सुवेंदु अधिकारी का पहला जनता दरबार कोलकाता में, मुख्यमंत्री के गांव के लोग भी पहुंचे शिकायत लेकर
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार, 18 मई 2026 को कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित भारतीय जनता पार्टी (BJP) कार्यालय में अपना पहला जनता दरबार आयोजित किया। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद यह पहल अन्य BJP-शासित राज्यों की स्थापित परंपरा के अनुरूप शुरू की गई है, जहाँ आम नागरिक सीधे मुख्यमंत्री तक अपनी समस्याएं पहुँचा सकते हैं।
मुख्य घटनाक्रम
सुबह से ही भाजपा कार्यालय के बाहर लंबी कतारें लग गईं। मुख्यमंत्री अधिकारी ने एक-एक कर नागरिकों की बात सुनी और संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के समाधान के लिए दिशा-निर्देश दिए। यह दरबार अब प्रत्येक सोमवार को नियमित रूप से आयोजित होगा।
नेताओं की प्रतिक्रिया
BJP नेता लॉकेट चटर्जी ने इस अवसर पर कहा, 'यह बहुत अच्छी बात है, इसका असर भी दिख रहा है। आज बहुत से लोग कतार में खड़े रहे। हर सोमवार को मुख्यमंत्री यहां आएंगे, जनता दरबार लगाएंगे, लोगों की बातें सुनेंगे और उनकी समस्याओं को सुलझाने की कोशिश करेंगे। एक-एक करके सभी की बात सुनी जाएगी।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि नागरिकों ने कई महत्वपूर्ण मुद्दे सामने रखे और मुख्यमंत्री उनके समाधान में जुट गए।
हिंदू सुरक्षा समिति की माँगें
हिंदू सुरक्षा समिति के सदस्य भी बंगाल के विभिन्न हिस्सों से जनता दरबार में पहुँचे। समिति के सदस्य वृंदावन दास महाराज ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री से महिला सुरक्षा को लेकर विशेष माँगें रखीं। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं थीं।
मुख्यमंत्री के गांव के लोग भी पहुँचे
उल्लेखनीय यह रहा कि सुवेंदु अधिकारी के अपने गांव के निवासी भी जनता दरबार में शामिल हुए। हिंदू सुरक्षा समिति के एक सदस्य ने कहा, 'मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी हमारे ही गांव के हैं। हम यहां इसलिए आए क्योंकि हमारे गांव में अधिकतर चीजें तो ठीक-ठाक हैं, लेकिन कुछ जगहों पर समस्याएं हैं, जिनके बारे में सुवेंदु अधिकारी को जानकारी नहीं है। हम उन्हें इसी बारे में बताने आए थे।' यह तथ्य दर्शाता है कि जनता दरबार केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर तक पहुँचने का एक माध्यम बन रहा है।
आगे की राह
यह साप्ताहिक जनता दरबार पश्चिम बंगाल में नई सरकार की शासन-शैली का प्रमुख हिस्सा बनने जा रहा है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद प्रशासनिक पारदर्शिता और जन-संपर्क को लेकर जो अपेक्षाएं हैं, यह पहल उन्हें पूरा करने की दिशा में पहला ठोस कदम मानी जा रही है।