26 जुलाई 2026
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ईडी की तीन राज्यों में छापेमारी: ₹142 करोड़ के ड्रग मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का भंडाफोड़

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ईडी की तीन राज्यों में छापेमारी: ₹142 करोड़ के ड्रग मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का भंडाफोड़

सारांश

म्यांमार से मेथामफेटामाइन लाकर हवाला और फर्जी कंपनियों से ₹142 करोड़ से अधिक का काला धन सफेद करने वाले नेटवर्क पर ईडी ने तीन राज्यों में एक साथ छापे मारे। भारत-बांग्लादेश सीमा पर पेड़ों पर लगे 25 से अधिक सीसीटीवी कैमरे इस नेटवर्क की परिष्कृत रणनीति की गवाही देते हैं।

मुख्य बातें

ईडी ने 9 जून 2026 को पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और मिजोरम में चार ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
मामला ₹142 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेनदेन से जुड़ा; 21 अगस्त 2025 को NH-6A पर 49.101 किलोग्राम मेथामफेटामाइन और 40 ग्राम हेरोइन जब्त हुई थी।
मिजोरम के जोखावथर निवासी हमिंगथानसांगी के खाते में ₹33 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेनदेन की पहचान।
सुमन मियां और जाशिम मियां के घरों के पास जंगलों में 25 से अधिक सीसीटीवी कैमरे मिले, जो भारत-बांग्लादेश सीमा की निगरानी कर रहे थे।
म्यांमार स्थित मुख्य सप्लायर चिंतुआंग और जबरुल हक को NCB पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।
पश्चिम बंगाल की फर्म एम/एस रिजू एंटरप्राइजेज पर अवैध धन खपाने का संदेह।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 9 जून 2026 को अंतर्राष्ट्रीय ड्रग तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और मिजोरम में एक साथ चार ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। ईडी के अनुसार, यह मामला ₹142 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेनदेन से जुड़ा है, जो म्यांमार से भारत में मेथामफेटामाइन की तस्करी से अर्जित आपराधिक धन को छिपाने के लिए संचालित किया जा रहा था।

छापेमारी की पृष्ठभूमि

ईडी के आइजोल सब-जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत यह कार्रवाई की। जांच का आधार नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की अगरतला जोनल यूनिट द्वारा दर्ज एक प्राथमिकी है। गौरतलब है कि 21 अगस्त 2025 को मिजोरम में राष्ट्रीय राजमार्ग-6ए पर एक वाहन काफिले को रोका गया था, जिसमें 49.101 किलोग्राम मेथामफेटामाइन टैबलेट और 40 ग्राम हेरोइन बरामद हुई थी। उस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

तस्करी नेटवर्क का तरीकाकार

जांच में सामने आया है कि यह एक सुनियोजित अंतर्राज्यीय और सीमा पार ड्रग तस्करी नेटवर्क था। म्यांमार स्थित सप्लायर मेथामफेटामाइन की आपूर्ति करते थे, जिसे मिजोरम के चंफाई जिले के जोखावथर सेक्टर के रास्ते भारत में लाया जाता था और फिर त्रिपुरा स्थित नेटवर्क तक पहुंचाया जाता था। ईडी के अनुसार, इस अपराध से अर्जित धन को कई बैंक खातों, फर्जी कंपनियों, नकद लेनदेन और हवाला नेटवर्क के माध्यम से घुमाकर उसके वास्तविक स्रोत और लाभार्थियों की पहचान छिपाई जाती थी।

मुख्य आरोपी और निशाने पर आई संस्थाएँ

छापेमारी में जिन प्रमुख व्यक्तियों को निशाना बनाया गया, उनमें त्रिपुरा के सिपाहीजला जिले के सोनामुरा निवासी अनवर हुसैन उर्फ सुमन मियां उर्फ 'करोड़पति सुमन' और जाशिम मियां शामिल हैं। दोनों को जब्त की गई खेप का अंतिम प्राप्तकर्ता माना जा रहा है। मिजोरम के जोखावथर निवासी हमिंगथानसांगी के परिसरों की भी तलाशी ली गई — जांच में उनके बैंक खाते में ₹33 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में स्थित एम/एस रिजू एंटरप्राइजेज की प्रोपराइटर चैताली दास के परिसरों पर भी छापा मारा गया। एजेंसी को संदेह है कि इस फर्म का उपयोग अवैध धन को वैध दिखाने के लिए किया गया।

सीमा निगरानी का चौंकाने वाला खुलासा

ईडी ने बताया कि सुमन मियां और जाशिम मियां के घरों के आसपास जंगलों में पेड़ों पर 25 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, जो भारत-बांग्लादेश अंतर्राष्ट्रीय सीमा की निगरानी कर रहे थे। यह तथ्य नेटवर्क की परिष्कृत संचालन क्षमता को उजागर करता है। तलाशी के दौरान मादक पदार्थों की पहचान के लिए डॉग स्क्वायड की भी सहायता ली गई।

मुख्य सप्लायर पहले ही गिरफ्तार

ईडी के अनुसार, म्यांमार स्थित मुख्य सप्लायर चिंतुआंग और जबरुल हक को NCB पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पूर्वोत्तर भारत में म्यांमार से मादक पदार्थों की तस्करी को लेकर केंद्रीय एजेंसियाँ सक्रिय हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ और गिरफ्तारियों तथा संपत्ति कुर्की की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

फर्जी कंपनियाँ और बहु-राज्यीय बैंकिंग का उपयोग दर्शाता है कि वित्तीय निगरानी तंत्र में अभी भी बड़े छेद हैं। असली सवाल यह है कि इतने बड़े पैमाने पर संचालित यह नेटवर्क इतने लंबे समय तक नजरों से ओझल कैसे रहा।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने तीन राज्यों में यह छापेमारी क्यों की?
ईडी ने यह कार्रवाई म्यांमार से मेथामफेटामाइन की तस्करी से जुड़े ₹142 करोड़ से अधिक के मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत की। यह जांच NCB की अगरतला जोनल यूनिट द्वारा दर्ज मामले पर आधारित है, जिसमें अगस्त 2025 में मिजोरम से बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ जब्त हुए थे।
इस मामले में कितना नशीला पदार्थ बरामद हुआ था?
21 अगस्त 2025 को मिजोरम में राष्ट्रीय राजमार्ग-6ए पर वाहन काफिले की तलाशी में 49.101 किलोग्राम मेथामफेटामाइन टैबलेट और 40 ग्राम हेरोइन बरामद हुई थी। उस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
इस नेटवर्क में किन प्रमुख लोगों पर संदेह है?
त्रिपुरा के सोनामुरा निवासी अनवर हुसैन उर्फ 'करोड़पति सुमन' और जाशिम मियां को जब्त खेप का अंतिम प्राप्तकर्ता माना जा रहा है। मिजोरम की हमिंगथानसांगी के खाते में ₹33 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेनदेन मिले हैं, जबकि पश्चिम बंगाल की फर्म एम/एस रिजू एंटरप्राइजेज पर धन खपाने का संदेह है।
तस्करी का माल भारत में कैसे लाया जाता था?
जांच के अनुसार म्यांमार स्थित सप्लायर मेथामफेटामाइन की आपूर्ति करते थे, जिसे मिजोरम के चंफाई जिले के जोखावथर सेक्टर के रास्ते भारत में लाया जाता था। इसके बाद माल त्रिपुरा स्थित नेटवर्क तक पहुंचाया जाता था।
अवैध धन को छिपाने के लिए क्या तरीके अपनाए गए?
ईडी के अनुसार अपराध से अर्जित धन को कई बैंक खातों, फर्जी कंपनियों, नकद लेनदेन और हवाला नेटवर्क के माध्यम से घुमाया जाता था। इस तरह धन के वास्तविक स्रोत और लाभार्थियों की पहचान छिपाई जाती थी।
राष्ट्र प्रेस
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