ईडी ने रॉकलैंड हॉस्पिटल्स मामले में ₹158.37 करोड़ की संपत्ति कुर्क की, 71 फर्जी कंपनियों का जाल उजागर
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय ने 15 जुलाई 2026 को रॉकलैंड हॉस्पिटल्स लिमिटेड और अन्य के विरुद्ध चल रही धन शोधन जांच के तहत ₹158.37 करोड़ की अचल संपत्तियों को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के अंतर्गत अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) द्वारा 31 जनवरी 2020 को दायर शिकायत के आधार पर शुरू हुई जांच की परिणति है।
मुख्य घटनाक्रम
ईडी की जांच में सामने आया कि रॉकलैंड हॉस्पिटल्स लिमिटेड के प्रमोटरों ने 71 कंपनियों का उपयोग करते हुए फर्जी इंप्लांट बिल तैयार किए और इस तरीके से ₹76.03 करोड़ की हेराफेरी की। इसके अतिरिक्त, अपनी सहयोगी कंपनी सोम्या कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड का इस्तेमाल कर अस्पताल की निर्माण लागत को ₹82.34 करोड़ तक कृत्रिम रूप से बढ़ाया गया। इन दोनों माध्यमों से अर्जित कुल अपराध आय ₹158.37 करोड़ आंकी गई है।
धोखाधड़ी की कार्यप्रणाली
जांच में यह भी उजागर हुआ कि आरोपियों ने अवैध धन के स्रोत को छिपाने और उसे वैध दिखाने के लिए होटल में प्रवेश कराने वाले एजेंटों और फर्जी कंपनियों का सहारा लिया। इस सुनियोजित तंत्र के ज़रिए धन को कई परतों में घुमाकर उसकी पहचान मिटाने की कोशिश की गई। यह ऐसे समय में आया है जब स्वास्थ्य क्षेत्र में वित्तीय अनियमितताओं पर केंद्रीय एजेंसियों की निगरानी पहले से तेज़ है।
ईडी की कार्रवाई
ईडी ने पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत अपराध की आय के 'मूल्य' का प्रतिनिधित्व करने वाली संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। कुर्क संपत्तियों की कुल कीमत ₹158.37 करोड़ बताई गई है। गौरतलब है कि यह अटैचमेंट अस्थायी है और मामले की आगे की सुनवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी।
पृष्ठभूमि
एसएफआईओ ने 31 जनवरी 2020 को रॉकलैंड हॉस्पिटल्स के विरुद्ध शिकायत दर्ज की थी, जिसके बाद ईडी ने अपनी स्वतंत्र जांच आरंभ की। यह मामला स्वास्थ्य क्षेत्र में कॉर्पोरेट धोखाधड़ी के उन बड़े मामलों में शुमार होता जा रहा है, जिनमें फर्जी बिलिंग और निर्माण लागत में हेरफेर जैसे हथकंडे अपनाए जाते हैं।
आगे क्या होगा
अस्थायी कुर्की के बाद मामला पीएमएलए के तहत न्यायनिर्णायक प्राधिकरण के समक्ष जाएगा, जहाँ संपत्तियों की स्थायी जब्ती पर निर्णय होगा। जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में और भी तथ्य सामने आ सकते हैं क्योंकि जांच अभी जारी है।