16 जुलाई 2026
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कामदुनी 2013 केस: पीड़िता परिवार ने CM सुवेंदु अधिकारी से फाइल दोबारा खोलने की माँग की

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कामदुनी 2013 केस: पीड़िता परिवार ने CM सुवेंदु अधिकारी से फाइल दोबारा खोलने की माँग की

सारांश

13 साल बाद भी कामदुनी की वह रात न्याय की राह तक नहीं पहुँची। पीड़िता की सहेलियाँ और परिजन अब नई सरकार के दरवाजे पर हैं — हाथ में वही फाइल, आँखों में वही उम्मीद। CM सुवेंदु अधिकारी ने भरोसा दिया है, लेकिन असली परीक्षा अदालत में होगी।

मुख्य बातें

कामदुनी 2013 गैंगरेप-हत्याकांड की पीड़िता के परिजन और सहेलियों ने 15 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात कर केस फाइल दोबारा खोलने की माँग की।
मुलाकात कोलकाता के साल्ट लेक स्थित BJP राज्य कार्यालय में आयोजित 'जनता दरबार' के दौरान हुई।
7 जून 2013 को उत्तर 24 परगना की 20 वर्षीय युवती के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या हुई थी।
2016 में सेशंस कोर्ट ने दो दोषियों को मृत्युदंड और चार को आजीवन कारावास दिया था; कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 6 अक्टूबर 2023 को सभी की सजाएँ घटा दीं।
चार दोषियों की सजा घटाकर 7 वर्ष की गई और उन्हें ₹10,000 के बॉन्ड पर जमानत मिली; राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है।
मुख्यमंत्री ने न्याय दिलाने का आश्वासन दिया; पहले बारुईपुर में भी कानूनी सहायता का वादा किया था।

कोलकाता के साल्ट लेक स्थित भाजपा राज्य कार्यालय में बुधवार, 15 जुलाई 2026 को कामदुनी सामूहिक बलात्कार एवं हत्याकांड (2013) की पीड़िता के परिजनों और करीबी सहेलियों ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात कर इस बहुचर्चित मामले की फाइल पुनः खोलने की अपील की। न्याय की इस लड़ाई में शुरू से अग्रणी भूमिका निभाने वाली मौसमी कयाल और तुम्पा कयाल प्रतिनिधिमंडल में शामिल थीं।

जनता दरबार में पहुँचा न्याय का दर्द

राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ने 'जनता दरबार' की शुरुआत की है, जो हर सप्ताह एक निर्धारित दिन कोलकाता के साल्ट लेक में पार्टी के राज्य कार्यालय में आयोजित होता है। इस मंच का उद्देश्य आम नागरिकों की शिकायतें सीधे सुनना और समाधान सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी स्वयं इन बैठकों में उपस्थित रहते हैं।

बुधवार को पीड़िता के परिजन और मौसमी कयाल तथा तुम्पा कयाल हाथों में 'कामदुनी केस फाइल' लिखा लिफाफा लेकर कार्यालय पहुँचीं। बाद में उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि उन्हें न्याय दिलाने का आश्वासन दिया गया है।

पीड़िता की सहेलियों ने क्या कहा

मौसमी कयाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'पिछली सरकार के दौरान फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने दोषियों को फाँसी की सजा सुनाई थी, लेकिन दोषियों को रिहा कर दिया गया। आज हम जनता की अदालत में कामदुनी फाइल को फिर से खोलने की माँग लेकर आए हैं। हमें फिर से न्याय मिलना चाहिए, क्योंकि पिछली सरकार ने हमें न्याय नहीं दिया।'

तुम्पा कयाल ने कहा, 'हमारी कई माँगें हैं। हमें मुख्यमंत्री पर पूरा भरोसा है। उन्होंने बारुईपुर में घोषणा की थी कि वह कामदुनी मामले में कानूनी सहायता प्रदान करेंगे और सरकारी वकील के साथ मामले को फिर से खोलेंगे। पिछली सरकार ने दोषियों को बरी कराने के लिए 14 सरकारी वकीलों का तबादला कर दिया था। उन दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।'

मुख्य घटनाक्रम: 2013 से अब तक

7 जून 2013 को उत्तर 24 परगना जिले के कामदुनी गाँव की एक 20 वर्षीय युवती के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या की वारदात हुई थी, जिसने पूरे पश्चिम बंगाल को झकझोर दिया था। 2016 में सेशंस कोर्ट ने छह आरोपियों में से दो को मृत्युदंड और चार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

बाद में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सभी की सजाएँ घटा दीं। 6 अक्टूबर 2023 के अपने फैसले में उच्च न्यायालय ने दोषी सैफुल अली और अंसार अली की मृत्युदंड की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। वहीं, अमीन अली, अमीनुल इस्लाम, भोला नस्कर और इनामुल हक — जिन्हें निचली अदालत ने आजीवन कारावास दिया था — की सजा घटाकर सात वर्ष कर दी गई। चूँकि वे पहले से 10 वर्ष जेल में बिता चुके थे, उन्हें ₹10,000 के बॉन्ड पर जमानत भी मिल गई। हालाँकि, राज्य सरकार ने इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है।

आगे क्या होगा

मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद अब यह देखना होगा कि राज्य सरकार सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामले को किस तरह आगे बढ़ाती है और क्या फाइल दोबारा खोलने की प्रक्रिया कानूनी रूप से संभव है। पीड़िता के परिजन और समर्थक न्याय की उम्मीद लेकर अब सरकार की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि मामला अब सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है — राज्य सरकार की इच्छाशक्ति से परे, कानूनी प्रक्रिया की अपनी सीमाएँ हैं। मुख्यमंत्री का आश्वासन राजनीतिक रूप से सार्थक है, परंतु 'फाइल दोबारा खोलना' तकनीकी रूप से तभी संभव होगा जब सर्वोच्च न्यायालय में अपील ठोस कानूनी आधार पर आगे बढ़े। असली परीक्षा अदालत की दहलीज पर होगी, न कि जनता दरबार में।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कामदुनी 2013 केस क्या है?
7 जून 2013 को पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के कामदुनी गाँव में एक 20 वर्षीय युवती के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या की गई थी। इस मामले ने पूरे राज्य में व्यापक विरोध प्रदर्शन को जन्म दिया था।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने कामदुनी मामले में क्या फैसला दिया था?
6 अक्टूबर 2023 को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने दोषी सैफुल अली और अंसार अली की मृत्युदंड की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। साथ ही चार अन्य दोषियों — अमीन अली, अमीनुल इस्लाम, भोला नस्कर और इनामुल हक — की आजीवन कारावास की सजा घटाकर सात वर्ष कर दी और उन्हें ₹10,000 के बॉन्ड पर जमानत दे दी।
पीड़िता परिवार की मुख्यमंत्री से क्या माँग है?
परिजन और सहेलियाँ मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से कामदुनी केस फाइल दोबारा खोलने और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की माँग कर रही हैं। उनका आरोप है कि पिछली सरकार ने दोषियों को बरी कराने के लिए 14 सरकारी वकीलों का तबादला किया था।
क्या राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है?
हाँ, राज्य सरकार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है। यह मामला अभी भी सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
जनता दरबार क्या है और यह कहाँ आयोजित होता है?
जनता दरबार पश्चिम बंगाल की वर्तमान BJP सरकार द्वारा शुरू किया गया एक साप्ताहिक कार्यक्रम है, जो कोलकाता के साल्ट लेक स्थित BJP राज्य कार्यालय में आयोजित होता है। इसमें मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी स्वयं उपस्थित रहकर आम नागरिकों की शिकायतें सुनते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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