ईडी की राजेश एक्सपोर्ट्स पर बड़ी कार्रवाई: ₹600 करोड़ विदेश भेजने और शेयर हेरफेर की जांच
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 23 जून 2026 को फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा), 1999 के कथित उल्लंघन के मामले में राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (आरईएल) और उससे जुड़े व्यक्तियों के बेंगलुरु और मुंबई स्थित नौ ठिकानों पर तलाशी और जब्ती अभियान चलाया। यह कार्रवाई विदेशी लेन-देन, संदिग्ध शेयर गतिविधियों और वित्तीय रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं से जुड़ी चल रही जांच का हिस्सा है।
मुख्य घटनाक्रम
ईडी के अनुसार, आरईएल आयात-निर्यात, विदेशी निवेश और विदेशी व्यापार से जुड़ी प्राप्तियों एवं भुगतान के आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने में विफल रही। जांच एजेंसी का कहना है कि रिकॉर्ड के अभाव में कई विदेशी लेन-देन की वास्तविकता की पुष्टि करना संभव नहीं हो पाया है।
तलाशी के दौरान ईडी ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं, जिनकी विस्तृत जांच जारी है।
अफ्रीकी खदानों में निवेश और नेटिंग के आरोप
जांच एजेंसी ने बताया कि अफ्रीकी खदानों में कथित तौर पर ₹1,035 करोड़ के निवेश से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और ज़रूरी दस्तावेज अब तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इसके अलावा, ईडी ने आरोप लगाया है कि कंपनी लगभग ₹3,000 करोड़ के विदेशी व्यापार भुगतान के मुकाबले विदेशी व्यापार प्राप्तियों की संदिग्ध नेटिंग या सेट-ऑफ व्यवस्था में शामिल रही। यूएई और अन्य विदेशी स्थानों पर स्थित कुछ संदिग्ध विदेशी पक्षों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
स्टॉक में 40% का अंतर, प्रबंधन पारिश्रमिक पर सवाल
तलाशी के दौरान स्टॉक की भौतिक जांच में फैक्ट्री रिकॉर्ड और मौके पर मिले वास्तविक स्टॉक के बीच कथित तौर पर करीब 40 प्रतिशत का अंतर सामने आया। ईडी ने प्रबंधन पारिश्रमिक पर भी सवाल उठाए हैं। एजेंसी के अनुसार, कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (सीएफओ) को वर्ष 2020 से वेतन नहीं मिला, जबकि मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) को प्रतिमाह केवल ₹17,000 का भुगतान किया गया — यह तब जब कंपनी ने करीब ₹7.7 लाख करोड़ का समेकित राजस्व दर्ज किया था।
शेयर हेरफेर और ₹600 करोड़ विदेश भेजने के आरोप
ईडी ने कंपनी के शेयरों में कथित संदिग्ध ब्लॉक ट्रेड और संभावित शेयर हेरफेर की भी जांच शुरू की है। एजेंसी के अनुसार, कुछ ऐसे व्यक्तियों की भूमिका सामने आई है जिनके नाम इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) के लीक में भी उजागर हुए थे। जांच में एनआरआई बेनामीदारों के माध्यम से शेयर गतिविधियों के ज़रिए कथित तौर पर ₹600 करोड़ से अधिक की राशि भारत से बाहर भेजने के आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है।
गौरतलब है कि यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब नियामक एजेंसियाँ बड़े कॉर्पोरेट समूहों की विदेशी वित्तीय गतिविधियों पर निगरानी कड़ी कर रही हैं। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।