दक्षिण कोरिया: KTV के पूर्व प्रमुख ली उन-वू पर मार्शल लॉ 'विद्रोह प्रचार' का आरोप तय, बिना गिरफ्तारी मुकदमा
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया के सोल में 11 अगस्त 2026 को विशेष जांच दल ने सरकारी प्रसारक केटीवी (KTV) के पूर्व प्रमुख ली उन-वू पर 'विद्रोह प्रचार' का आरोप औपचारिक रूप से तय कर दिया है। आरोप है कि 3 दिसंबर 2024 को पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल द्वारा मार्शल लॉ लागू किए जाने के बाद ली ने करीब 10 दिनों तक केटीवी पर ऐसे समाचार बार-बार प्रसारित करवाए जो मार्शल लॉ को वैध ठहराते थे। जांच दल ने उन्हें गिरफ्तार किए बिना मुकदमे के लिए न्यायालय में भेज दिया है।
मुख्य आरोप: क्या किया ली उन-वू ने
जांचकर्ताओं के अनुसार, ली उन-वू ने मार्शल लॉ की अवधि के दौरान केटीवी पर आपातकालीन कदम की आलोचना करने वाली खबरों को दबाया और हटाया। इसके साथ ही, यून के मार्शल लॉ को वैध बताने वाली सामग्री को प्रमुखता से प्रसारित किया गया। विशेष जांच दल ने इस कार्रवाई को दक्षिण कोरियाई आपराधिक कानून के तहत 'विद्रोह का प्रचार' माना है।
गौरतलब है कि दक्षिण कोरिया के आपराधिक कानून की धारा 90 के तहत विद्रोह को उकसाने या उसका प्रचार करने पर कम से कम तीन साल की सजा का प्रावधान है।
विद्रोह की अवधि: 14 दिसंबर तक मानी गई
विशेष जांच दल ने इस मामले में कथित विद्रोह की अवधि केवल 4 दिसंबर 2024 तक नहीं, बल्कि 14 दिसंबर 2024 तक मानी है। 14 दिसंबर को दक्षिण कोरिया की नेशनल असेंबली ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित किया था, जिसे इस पूरे प्रकरण का निर्णायक मोड़ माना जाता है।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
ली उन-वू पर इससे पहले भी यून के मार्शल लॉ के विरुद्ध आलोचनात्मक सामग्री को सेंसर करने के आरोप में एक अलग मुकदमा चल चुका है। उस मामले में उन्हें जून में एक साल की निलंबित जेल सजा (सस्पेंडेड सेंटेंस) सुनाई गई थी। हालाँकि, उस समय विशेष जांच दल ने उन्हें 'विद्रोह के प्रचार' के आरोप से मुक्त कर दिया था।
यह ऐसे समय में आया है जब मई में मौजूदा विशेष जांच दल ने ली की गिरफ्तारी का वारंट माँगा था, लेकिन अदालत ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि आरोपों को लेकर विवाद की गुंजाइश है।
नेशनल फायर एजेंसी प्रमुख पर भी आरोप
इसी मामले में विशेष जांच दल ने नेशनल फायर एजेंसी के पूर्व प्रमुख हियो सुक-गॉन के खिलाफ भी आरोपपत्र दाखिल किया है। जांचकर्ताओं के अनुसार, हियो ने तत्कालीन गृह मंत्री ली सांग-मिन के उन आदेशों को आगे पहुँचाया, जिनमें यून के मार्शल लॉ लागू करने के बाद पूर्व राष्ट्रपति के आलोचक मीडिया संस्थानों की बिजली और पानी की आपूर्ति काटने की बात कही गई थी।
पूर्व गृह मंत्री को नौ साल की सजा
पूर्व गृह मंत्री ली सांग-मिन को इसी मामले में मई में अपीलीय अदालत ने विद्रोह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का दोषी ठहराते हुए नौ साल जेल की सजा सुनाई थी। उन्होंने इस फैसले के खिलाफ अपील की है।
केटीवी, संस्कृति, खेल और पर्यटन मंत्रालय से संबद्ध कोरिया पॉलिसी ब्रॉडकास्टिंग सर्विस के तहत संचालित होता है। यह मामला दक्षिण कोरिया में मीडिया की स्वतंत्रता और राज्य-नियंत्रित प्रसारण की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करता है। आने वाले महीनों में ली उन-वू का मुकदमा इस पूरे मार्शल लॉ प्रकरण की कानूनी परिणति का एक अहम हिस्सा बनेगा।