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ईडी की राजेश एक्सपोर्ट्स पर बड़ी कार्रवाई: ₹600 करोड़ विदेश भेजने और शेयर हेरफेर की जांच

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ईडी की राजेश एक्सपोर्ट्स पर बड़ी कार्रवाई: ₹600 करोड़ विदेश भेजने और शेयर हेरफेर की जांच

सारांश

प्रवर्तन निदेशालय ने राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के 9 ठिकानों पर छापे मारे — ₹1,035 करोड़ के अफ्रीकी खदान निवेश, ₹3,000 करोड़ की संदिग्ध नेटिंग, स्टॉक में 40% अंतर और एनआरआई बेनामीदारों के ज़रिए ₹600 करोड़ विदेश भेजने के आरोपों की जांच तेज हो गई है।

मुख्य बातें

ईडी ने 23 जून 2026 को राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (आरईएल) के बेंगलुरु और मुंबई स्थित 9 ठिकानों पर फेमा उल्लंघन के तहत तलाशी अभियान चलाया।
कंपनी पर ₹3,000 करोड़ के विदेशी व्यापार भुगतान की संदिग्ध नेटिंग और यूएई स्थित विदेशी पक्षों की संलिप्तता का आरोप है।
अफ्रीकी खदानों में कथित ₹1,035 करोड़ के निवेश से जुड़े दस्तावेज अब तक उपलब्ध नहीं कराए गए।
स्टॉक की भौतिक जांच में फैक्ट्री रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच करीब 40% का अंतर पाया गया।
सीएफओ को 2020 से वेतन नहीं, एमडी को मात्र ₹17,000 प्रतिमाह — जबकि कंपनी का समेकित राजस्व ₹7.7 लाख करोड़ बताया गया।
एनआरआई बेनामीदारों के ज़रिए कथित तौर पर ₹600 करोड़ से अधिक भारत से बाहर भेजने और आईसीआईजे लीक से जुड़े व्यक्तियों की भूमिका की जांच जारी।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 23 जून 2026 को फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा), 1999 के कथित उल्लंघन के मामले में राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (आरईएल) और उससे जुड़े व्यक्तियों के बेंगलुरु और मुंबई स्थित नौ ठिकानों पर तलाशी और जब्ती अभियान चलाया। यह कार्रवाई विदेशी लेन-देन, संदिग्ध शेयर गतिविधियों और वित्तीय रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं से जुड़ी चल रही जांच का हिस्सा है।

मुख्य घटनाक्रम

ईडी के अनुसार, आरईएल आयात-निर्यात, विदेशी निवेश और विदेशी व्यापार से जुड़ी प्राप्तियों एवं भुगतान के आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने में विफल रही। जांच एजेंसी का कहना है कि रिकॉर्ड के अभाव में कई विदेशी लेन-देन की वास्तविकता की पुष्टि करना संभव नहीं हो पाया है।

तलाशी के दौरान ईडी ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं, जिनकी विस्तृत जांच जारी है।

अफ्रीकी खदानों में निवेश और नेटिंग के आरोप

जांच एजेंसी ने बताया कि अफ्रीकी खदानों में कथित तौर पर ₹1,035 करोड़ के निवेश से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और ज़रूरी दस्तावेज अब तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इसके अलावा, ईडी ने आरोप लगाया है कि कंपनी लगभग ₹3,000 करोड़ के विदेशी व्यापार भुगतान के मुकाबले विदेशी व्यापार प्राप्तियों की संदिग्ध नेटिंग या सेट-ऑफ व्यवस्था में शामिल रही। यूएई और अन्य विदेशी स्थानों पर स्थित कुछ संदिग्ध विदेशी पक्षों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

स्टॉक में 40% का अंतर, प्रबंधन पारिश्रमिक पर सवाल

तलाशी के दौरान स्टॉक की भौतिक जांच में फैक्ट्री रिकॉर्ड और मौके पर मिले वास्तविक स्टॉक के बीच कथित तौर पर करीब 40 प्रतिशत का अंतर सामने आया। ईडी ने प्रबंधन पारिश्रमिक पर भी सवाल उठाए हैं। एजेंसी के अनुसार, कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (सीएफओ) को वर्ष 2020 से वेतन नहीं मिला, जबकि मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) को प्रतिमाह केवल ₹17,000 का भुगतान किया गया — यह तब जब कंपनी ने करीब ₹7.7 लाख करोड़ का समेकित राजस्व दर्ज किया था।

शेयर हेरफेर और ₹600 करोड़ विदेश भेजने के आरोप

ईडी ने कंपनी के शेयरों में कथित संदिग्ध ब्लॉक ट्रेड और संभावित शेयर हेरफेर की भी जांच शुरू की है। एजेंसी के अनुसार, कुछ ऐसे व्यक्तियों की भूमिका सामने आई है जिनके नाम इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) के लीक में भी उजागर हुए थे। जांच में एनआरआई बेनामीदारों के माध्यम से शेयर गतिविधियों के ज़रिए कथित तौर पर ₹600 करोड़ से अधिक की राशि भारत से बाहर भेजने के आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है।

गौरतलब है कि यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब नियामक एजेंसियाँ बड़े कॉर्पोरेट समूहों की विदेशी वित्तीय गतिविधियों पर निगरानी कड़ी कर रही हैं। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 मासिक वेतन कैसे मिल सकता है। ऐसी विसंगतियाँ नियामक निगरानी की गंभीर खामियों की ओर इशारा करती हैं। आईसीआईजे लीक से जुड़े नामों का इस जांच में उभरना यह दर्शाता है कि यह मामला घरेलू फेमा उल्लंघन से कहीं आगे जा सकता है। असली परीक्षा यह होगी कि ईडी जब्त डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कितनी जल्दी और पारदर्शी तरीके से आरोप-पत्र दाखिल करती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड पर छापे क्यों मारे?
ईडी ने फेमा, 1999 के कथित उल्लंघन के मामले में 23 जून 2026 को आरईएल के 9 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। जांच में विदेशी लेन-देन के दस्तावेज न देने, संदिग्ध नेटिंग व्यवस्था और शेयर हेरफेर के आरोप शामिल हैं।
राजेश एक्सपोर्ट्स पर कितनी राशि के अनियमित लेन-देन का आरोप है?
ईडी के अनुसार, कंपनी पर ₹3,000 करोड़ की संदिग्ध विदेशी व्यापार नेटिंग, ₹1,035 करोड़ के अफ्रीकी खदान निवेश में दस्तावेज़ी अंतर, और एनआरआई बेनामीदारों के ज़रिए ₹600 करोड़ से अधिक विदेश भेजने के आरोप हैं।
कंपनी के प्रबंधन पारिश्रमिक पर ईडी ने क्या सवाल उठाए हैं?
ईडी के अनुसार, आरईएल के सीएफओ को 2020 से वेतन नहीं मिला और एमडी को केवल ₹17,000 प्रतिमाह का भुगतान किया गया — यह तब जब कंपनी ने ₹7.7 लाख करोड़ का समेकित राजस्व दर्ज किया। एजेंसी इसे कंपनी के कारोबारी स्तर के अनुपात में असामान्य मानती है।
आईसीआईजे लीक का इस जांच से क्या संबंध है?
ईडी ने पाया है कि शेयर गतिविधियों में कुछ ऐसे व्यक्तियों की भूमिका सामने आई है जिनके नाम इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) के लीक में भी उजागर हुए थे। यह जांच के दायरे को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक विस्तारित करता है।
इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी?
ईडी तलाशी में जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की विस्तृत जांच कर रही है। एजेंसी के अनुसार, मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर आधारित होगी, जिसमें फेमा के तहत औपचारिक नोटिस या आरोप-पत्र शामिल हो सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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