तमन्ना खातून हत्याकांड: पीड़ित परिवार की माँग पर बंगाल सरकार ने बदला सरकारी वकील, बिवास चट्टोपाध्याय को सौंपी जिम्मेदारी
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार ने नाबालिग तमन्ना खातून हत्याकांड में पीड़ित परिवार की लंबे समय से लंबित माँग को स्वीकार करते हुए सरकारी अभियोजक बदल दिया है। 26 जून 2026 को अधिकारियों ने पुष्टि की कि सुबेदी सान्याल की जगह अब बिवास चट्टोपाध्याय इस मामले में लोक अभियोजक की भूमिका निभाएंगे। चट्टोपाध्याय ऐसे संवेदनशील मामलों में त्वरित न्याय दिलाने के लिए जाने जाते हैं।
मुख्य घटनाक्रम
नादिया जिले के कालीगंज की रहने वाली नाबालिग तमन्ना खातून की 23 जून 2025 को एक विस्फोट में मौत हो गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, विधानसभा चुनाव में जीत के जुलूस के दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर उसके घर पर देसी बम फेंके, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। तमन्ना का परिवार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीएम — का समर्थक था।
परिवार की माँग और मुख्यमंत्री से मुलाकात
पीड़िता की माँ सबीना यास्मीन शेख ने कई बार तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से चट्टोपाध्याय को अभियोजक नियुक्त करने की माँग की थी — मौखिक और लिखित, दोनों रूपों में। नबन्ना स्थित राज्य सचिवालय के एक अधिकारी के अनुसार, किसी न किसी वजह से उनकी माँग नहीं मानी गई।
इस सप्ताह की शुरुआत में सबीना यास्मीन शेख ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की और मामले में त्वरित न्याय की अपील की। अधिकारी ने बताया, मुख्यमंत्री ने माँग को स्वीकार किया और जरूरी निर्देश दिए। आखिरकार चट्टोपाध्याय को इस केस में अभियोजन की जिम्मेदारी सौंप दी गई।
पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया
तमन्ना की माँ ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का आभार जताया। उन्होंने विशेष रूप से दो बिंदुओं के लिए धन्यवाद दिया — मामले में लंबे समय से फरार पाँच आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने और चट्टोपाध्याय को अभियोजक नियुक्त करने की उनकी माँग मानने के लिए।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह घटना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम के बाद की हिंसा से जुड़ी है। सबीना यास्मीन शेख ने कालीगंज सीट से सीपीएम उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। इस सीट पर TMC की अलीफा अहमद ने जीत दर्ज की थी। यह मामला राजनीतिक हिंसा के उन गंभीर आरोपों का हिस्सा है जो चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में सामने आए।
आगे क्या होगा
बिवास चट्टोपाध्याय के अभियोजन की जिम्मेदारी सँभालने के साथ ही पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि मामले की सुनवाई में तेजी आएगी। फरार पाँच आरोपियों की गिरफ्तारी अभी भी एक प्रमुख लंबित मुद्दा बनी हुई है, जिस पर सरकार का ध्यान माँगा गया है।