मेगा मिलेनियम' का हवाला नेटवर्क उजागर
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली, मुंबई और करजत (महाराष्ट्र) समेत लगभग आधा दर्जन ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई 'मेगा मिलेनियम' कंपनी के खिलाफ विदेशी मुद्रा की अवैध आवक और फर्जी कंपनियों के ज़रिए मनी-लॉन्ड्रिंग की जाँच के तहत की गई है। अधिकारियों के अनुसार, इस छापेमारी में एक बड़े हवाला नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है।
छापेमारी के मुख्य ठिकाने और बरामदगी
ईडी ने 'मेगा मिलेनियम' के कार्यालयों के साथ-साथ कंपनी के निदेशक हरीश डेढ़िया के मुंबई और दिल्ली स्थित आवासों तथा महाराष्ट्र के करजत में उनके फार्महाउस पर भी तलाशी ली। अधिकारियों ने बताया कि अब तक कई करोड़ रुपये मूल्य की विदेशी मुद्रा, भारतीय नकदी, कीमती आभूषण और अन्य सामान बरामद किए जा चुके हैं। ईडी की यह कार्रवाई अभी भी जारी बताई जा रही है।
मुख्य आरोपी और आरोप
इस मामले में हरीश डेढ़िया और उनकी पत्नी धारा डेढ़िया — दोनों कंपनी के डायरेक्टर — मुख्य आरोपी हैं। आरोप है कि दुबई और सिंगापुर की संदिग्ध कंपनियों से भारी विदेशी मुद्रा मँगाई गई। इसके अलावा, हरीश डेढ़िया ने कथित तौर पर अपने नौकरों और डमी व्यक्तियों को डायरेक्टर बनाकर फर्जी कंपनियाँ स्थापित कीं।
ईडी के अनुसार, इन कंपनियों के बनते ही उनमें सैकड़ों करोड़ रुपये डाले गए और फिर शेल कंपनियों के ज़रिए लेयरिंग कर काले धन को सफेद किया गया। यह मनी-लॉन्ड्रिंग का एक संगठित तंत्र था, जिसमें एकाधिक स्तरों पर रकम को छुपाया गया।
IVF और एग डोनेशन नेटवर्क से जुड़ा कनेक्शन
गौरतलब है कि ईडी की इसी जाँच के तहत इससे पहले ठाणे, बारामती और नासिक में कई अस्पतालों और आईवीएफ (IVF) सेंटरों पर भी छापेमारी की गई थी, जिसमें ₹29 लाख नकद और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए थे।
ईडी ने बताया कि यह मामला एक संगठित नेटवर्क से जुड़ा है, जो आर्थिक रूप से कमज़ोर महिलाओं को 'ह्यूमन एग डोनेशन' के लिए प्रेरित करता था और फिर उन्हें विभिन्न आईवीएफ सेंटरों और असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) बैंकों तक पहुँचाता था। इन महिलाओं को पैसे का लालच देकर राज़ी किया जाता था और एजेंटों को भी कमीशन मिलता था।
जाँच में सामने आया है कि दाताओं (डोनर्स) की पहचान छिपाने, बार-बार एग डोनेशन कराने और उन्हें चिकित्सकीय रूप से 'फिट' दिखाने के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, हलफनामे, सहमति पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, ब्लड टेस्ट रिपोर्ट और बीमा कागज़ात सहित फर्जी दस्तावेज़ों का इस्तेमाल किया जाता था।
जाँच का कानूनी आधार
ईडी के अनुसार, यह जाँच महाराष्ट्र के ठाणे ज़िले के बदलापुर (पूर्व) में दर्ज एक FIR और उसके बाद दाखिल चार्जशीट के आधार पर शुरू हुई। इसमें मंजूषा वानखेड़े और 16 अन्य लोगों पर 'भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023' के तहत धोखाधड़ी और जालसाज़ी के आरोप हैं। साथ ही 'असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021' और 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940' के उल्लंघन के भी आरोप हैं।
आगे क्या होगा
ईडी की टीमें फ़िलहाल बरामद दस्तावेज़ों और डिजिटल साक्ष्यों की जाँच में जुटी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय जाँच एजेंसियाँ हवाला और मनी-लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के खिलाफ अपनी कार्रवाइयाँ तेज़ कर रही हैं। जाँच का दायरा और आरोपियों की संख्या आने वाले दिनों में बढ़ सकती है।