15 जुलाई 2026
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ईडी ने रॉकलैंड हॉस्पिटल्स मामले में ₹158.37 करोड़ की संपत्ति कुर्क की, 71 फर्जी कंपनियों का जाल उजागर

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ईडी ने रॉकलैंड हॉस्पिटल्स मामले में ₹158.37 करोड़ की संपत्ति कुर्क की, 71 फर्जी कंपनियों का जाल उजागर

सारांश

ईडी ने रॉकलैंड हॉस्पिटल्स के प्रमोटरों के खिलाफ ₹158.37 करोड़ की संपत्ति कुर्क की है — 71 फर्जी कंपनियों के जरिए फर्जी इंप्लांट बिल और निर्माण लागत में हेरफेर का यह मामला स्वास्थ्य क्षेत्र की कॉर्पोरेट धोखाधड़ी का एक गंभीर उदाहरण है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 15 जुलाई 2026 को रॉकलैंड हॉस्पिटल्स लिमिटेड की ₹158.37 करोड़ की अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क कीं।
प्रमोटरों ने 71 फर्जी कंपनियों के माध्यम से फर्जी इंप्लांट बिल बनाकर ₹76.03 करोड़ की हेराफेरी की।
सहयोगी कंपनी सोम्या कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड के ज़रिए निर्माण लागत ₹82.34 करोड़ तक कृत्रिम रूप से बढ़ाई गई।
जांच का आधार एसएफआईओ द्वारा 31 जनवरी 2020 को दायर शिकायत है।
मामला अब पीएमएलए, 2002 के तहत न्यायनिर्णायक प्राधिकरण के समक्ष जाएगा।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय ने 15 जुलाई 2026 को रॉकलैंड हॉस्पिटल्स लिमिटेड और अन्य के विरुद्ध चल रही धन शोधन जांच के तहत ₹158.37 करोड़ की अचल संपत्तियों को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के अंतर्गत अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) द्वारा 31 जनवरी 2020 को दायर शिकायत के आधार पर शुरू हुई जांच की परिणति है।

मुख्य घटनाक्रम

ईडी की जांच में सामने आया कि रॉकलैंड हॉस्पिटल्स लिमिटेड के प्रमोटरों ने 71 कंपनियों का उपयोग करते हुए फर्जी इंप्लांट बिल तैयार किए और इस तरीके से ₹76.03 करोड़ की हेराफेरी की। इसके अतिरिक्त, अपनी सहयोगी कंपनी सोम्या कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड का इस्तेमाल कर अस्पताल की निर्माण लागत को ₹82.34 करोड़ तक कृत्रिम रूप से बढ़ाया गया। इन दोनों माध्यमों से अर्जित कुल अपराध आय ₹158.37 करोड़ आंकी गई है।

धोखाधड़ी की कार्यप्रणाली

जांच में यह भी उजागर हुआ कि आरोपियों ने अवैध धन के स्रोत को छिपाने और उसे वैध दिखाने के लिए होटल में प्रवेश कराने वाले एजेंटों और फर्जी कंपनियों का सहारा लिया। इस सुनियोजित तंत्र के ज़रिए धन को कई परतों में घुमाकर उसकी पहचान मिटाने की कोशिश की गई। यह ऐसे समय में आया है जब स्वास्थ्य क्षेत्र में वित्तीय अनियमितताओं पर केंद्रीय एजेंसियों की निगरानी पहले से तेज़ है।

ईडी की कार्रवाई

ईडी ने पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत अपराध की आय के 'मूल्य' का प्रतिनिधित्व करने वाली संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। कुर्क संपत्तियों की कुल कीमत ₹158.37 करोड़ बताई गई है। गौरतलब है कि यह अटैचमेंट अस्थायी है और मामले की आगे की सुनवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी।

पृष्ठभूमि

एसएफआईओ ने 31 जनवरी 2020 को रॉकलैंड हॉस्पिटल्स के विरुद्ध शिकायत दर्ज की थी, जिसके बाद ईडी ने अपनी स्वतंत्र जांच आरंभ की। यह मामला स्वास्थ्य क्षेत्र में कॉर्पोरेट धोखाधड़ी के उन बड़े मामलों में शुमार होता जा रहा है, जिनमें फर्जी बिलिंग और निर्माण लागत में हेरफेर जैसे हथकंडे अपनाए जाते हैं।

आगे क्या होगा

अस्थायी कुर्की के बाद मामला पीएमएलए के तहत न्यायनिर्णायक प्राधिकरण के समक्ष जाएगा, जहाँ संपत्तियों की स्थायी जब्ती पर निर्णय होगा। जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में और भी तथ्य सामने आ सकते हैं क्योंकि जांच अभी जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ फर्जी बिलिंग और निर्माण लागत में हेरफेर को दशकों तक नियामकीय निगरानी से छिपाया जा सकता है। 71 कंपनियों का जाल बिछाना यह दर्शाता है कि यह कोई छोटी चूक नहीं, बल्कि सुनियोजित कॉर्पोरेट धोखाधड़ी थी। एसएफआईओ की 2020 की शिकायत और ईडी की 2026 की कुर्की के बीच छह साल का अंतर यह सवाल उठाता है कि प्रवर्तन तंत्र की गति क्या वाकई पर्याप्त है। स्वास्थ्य क्षेत्र में जनता के विश्वास और निवेश दोनों को बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में त्वरित न्यायिक निपटारा अनिवार्य है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने रॉकलैंड हॉस्पिटल्स मामले में क्या कार्रवाई की है?
ईडी ने पीएमएलए, 2002 के तहत रॉकलैंड हॉस्पिटल्स लिमिटेड और अन्य की ₹158.37 करोड़ की अचल संपत्तियाँ 15 जुलाई 2026 को अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। यह कार्रवाई एसएफआईओ की 2020 की शिकायत पर आधारित धन शोधन जांच का हिस्सा है।
रॉकलैंड हॉस्पिटल्स के प्रमोटरों पर क्या आरोप हैं?
प्रमोटरों पर 71 फर्जी कंपनियों के ज़रिए फर्जी इंप्लांट बिल बनाकर ₹76.03 करोड़ की हेराफेरी और सहयोगी कंपनी सोम्या कंस्ट्रक्शंस के माध्यम से निर्माण लागत को ₹82.34 करोड़ तक बढ़ाने का आरोप है। कुल अपराध आय ₹158.37 करोड़ आंकी गई है।
इस जांच की शुरुआत कैसे हुई?
जांच की शुरुआत गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) द्वारा 31 जनवरी 2020 को दायर शिकायत के आधार पर हुई। इस शिकायत के बाद ईडी ने पीएमएलए के तहत स्वतंत्र जांच शुरू की।
अस्थायी कुर्की के बाद मामला आगे कहाँ जाएगा?
अस्थायी कुर्की के बाद मामला पीएमएलए, 2002 के तहत न्यायनिर्णायक प्राधिकरण के समक्ष जाएगा, जहाँ संपत्तियों की स्थायी जब्ती पर निर्णय होगा। जांच अभी जारी है और आगे और खुलासे संभव हैं।
धन शोधन के लिए किस तरीके का इस्तेमाल किया गया?
आरोपियों ने अवैध धन के स्रोत को छिपाने के लिए होटल एजेंटों और फर्जी कंपनियों का उपयोग किया। धन को कई परतों में घुमाकर उसे वैध दिखाने की कोशिश की गई, जो धन शोधन की एक जटिल कार्यप्रणाली है।
राष्ट्र प्रेस
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